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राम मंदिर भूमि पूजन मुहूर्त विवाद: एक पवित्र अवसर पर उठे सवाल
श्री राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर निर्माण का ऐतिहासिक क्षण 5 अगस्त 2020 को आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमि पूजन संपन्न किया। परंतु इस पावन मुहूर्त को लेकर कुछ ज्योतिषियों और धर्मगुरुओं ने विवाद उठाया। आइए जानते हैं कि क्यों इस पवित्र समय को लेकर मतभेद हुए और वास्तविकता क्या है।
भूमि पूजन का महत्व और चयनित तिथि
5 अगस्त 2020 को सुबह 12:44 बजे से 1:34 बजे तक के समय को अभिजीत मुहूर्त के रूप में चुना गया। यह मुहूर्त शास्त्रों में सर्वाधिक शुभ माना जाता है, जिसमें किसी भी कार्य का आरंभ विशेष फलदायी होता है।
- तिथि: श्रावण मास, शुक्ल पक्ष, पूर्णिमा
- नक्षत्र: श्रवण नक्षत्र
- योग: सिद्धि योग
- करण: बव
विवाद के मुख्य बिंदु
1. राहुकाल की आशंका
कुछ विद्वानों ने तर्क दिया कि भूमि पूजन का समय राहुकाल में पड़ रहा था, जो शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। परंतु श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुताबिक, अभिजीत मुहूर्त में राहुकाल का प्रभाव नहीं माना जाता।
2. चन्द्र दोष की बहस
कुछ ज्योतिषियों ने चन्द्रमा के वृश्चिक राशि में होने को दोषपूर्ण बताया, जबकि दूसरे विद्वानों ने इसे शुभ संकेत माना क्योंकि चन्द्रमा श्रवण नक्षत्र में थे।
3. शनि की स्थिति
शनि का मकर राशि में वक्री होना कुछ लोगों को चिंतित कर रहा था, लेकिन प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्रा ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति दीर्घकालिक मंगलकारी है।
धर्मशास्त्रों के आधार पर स्पष्टीकरण
काशी के प्रख्यात ज्योतिषी पं. राजेश शर्मा के अनुसार:
- अभिजीत मुहूर्त में सभी छोटे दोष नष्ट हो जाते हैं
- श्रवण नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का प्रिय नक्षत्र है
- पूर्णिमा तिथि श्रीराम के आदर्शों का प्रतीक है
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने इस मुहूर्त को पूर्णतः शास्त्रसम्मत बताया। उन्होंने कहा, “जब भक्ति और श्रद्धा शुद्ध हो, तो समय के छोटे-मोटे दोष महत्वहीन हो जाते हैं।”
ऐतिहासिक संदर्भ
रामायण काल से जुड़े प्रसंगों में देखें तो:
- श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई अशुभ मुहूर्त में ही की थी
- भगवान कृष्ण ने महाभारत युद्ध अमावस्या को प्रारंभ कराया
- शास्त्र कहते हैं – धर्मयुद्ध के लिए मुहूर्त नहीं देखा जाता
भक्तों की भावना सर्वोपरि
अयोध्या के वरिष्ठ पुजारी महंत दिनेंद्र दास ने भावुक होकर कहा, “500 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद जब प्रभु राम के मंदिर का शुभारंभ हो रहा है, तो कौन सा मुहूर्त अशुभ हो सकता है? भक्ति ही सबसे बड़ा मुहूर्त है।”
निष्कर्ष: विवाद नहीं, एकता का संदेश
यह विवाद केवल कुछ तकनीकी बिंदुओं तक सीमित रहा। अधिकांश संतों और भक्तों ने इस पावन अवसर को सनातन धर्म की विजय के रूप में ही देखा। जब करोड़ों हिंदुओं की आस्था और विश्वास एक साथ बह रहा हो, तो वही सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त बन जाता है।
जैसे रामसेतु निर्माण में गिलहरी का योगदान भी महत्वपूर्ण था, वैसे ही इस महायज्ञ में हर भक्त की भावना प्रभु श्रीराम तक पहुँची। जय श्रीराम!
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