अपरा एकादशी: आज रात कीर्तन के अलावा करें ये खास काम, धन की होगी बारिश
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और अपरा एकादशी इनमें से एक अत्यंत पुण्यदायी व्रत मानी जाती है। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी को “अचला एकादशी” भी कहते हैं। आज रात केवल कीर्तन ही नहीं, बल्कि कुछ विशेष कर्म करने से भगवान विष्णु की कृपा से धन, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
अपरा एकादशी का महत्व
पद्म पुराण के अनुसार, यह व्रत सभी पापों को नष्ट करके मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से:
- पितृदोष से मुक्ति मिलती है
- आर्थिक संकट दूर होते हैं
- कुंडली के अशुभ योग समाप्त होते हैं
- आयु और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है
अपरा एकादशी की विशेष पूजा विधि
सुबह का संकल्प
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर निम्न मंत्र से व्रत का संकल्प लें:
“मम पापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्टप्राप्तये अपरा एकादशी व्रतमहं करिष्ये”
पूजा की तैयारी
- स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
- भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें
- तुलसी दल, फूल, धूप-दीप से सजावट करें
मुख्य पूजन विधि
इस मंत्र के साथ भगवान विष्णु का आवाहन करें:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
- भगवान को पीले फूल, तुलसी और फल अर्पित करें
- घी का दीपक जलाएं और धूप दिखाएं
- नीचे दिए गए मंत्र का 108 बार जप करें
अपरा एकादशी का विशेष मंत्र
इस मंत्र का जाप करने से अद्भुत लाभ प्राप्त होता है:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन-धान्य प्रदायिने, दरिद्रता नाशाय नमः”
मंत्र जप की विधि
- तुलसी माला से मंत्र जप करें
- ध्यान भगवान विष्णु के श्रीविग्रह पर केंद्रित रखें
- जप के बाद आरती करें और प्रसाद वितरित करें
रात्रि में करने योग्य विशेष कार्य
धन प्राप्ति के उपाय
- तुलसी के पास दीपक: तुलसी के पौधे के नीचे घी का दीपक जलाएं
- क्षीर सागर की कथा: भगवान विष्णु के क्षीर सागर शयन की कथा सुनें या पढ़ें
- दान का महत्व: गरीबों को भोजन, वस्त्र या दक्षिणा दान करें
पितृ तर्पण
अपरा एकादशी पर पितरों का तर्पण करने से वे प्रसन्न होते हैं:
- गंगाजल, काले तिल और जल से तर्पण करें
- निम्न मंत्र बोलें: “ॐ पितृदेवताभ्यो नमः स्वधा”
- ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें
पारण का समय और विधि
एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि में सुबह 5:30 से 8:30 बजे के बीच पारण करें:
- सर्वप्रथम भगवान विष्णु को जल अर्पित करें
- तुलसी दल युक्त जल पिएं
- सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत समाप्त करें
अपरा एकादशी व्रत कथा
प्राचीन काल में महीध्वज नामक एक धर्मात्मा राजा थे। उनके भाई वज्रध्वज ने ईर्ष्यावश उनकी हत्या कर दी और शमी वृक्ष के नीचे दफना दिया। राजा का आत्मा प्रेत योनि में भटकने लगा। एक दिन एक ऋषि उस रास्ते से गुजरे और प्रेत ने अपनी व्यथा सुनाई। ऋषि ने उसे अपरा एकादशी का व्रत करने को कहा। व्रत के प्रभाव से राजा को मोक्ष मिला और भाई के पाप भी धुल गए।
निष्कर्ष
अपरा एकादशी का यह पावन व्रत मोक्ष, धन और पाप मुक्ति का अद्वितीय अवसर प्रदान करता है। आज रात कीर्तन के साथ-साथ उपरोक्त विशेष कार्य करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होगी। याद रखें, श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया व्रत ही फलदायी होता है। हरि ॐ!
