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Shattila Ekadashi 2025 षटतिला एकादशी महत्व और पौराणिक कथा

Published June 26, 2026
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5 Min Read

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Contents
षटतिला एकादशी 2025: परिचय एवं महत्वषटतिला एकादशी का धार्मिक महत्वविशेष फलदायी मुहूर्त (2025)षटतिला एकादशी व्रत विधिपूर्व दिन की तैयारीव्रत के दिनदान का महत्वषटतिला एकादशी की पौराणिक कथाविशेष सावधानियाँ एवं नियमविशेष मंत्रनिष्कर्ष

षटतिला एकादशी 2025: परिचय एवं महत्व

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। 2025 में यह पावन तिथि 25 जनवरी, शनिवार को मनाई जाएगी। इस लेख में हम इस व्रत के महत्व, पौराणिक कथा, विधि और फल के बारे में विस्तार से जानेंगे।

षटतिला एकादशी का धार्मिक महत्व

षटतिला एकादशी का नाम ‘तिल’ से जुड़ा है, जो इस व्रत का प्रमुख नियम है। इस दिन छह प्रकार से तिल का उपयोग करने का विधान है:

  • तिल से स्नान
  • तिल का उबटन
  • तिल का हवन
  • तिल का दान
  • तिल से बने भोजन का सेवन
  • तिल से तर्पण

शास्त्रों में कहा गया है कि इस व्रत को करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत संतान, धन और स्वास्थ्य देने वाला भी माना जाता है।

विशेष फलदायी मुहूर्त (2025)

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जनवरी 2025, रात 10:15 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 25 जनवरी 2025, रात 08:35 बजे
  • व्रत का दिन: 25 जनवरी, शनिवार

षटतिला एकादशी व्रत विधि

इस व्रत को करने की विधि निम्नलिखित है:

पूर्व दिन की तैयारी

  • दशमी के दिन सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • रात्रि में भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए सोएं

व्रत के दिन

  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर तिल मिले जल से स्नान करें
  • स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु की पूजा करें
  • तिल, फल, फूल और धूप-दीप से विष्णु जी का आवाहन करें
  • निम्न मंत्र का जाप करें: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
  • दिन भर उपवास रखें और शाम को आरती करने के बाद फलाहार करें

दान का महत्व

इस दिन निम्न वस्तुओं का दान विशेष फलदायी माना गया है:

  • तिल
  • गुड़
  • कंबल
  • घी
  • नमक

षटतिला एकादशी की पौराणिक कथा

पद्म पुराण में इस व्रत की एक रोचक कथा वर्णित है:

प्राचीन काल में एक ब्राह्मणी थी जो नियमित रूप से व्रत करती थी, लेकिन कभी दान नहीं करती थी। एक बार उसने षटतिला एकादशी का व्रत किया, परंतु फिर भी दान नहीं दिया। कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गई।

अगले जन्म में वह एक निर्धन ब्राह्मण के घर जन्मी। उसे बचपन से ही भुखमरी का सामना करना पड़ा। एक दिन एक ऋषि ने उसे बताया कि पूर्व जन्म में दान न करने के कारण उसे यह दुर्दशा भोगनी पड़ रही है। ऋषि ने उसे फिर से षटतिला एकादशी का व्रत करने और तिल का दान देने की सलाह दी।

ब्राह्मण कन्या ने ऋषि के कहे अनुसार व्रत किया और तिल का दान दिया। इसके प्रभाव से उसके सभी दुख दूर हो गए और उसे सुख-समृद्धि प्राप्त हुई। इस कथा से स्पष्ट है कि केवल व्रत ही नहीं, बल्कि दान का भी इस दिन विशेष महत्व है।

विशेष सावधानियाँ एवं नियम

  • इस दिन चावल का सेवन वर्जित है
  • क्रोध, झूठ और किसी का अपमान न करें
  • व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करें
  • रात्रि में भगवान विष्णु के नाम का जाप करते हुए सोएं

विशेष मंत्र

इस दिन निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए:

“षटतिला एकादशीमिमां यः कुर्याद्विधानतः।
सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोके महीयते॥”

निष्कर्ष

षटतिला एकादशी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन व्रत है जो भक्तों को भगवान विष्णु की विशेष कृपा दिलाता है। तिल के छह उपयोगों से जुड़े इस व्रत का पालन करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है और उसे धन-धान्य की प्राप्ति होती है। 2025 में 25 जनवरी को मनाई जाने वाली इस एकादशी पर हम सभी को श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।

याद रखें, केवल व्रत ही नहीं बल्कि दान और सदाचार भी इस दिन का अभिन्न अंग हैं। षटतिला एकादशी की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं!

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