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हिंदू धर्म में मरते वक्त मुंह में तुलसी-गंगाजल क्यों रखते हैं

हिंदू धर्म में मरते वक्त मुंह में तुलसी और गंगाजल रखने की परंपरा का महत्व जानें। यह आध्यात्मिक शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति में कैसे सहायक है, विस्तार से समझें।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

हिंदू धर्म में किसी के मरते वक्त मुंह में तुलसी और गंगाजल क्यों रखते हैं?

हिंदू धर्म में मृत्यु के समय किए जाने वाले संस्कारों का विशेष महत्व है। इनमें से एक प्रथा है मरते हुए व्यक्ति के मुंह में तुलसी दल और गंगाजल रखना। यह केवल एक रिवाज नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक अर्थों से जुड़ी परंपरा है। आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों किया जाता है और इसके पीछे छिपे रहस्य क्या हैं।

Contents
हिंदू धर्म में किसी के मरते वक्त मुंह में तुलसी और गंगाजल क्यों रखते हैं?तुलसी और गंगाजल का धार्मिक महत्वशास्त्रों में वर्णित महत्ववैज्ञानिक दृष्टिकोणमृत्यु के समय तुलसी-गंगाजल देने की विधिसही तरीकाकिन परिस्थितियों में न देंआध्यात्मिक लाभप्राचीन कथाएं और संदर्भआधुनिक समय में प्रासंगिकतानिष्कर्ष

तुलसी और गंगाजल का धार्मिक महत्व

हिंदू शास्त्रों में तुलसी को “विष्णुप्रिया” और गंगाजल को “मोक्षदायिनी” माना गया है। मृत्यु के समय इनका उपयोग आत्मा की शुद्धि और दिव्य यात्रा में सहायक माना जाता है:

  • तुलसी: विष्णु भगवान को अत्यंत प्रिय, पापनाशक और यमदूतों से रक्षा करने वाली
  • गंगाजल: समस्त पापों को धोने वाला, दिव्य ऊर्जा से युक्त और आत्मा को शांति देने वाला

शास्त्रों में वर्णित महत्व

गरुड़ पुराण और पद्म पुराण में इस प्रथा का स्पष्ट उल्लेख मिलता है:

  • गरुड़ पुराण (अध्याय 12) में कहा गया है: “तुलसीदलं य: कवचं हरेर्नाम्ना समन्वितम्, तं दृष्ट्वा यमकिंकरा यान्ति दूरतो भयम्।”
  • अर्थ: तुलसी दल और हरि नाम रूपी कवच को देखकर यमदूत दूर भाग जाते हैं।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

इस प्रथा के पीछे कुछ वैज्ञानिक तर्क भी छिपे हैं:

  • तुलसी: एंटी-बैक्टीरियल गुणों से युक्त, मुख के संक्रमण को रोकती है
  • गंगाजल: प्राकृतिक रूप से शुद्ध, शरीर के अंतिम तत्वों को संतुलित करता है
  • दोनों का संयोजन मृत्यु के समय शरीर और मन को शांत रखने में सहायक

मृत्यु के समय तुलसी-गंगाजल देने की विधि

सही तरीका

  • सर्वप्रथम मरने वाले व्यक्ति को पूर्व या उत्तर दिशा में लिटाएं
  • तुलसी के पत्तों को गंगाजल में डुबोकर मुख में रखें
  • साथ में “ॐ नमो नारायणाय” या “हरि ॐ” मंत्र का उच्चारण करें
  • यदि संभव हो तो मरने वाले के हाथ में तुलसी का पौधा भी दें

किन परिस्थितियों में न दें

  • यदि व्यक्ति को तुलसी से एलर्जी हो
  • जब मृत्यु अचानक दुर्घटना में हो गई हो
  • बिना पवित्र भावना के केवल रिवाज समझकर न दें

आध्यात्मिक लाभ

इस प्रथा से मिलने वाले आध्यात्मिक लाभ असंख्य हैं:

  • यमदूतों से मुक्ति: मान्यता है कि तुलसी की सुगंध यमदूतों को दूर रखती है
  • मोक्ष की प्राप्ति: गंगाजल आत्मा को भवसागर से पार कराता है
  • पुनर्जन्म चक्र से मुक्ति: विष्णु भगवान की कृपा से मुक्ति मिलती है

प्राचीन कथाएं और संदर्भ

पौराणिक कथाओं में ऐसे अनेक प्रसंग मिलते हैं जहां तुलसी और गंगा के महत्व को दर्शाया गया है:

  • अजामिल की कथा: मरते समय “नारायण” नाम लेने से मिली मुक्ति
  • गंगावतरण: भगीरथ द्वारा पूर्वजों की मुक्ति हेतु गंगा को धरती पर लाना

आधुनिक समय में प्रासंगिकता

वर्तमान युग में भी यह प्रथा उतनी ही महत्वपूर्ण है:

  • मृत्युशैया पर पड़े रोगी को मानसिक शांति प्रदान करती है
  • पारिवारिक सदस्यों को आध्यात्मिक बल मिलता है
  • वैज्ञानिक शोधों ने भी तुलसी के औषधीय गुणों को स्वीकारा है

निष्कर्ष

हिंदू धर्म में मृत्यु के समय तुलसी और गंगाजल देने की प्रथा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि गहन आध्यात्मिक विज्ञान पर आधारित है। यह मरने वाले की आत्मा को शुद्ध करके उसकी दिव्य यात्रा को सुगम बनाती है। शास्त्रों और विज्ञान दोनों ही इसके महत्व को स्वीकारते हैं। अतः हमें इस पवित्र परंपरा को समझकर उचित भावना के साथ निभाना चाहिए।

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