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पौष पुत्रदा एकादशी पूजा विधि महत्व व्रत कथा जानें

पौष पुत्रदा एकादशी का पूजा विधि, व्रत कथा और महत्व जानें। इस पावन दिन व्रत रखकर संतान सुख और मोक्ष की प्राप्ति करें। पूजा की सही विधि यहाँ पढ़ें।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

इस दिन है पौष पुत्रदा एकादशी, जानें पूजा विधि, महत्व और व्रत कथा

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और पौष पुत्रदा एकादशी इनमें से एक पवित्र तिथि है। यह व्रत संतान प्राप्ति, पुत्र की कामना और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है। इस लेख में हम आपको इस एकादशी की पूजा विधि, महत्व और मनोहारी व्रत कथा के बारे में विस्तार से बताएंगे।

Contents
इस दिन है पौष पुत्रदा एकादशी, जानें पूजा विधि, महत्व और व्रत कथापौष पुत्रदा एकादशी का महत्वमुख्य लाभ:पौष पुत्रदा एकादशी व्रत विधिव्रत की तैयारीव्रत का दिनपूजा मंत्रपौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथाकथा का मूल संदेशव्रत में ध्यान रखने योग्य बातेंपौष पुत्रदा एकादशी का आध्यात्मिक महत्वतीन प्रमुख लाभ:निष्कर्ष

पौष पुत्रदा एकादशी का महत्व

पौष पुत्रदा एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।

मुख्य लाभ:

  • संतान प्राप्ति में सहायक
  • पुत्र रत्न की प्राप्ति
  • पितृ दोषों से मुक्ति
  • मोक्ष की प्राप्ति
  • पारिवारिक सुख-शांति

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत विधि

व्रत की तैयारी

एकादशी से एक दिन पहले यानी दशमी को सात्विक भोजन ग्रहण करें और रात्रि में भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए शीघ्र सोएं।

व्रत का दिन

  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
  • स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
  • भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
  • तुलसी दल, फूल, फल और मेवे अर्पित करें
  • घी का दीपक जलाएं और धूप दें

पूजा मंत्र

इस मंत्र का जाप करें:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
या
“श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा”

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

प्राचीन काल में भद्रावती नगरी में सुकेतु नामक राजा राज्य करते थे। वे धर्मपरायण थे किंतु संतानहीनता से दुखी रहते थे। एक दिन महर्षि लोमश ने उन्हें पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।

राजा ने पूरी श्रद्धा से यह व्रत किया और भगवान विष्णु की कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। इस पुत्र का नाम धर्मगुप्त रखा गया जो आगे चलकर महान योद्धा और धर्मात्मा राजा बना।

कथा का मूल संदेश

  • श्रद्धा और विश्वास से किया गया व्रत फलदायी होता है
  • भगवान विष्णु भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं
  • संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत विशेष फलदायी है

व्रत में ध्यान रखने योग्य बातें

  • एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित है
  • पूरे दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • क्रोध, झूठ और हिंसा से बचें
  • रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन करें
  • द्वादशी को पारण करने से पहले ब्राह्मण को दान दें

पौष पुत्रदा एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

यह व्रत न केवल संतान प्राप्ति के लिए बल्कि आत्मशुद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण है। एकादशी का व्रत रखने से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।

तीन प्रमुख लाभ:

  • शारीरिक शुद्धि: उपवास से शरीर डिटॉक्स होता है
  • मानसिक शांति: भगवान का स्मरण मन को शांत करता है
  • आध्यात्मिक उन्नति: भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ने का अवसर

निष्कर्ष

पौष पुत्रदा एकादशी हिंदू धर्म का एक पावन पर्व है जो संतान सुख और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए, हम सभी इस पवित्र एकादशी पर भगवान नारायण की भक्ति में डूब जाएं और जीवन के सच्चे सुख की प्राप्ति करें।

श्री हरि विष्णु सभी भक्तों के मनोरथ पूर्ण करें! हरि ॐ!

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