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Govinda Dwadashi 2025: गोविन्द द्वादशी महत्व पूजाविधि मंत्र

गोविन्द द्वादशी 2025 का महत्व, पूजाविधि और मंत्र जानें। इस पावन दिन भगवान विष्णु की आराधना करने का सही तरीका और आशीर्वाद पाने का उपाय समझें।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

गोविन्द द्वादशी 2025: परम पावन पर्व का महत्व और पूजन विधि

हिंदू धर्म में द्वादशी तिथि का विशेष महत्व होता है, और जब यह तिथि भगवान विष्णु के गोविन्द स्वरूप से जुड़ जाए तो इसकी पवित्रता और भी बढ़ जाती है। गोविन्द द्वादशी एक ऐसा ही पावन अवसर है जब भक्त भगवान विष्णु की आराधना करके मोक्ष और सांसारिक सुखों की प्राप्ति करते हैं। आइए जानते हैं इस पर्व की सम्पूर्ण जानकारी, पूजा विधि और मंत्रों के बारे में।

Contents
गोविन्द द्वादशी 2025: परम पावन पर्व का महत्व और पूजन विधिगोविन्द द्वादशी का महत्वगोविन्द द्वादशी 2025 की तिथि और मुहूर्तगोविन्द द्वादशी पूजन विधिसामग्री तैयार करेंपूजा विधिगोविन्द द्वादशी के विशेष मंत्रगोविन्द मंत्रविष्णु गायत्री मंत्रद्वादशाक्षर मंत्रगोविन्द द्वादशी व्रत कथागोविन्द द्वादशी के लाभनिष्कर्ष

गोविन्द द्वादशी का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को गोविन्द द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के गोविन्द स्वरूप की पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

  • गोविन्द द्वादशी का व्रत मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है।
  • इस दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है।
  • भगवान कृष्ण के गोविन्द रूप की पूजा से भक्ति और मुक्ति दोनों की प्राप्ति होती है।

गोविन्द द्वादशी 2025 की तिथि और मुहूर्त

सन 2025 में गोविन्द द्वादशी 10 दिसंबर, बुधवार को मनाई जाएगी।

  • द्वादशी तिथि प्रारम्भ: 09 दिसंबर 2025 को रात 08:14 बजे
  • द्वादशी तिथि समाप्त: 10 दिसंबर 2025 को रात 09:32 बजे
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: प्रातः 06:30 बजे से 09:00 बजे तक

गोविन्द द्वादशी पूजन विधि

गोविन्द द्वादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा की तैयारी करें। पूजा में निम्नलिखित विधि का पालन करें:

सामग्री तैयार करें

  • भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र
  • तुलसी दल, पुष्प, फल
  • घी का दीपक, धूप, अगरबत्ती
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
  • चन्दन, अक्षत, रोली

पूजा विधि

  1. सबसे पहले पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
  2. भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करके उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं।
  3. चन्दन, रोली, अक्षत, पुष्प आदि अर्पित करें।
  4. घी का दीपक जलाकर धूप-दीप से आरती करें।
  5. नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करें।

गोविन्द द्वादशी के विशेष मंत्र

गोविन्द मंत्र

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”
इस मंत्र का 108 बार जाप करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

विष्णु गायत्री मंत्र

“ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात्”
इस मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है और जीवन के सभी संकट दूर होते हैं।

द्वादशाक्षर मंत्र

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
यह मंत्र भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला सबसे सरल और प्रभावशाली मंत्र माना जाता है।

गोविन्द द्वादशी व्रत कथा

पुराणों में वर्णित एक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक ब्राह्मण दम्पति थे जिन्हें कोई संतान नहीं थी। एक दिन उन्होंने गोविन्द द्वादशी का व्रत किया और पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु की आराधना की। इस व्रत के प्रभाव से उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई जो बड़ा होकर विद्वान और धार्मिक बना। इस कथा से स्पष्ट होता है कि गोविन्द द्वादशी का व्रत सच्चे मन से करने पर भगवान विष्णु अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

गोविन्द द्वादशी के लाभ

  • इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वालों के लिए यह व्रत विशेष फलदायी है।
  • धन-धान्य की कमी दूर होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
  • मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

निष्कर्ष

गोविन्द द्वादशी का पर्व भगवान विष्णु के प्रति अपनी भक्ति प्रकट करने का सुनहरा अवसर है। इस दिन व्रत रखकर, पूजा-अर्चना करके और दान-पुण्य करके हम न केवल अपने जीवन को धन्य बना सकते हैं बल्कि मोक्ष के मार्ग पर भी अग्रसर हो सकते हैं। आइए, हम सब मिलकर इस पावन अवसर पर भगवान गोविन्द की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करें।

हरि ॐ तत्सत्

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