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अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2025: तिथि, महत्व और पूजा विधि
हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है, और जब यह अखुरथ नामक विशेष संयोग में पड़ती है, तो इसकी पवित्रता और भी बढ़ जाती है। 2025 में अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का व्रत भक्तों के लिए अद्भुत आशीर्वाद लेकर आ रहा है। आइए जानते हैं इस पावन तिथि की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और इसके आध्यात्मिक लाभों के बारे में विस्तार से।
अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
2025 में अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 15 जून, रविवार को मनाई जाएगी। यह तिथि अखुरथ योग के साथ युक्त होने के कारण अत्यंत फलदायी मानी गई है।
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 जून 2025, रात 10:17 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 जून 2025, रात 08:32 बजे
- व्रत का शुभ मुहूर्त: 15 जून, सुबह 05:43 से शाम 08:32 तक
- चंद्रोदय काल: शाम 07:15 बजे (लगभग)
अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का महत्व
संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें विघ्नहर्ता और मंगलमूर्ति कहा जाता है। अखुरथ योग एक दुर्लभ संयोग है जो शुभ फलों को बढ़ाता है:
- इस दिन व्रत रखने से सभी संकटों का नाश होता है
- धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति
- कुंडली के चंद्र दोष और मंगल दोष का शमन
- विवाह में आ रही बाधाओं का निवारण
अखुरथ संकष्टी चतुर्थी व्रत की पूजा विधि
व्रत की तैयारी
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
- साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें (अधिमानतः पीले या लाल रंग के)
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
- लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति/चित्र स्थापित करें
पूजन विधि
- सर्वप्रथम श्री गणेशाय नमः मंत्र से आवाहन करें
- ऋद्धि-सिद्धि सहित गणपति की पंचोपचार पूजा करें:
- गंध (चंदन)
- पुष्प (लाल फूल विशेषकर हिबिस्कस)
- धूप (गुग्गुल की धूनी)
- दीप (घी का दीया)
- नैवेद्य (मोदक/लड्डू का भोग)
- 21 दूर्वा घास अर्पित करें (गणेश जी का प्रिय प्रसाद)
- संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें
मंत्र और आरती
इस दिन निम्न मंत्रों का जाप विशेष फलदायी होता है:
- मूल मंत्र: “ॐ गं गणपतये नमः” (108 बार)
- संकष्टी विशेष मंत्र: “वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”
पूजन के बाद आरती अवश्य करें। संकष्टी चतुर्थी की विशेष आरती में गणेश जी के सभी 12 नामों का उच्चारण किया जाता है।
व्रत कथा और पारण विधि
संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने गणेश जी को संकटनाशक का वरदान दिया था। एक कथा के अनुसार, चंद्रमा ने गणेश जी का उपहास किया था, जिसके कारण उन्हें श्राप मिला। संकष्टी व्रत करने से यह श्राप मिटता है और चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है।
पारण (व्रत तोड़ने) का समय
- चतुर्थी तिथि के दौरान चंद्रोदय के बाद ही पारण करें
- सूर्यास्त के बाद पारण न करें (अशुभ माना जाता है)
- पारण में सात्विक भोजन ग्रहण करें (नमक रहित या फलाहार)
अखुरथ योग का विशेष प्रभाव
जब संकष्टी चतुर्थी रविवार को पड़ती है और हस्त नक्षत्र का संयोग होता है, तो इसे अखुरथ संकष्टी कहते हैं। इस योग में:
- सूर्य (रविवार) और चंद्रमा (चतुर्थी) का शुभ संयोग बनता है
- हस्त नक्षत्र कलात्मक सिद्धियाँ प्रदान करता है
- व्रत का पुण्यफल 100 गुना बढ़ जाता है
निष्कर्ष
अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2025 का व्रत समस्त कष्टों को हरने वाला और मनोवांछित फल देने वाला है। इस दिन विधि-विधान से पूजन करने पर भक्तों को गणेश जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। याद रखें कि श्रद्धा और विश्वास से किया गया छोटा सा प्रयास भी भगवान को प्रसन्न कर देता है। आप सभी को इस पावन व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं!
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