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माता का एक शक्तिपीठ जिसकी पूजा मुसलमान भी करते हैं
भारत की पावन धरा पर अनेकों शक्तिपीठ स्थापित हैं, जहाँ माता के भक्तों का सैलाब उमड़ता रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा भी शक्तिपीठ है जहाँ हिंदू और मुसलमान दोनों मिलकर माता की पूजा-अर्चना करते हैं? यह अनूठा मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल भी पेश करता है। आइए जानते हैं इस पावन स्थान की कहानी…
शक्तिपीठ का पौराणिक महत्व
हिंदू धर्म के अनुसार, जहाँ-जहाँ माता सती के अंग गिरे, वहाँ-वहाँ शक्तिपीठों की स्थापना हुई। हिंगलाज माता मंदिर (पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित) को 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। पुराणों में वर्णित है कि यहाँ माता का ब्रह्मरंध्र (सिर का ऊपरी भाग) गिरा था।
- मार्कंडेय पुराण में इस स्थान को “हिंगुला” के नाम से संबोधित किया गया है
- कुछ ग्रंथों में इसे “कट्टासराज शक्तिपीठ” भी कहा जाता है
- स्थानीय मुस्लिम समुदाय इसे “नानी का हज” या “बीबी नानी का मंदिर” कहते हैं
धार्मिक एकता की अनूठी मिसाल
यह मंदिर इसलिए विशेष है क्योंकि यहाँ हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग माता के दर्शन के लिए आते हैं। मुस्लिम भक्त इसे बीबी नानी के रूप में पूजते हैं, जबकि हिंदू भक्त हिंगलाज माता के रूप में।
विशेष तथ्य:
- मंदिर परिसर में एक प्राचीन गुफा है जिसे “चंद्रकूप” कहा जाता है
- यहाँ माता की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि एक पत्थर के रूप में पूजा होती है
- मुस्लिम संत बाबा चन्नन शाह ने इस स्थान की खोज की थी
पूजा-विधि और परंपराएँ
इस पावन स्थल पर पूजा की विशेष परंपराएँ हैं जो सदियों से चली आ रही हैं:
- हिंगुला यात्रा: हिंदू भक्तों द्वारा की जाने वाली पैदल यात्रा
- चादर चढ़ाना: मुस्लिम भक्त माता को चादर चढ़ाते हैं
- नारियल भेंट: दोनों समुदायों द्वारा नारियल चढ़ाने की परंपरा
ऐतिहासिक संदर्भ
इतिहासकारों के अनुसार, इस स्थान का उल्लेख 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग के यात्रा वृत्तांत में भी मिलता है। मुगलकाल में अकबर ने भी इस मंदिर के लिए दान दिया था।
महत्वपूर्ण तिथियाँ:
- चैत्र नवरात्रि: मुख्य उत्सव
- शरद नवरात्रि: द्वितीय महत्वपूर्ण पर्व
- मुस्लिम कैलेंडर के अनुसार विशेष दिन
कैसे पहुँचें?
यह मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में कराची से लगभग 250 किमी दूर हिंगोल नदी के किनारे स्थित है। भारतीय यात्रियों के लिए विशेष परमिट की आवश्यकता होती है।
आध्यात्मिक संदेश
हिंगलाज माता मंदिर हमें सिखाता है कि ईश्वर एक है, भले ही उसे पुकारने के तरीके अलग-अलग हों। यह स्थान सांप्रदायिक सद्भाव, सहिष्णुता और आपसी सम्मान का जीवंत उदाहरण है।
निष्कर्ष
हिंगलाज माता का यह पावन शक्तिपीठ न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि मानवता की एकता का भी प्रतीक है। जहाँ माता के चरणों में हिंदू-मुस्लिम भेदभाव समाप्त हो जाता है, वहाँ सच्ची भक्ति की ज्योति जगमगाती है। आइए, हम भी इस पवित्र स्थल से प्रेरणा लें और माता के आशीर्वाद से सद्भाव व शांति का मार्ग अपनाएँ।
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