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Chaturdashi Shradh 2025: आज चतुर्दशी श्राद्ध जानें समय और किनका श्राद्ध

आज चतुर्दशी श्राद्ध 2025 में जानें तर्पण का सही समय, विधि और किन पूर्वजों का श्राद्ध करें। पितृ पक्ष में श्रद्धा से करें तर्पण, मोक्ष प्राप्ति का है यह शुभ अवसर।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

Chaturdashi Shradh 2025: आज है चतुर्दशी श्राद्ध, जानें तर्पण का समय और किन लोगों का करें श्राद्ध

पितृपक्ष का चौदहवां दिन, जिसे चतुर्दशी श्राद्ध के नाम से जाना जाता है, पितरों की आत्मा की शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु अकाल या दुर्घटना में हुई हो। आइए जानते हैं इस पावन दिन के महत्व, तर्पण के शुभ मुहूर्त और श्राद्ध विधि के बारे में विस्तार से।

Contents
Chaturdashi Shradh 2025: आज है चतुर्दशी श्राद्ध, जानें तर्पण का समय और किन लोगों का करें श्राद्धचतुर्दशी श्राद्ध का महत्वकिन लोगों का करें चतुर्दशी श्राद्ध?चतुर्दशी श्राद्ध 2025 का शुभ मुहूर्तश्राद्ध के लिए राहु काल से बचेंचतुर्दशी श्राद्ध की विधिसुबह की तैयारीतर्पण विधिब्राह्मण भोजचतुर्दशी श्राद्ध में क्या खास बरतें?क्या न करें?चतुर्दशी श्राद्ध की कथानिष्कर्ष

चतुर्दशी श्राद्ध का महत्व

हिंदू धर्म में पितृपक्ष के दौरान पितरों को याद करके उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। चतुर्दशी श्राद्ध का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि:

  • इस दिन अकाल मृत्यु प्राप्त लोगों का श्राद्ध किया जाता है
  • पितरों की आत्मा को मोक्ष प्राप्ति में सहायता मिलती है
  • परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है
  • पितृ दोष से मुक्ति मिलती है

किन लोगों का करें चतुर्दशी श्राद्ध?

चतुर्दशी श्राद्ध विशेष रूप से निम्नलिखित लोगों के लिए किया जाता है:

  • जिनकी मृत्यु हथियार, आग या दुर्घटना से हुई हो
  • आत्महत्या करने वाले पूर्वज
  • जहर या विष से मरने वाले लोग
  • जल समाधि लेने वाले
  • युद्ध में मारे गए योद्धा

चतुर्दशी श्राद्ध 2025 का शुभ मुहूर्त

वर्ष 2025 में चतुर्दशी श्राद्ध 28 सितंबर, रविवार को मनाया जाएगा। तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए शुभ समय इस प्रकार है:

  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 27 सितंबर रात 09:14 बजे
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त: 28 सितंबर रात 11:42 बजे
  • तर्पण का श्रेष्ठ समय: प्रातः 11:15 से दोपहर 01:45 तक
  • कुतुप काल: दोपहर 12:07 से 12:55 तक (सर्वोत्तम समय)

श्राद्ध के लिए राहु काल से बचें

28 सितंबर 2025 को राहु काल दोपहर 03:00 से 04:30 बजे तक रहेगा। इस समय श्राद्ध कर्म न करें।

चतुर्दशी श्राद्ध की विधि

चतुर्दशी श्राद्ध को विधि-विधान से करने पर ही पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं सही विधि:

सुबह की तैयारी

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • पितरों का स्मरण करते हुए संकल्प लें
  • गाय, कौए और कुत्ते के लिए भोजन निकालें

तर्पण विधि

  • तिल, जल, कुशा और फूल लेकर तर्पण करें
  • निम्न मंत्र का उच्चारण करें: “ॐ पितृभ्य: स्वधायिभ्य: स्वधा नम:”
  • दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित करें

ब्राह्मण भोज

  • योग्य ब्राह्मण को भोजन कराएं
  • दक्षिणा के साथ वस्त्र, फल आदि दान करें
  • ब्राह्मण से पितरों के लिए आशीर्वाद लें

चतुर्दशी श्राद्ध में क्या खास बरतें?

इस दिन विशेष रूप से निम्न बातों का ध्यान रखें:

  • काला तिल: तर्पण में काले तिल का विशेष महत्व है
  • कुशा: कुशा के आसन पर बैठकर श्राद्ध करें
  • खीर: पितरों को खीर का भोग लगाएं
  • दीपक: तिल के तेल का दीपक जलाएं

क्या न करें?

  • लहसुन, प्याज का प्रयोग न करें
  • मांसाहार और मदिरा से परहेज करें
  • किसी से झगड़ा न करें
  • अन्न का अपव्यय न करें

चतुर्दशी श्राद्ध की कथा

पुराणों में वर्णित एक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध में मारे गए योद्धाओं की आत्मा को शांति देने के लिए भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को चतुर्दशी श्राद्ध करने की सलाह दी थी। इस दिन श्राद्ध करने से अकाल मृत्यु प्राप्त आत्माओं को मुक्ति मिलती है और वे पितृलोक में स्थान पाते हैं।

निष्कर्ष

चतुर्दशी श्राद्ध हमारे उन पूर्वजों को समर्पित है जिनकी मृत्यु दुखद परिस्थितियों में हुई। इस दिन श्रद्धापूर्वक किया गया श्राद्ध पितरों को तृप्त करता है और उन्हें मोक्ष प्रदान करता है। सही विधि और शुभ मुहूर्त में किया गया श्राद्ध परिवार के लिए शुभ फलदायी होता है। आइए, इस पावन अवसर पर अपने पूर्वजों को याद करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म करें।

ॐ शांति: शांति: शांति:

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