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मलमास 16 मई से 13 जून तक जानिए इसका महत्व

Published June 26, 2026
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मलमास: 16 मई से 13 जून तक की अवधि मलमास की रहेगी, जानिए इसका महत्वमलमास क्या है?मलमास की पौराणिक कथामलमास 2024 का समय और महत्वमलमास में क्या करें?मलमास व्रत और पूजा विधिव्रत विधिमहत्वपूर्ण मंत्रमलमास में क्या न करें?मलमास का आध्यात्मिक महत्वनिष्कर्ष

मलमास: 16 मई से 13 जून तक की अवधि मलमास की रहेगी, जानिए इसका महत्व

हिंदू पंचांग में मलमास या अधिकमास का विशेष धार्मिक महत्व है। यह वह समय होता है जब सूर्य और चंद्र की गतियों के अंतर के कारण एक अतिरिक्त माह की उत्पत्ति होती है। इस वर्ष, 16 मई से 13 जून 2024 तक की अवधि मलमास के रूप में मनाई जाएगी। इस लेख में हम आपको मलमास के महत्व, इसकी पौराणिक कथा, और इस दौरान किए जाने वाले धार्मिक कर्मकांडों के बारे में विस्तार से बताएंगे।

मलमास क्या है?

मलमास या पुरुषोत्तम मास हिंदू कैलेंडर में एक अतिरिक्त महीना होता है, जो हर 32 महीने, 16 दिन के बाद आता है। यह अंतर सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच समन्वय बनाने के लिए होता है। इस दौरान शुभ कार्यों को टाल दिया जाता है, लेकिन धार्मिक अनुष्ठानों और भक्ति का विशेष महत्व होता है।

मलमास की पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार, मलमास को लेकर एक रोचक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि जब देवताओं ने 12 महीनों को अपना नाम दिया, तो मलमास को कोई नाम नहीं मिला। इससे दुखी होकर मलमास भगवान विष्णु के पास गया। तब भगवान विष्णु ने उसे “पुरुषोत्तम मास” का नाम दिया और कहा कि इस महीने में की गई भक्ति सबसे फलदायी होगी।

मलमास 2024 का समय और महत्व

इस वर्ष मलमास 16 मई 2024 से 13 जून 2024 तक रहेगा। इस दौरान निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • इस अवधि में विवाह, गृहप्रवेश, नामकरण जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते।
  • भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है।
  • मलमास में किए गए धार्मिक कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है।

मलमास में क्या करें?

इस पवित्र महीने में निम्नलिखित धार्मिक कार्य करने चाहिए:

  • विष्णु सहस्रनाम और भगवद्गीता का पाठ करें।
  • प्रतिदिन तुलसी के पौधे के नीचे दीपक जलाएं।
  • गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन, वस्त्र और दान दें।
  • एक माह तक व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करें।

मलमास व्रत और पूजा विधि

मलमास में व्रत रखने का विशेष महत्व है। इसकी विधि इस प्रकार है:

व्रत विधि

  • प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • फूल, फल, तुलसी दल और मिष्ठान्न से पूजा करें।
  • विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा या गीता के श्लोकों का पाठ करें।
  • शाम को तुलसी के पौधे के समीप दीपदान करें।

महत्वपूर्ण मंत्र

मलमास में निम्न मंत्रों का जाप करना फलदायी माना जाता है:

  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
  • ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात्

मलमास में क्या न करें?

इस अवधि में कुछ कार्यों से बचना चाहिए:

  • शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश आदि न करें।
  • मांस-मदिरा और तामसिक भोजन से परहेज करें।
  • किसी भी प्रकार के वाद-विवाद या कलह से बचें।
  • नए व्यापार या निवेश की शुरुआत न करें।

मलमास का आध्यात्मिक महत्व

मलमास को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का सर्वोत्तम समय माना जाता है। इस दौरान:

  • जप, तप, ध्यान और सत्संग का विशेष फल मिलता है।
  • पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • भगवान विष्णु की कृपा सहज ही प्राप्त होती है।

निष्कर्ष

मलमास हिंदू धर्म में एक पवित्र और विशेष अवधि है। यह समय आध्यात्मिक साधना और भक्ति के लिए समर्पित होता है। इस वर्ष 16 मई से 13 जून 2024 तक के मलमास में भगवान विष्णु की आराधना, दान-पुण्य और सत्कर्मों द्वारा जीवन में सुख-शांति प्राप्त की जा सकती है। इस अवसर का लाभ उठाकर हम अपने जीवन को पवित्र और सार्थक बना सकते हैं।

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