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Dhanteras 2025: धन्वंतरि देव कौन हैं धनतेरस पर क्यों की जाती है पूजा

Published June 26, 2026
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4 Min Read

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Contents
Dhanteras 2025: कौन हैं धन्वंतरि देव, जानिए धनतेरस पर क्यों की जाती है इनकी पूजाप्रस्तावना: धनतेरस और धन्वंतरि देव का पावन संबंधधन्वंतरि देव: दिव्य चिकित्सक और अमृत के धारकपौराणिक उत्पत्ति और महत्वधन्वंतरि और आयुर्वेद का संबंधधनतेरस पर धन्वंतरि पूजा का महत्वक्यों मनाते हैं धनतेरस?पौराणिक कथा: राजा हेमा और यमराज का आशीर्वादधनतेरस पूजा विधि: सही तरीके से करें आराधनापूजा सामग्रीपूजा विधिधनतेरस 2025 की विशेष तिथि और मुहूर्तधनतेरस परंपराएँ: स्वास्थ्य और समृद्धि के संकल्पधातु खरीदने की परंपरायम दीप दाननिष्कर्ष: स्वास्थ्य ही सच्चा धन

Dhanteras 2025: कौन हैं धन्वंतरि देव, जानिए धनतेरस पर क्यों की जाती है इनकी पूजा

प्रस्तावना: धनतेरस और धन्वंतरि देव का पावन संबंध

दिवाली के पावन पर्व से दो दिन पहले मनाए जाने वाले धनतेरस का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह दिन भगवान धन्वंतरि की आराधना का दिन माना जाता है, जिन्हें आयुर्वेद और स्वास्थ्य का देवता कहा जाता है। इस लेख में हम जानेंगे कि धन्वंतरि देव कौन हैं और क्यों धनतेरस पर इनकी पूजा की जाती है।

धन्वंतरि देव: दिव्य चिकित्सक और अमृत के धारक

पौराणिक उत्पत्ति और महत्व

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, भगवान धन्वंतरि का जन्म समुद्र मंथन के दौरान हुआ था। वे अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए, जिससे उन्हें ‘आरोग्य के दाता’ के रूप में पूजा जाने लगा।

  • अवतार: विष्णु के अंशावतार माने जाते हैं
  • प्रतीक: शंख, चक्र, जड़ी-बूटियाँ और अमृत कलश
  • वाहन: कच्छप (कछुआ)

धन्वंतरि और आयुर्वेद का संबंध

मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि ने मानवता को आयुर्वेद का ज्ञान दिया। वे अष्टांग हृदयम और चरक संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों के आदि प्रवर्तक माने जाते हैं।

धनतेरस पर धन्वंतरि पूजा का महत्व

क्यों मनाते हैं धनतेरस?

धनतेरस (धन + तेरस) का अर्थ है धन की तेरस। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से तीन प्रकार के धन की प्राप्ति होती है:

  • भौतिक धन: सुख-समृद्धि
  • आरोग्य धन: निरोगी काया
  • आध्यात्मिक धन: ज्ञान और मोक्ष

पौराणिक कथा: राजा हेमा और यमराज का आशीर्वाद

पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, राजा हेमा को उनके पुत्र की मृत्यु का भय सताता था। ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की कि विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से उनके पुत्र की मृत्यु होगी। पुत्रवधू ने धनतेरस की रात पूरे महल में दीप जलाकर और धन्वंतरि की पूजा कर यमराज को प्रसन्न किया। इससे पुत्र का जीवन बच गया।

धनतेरस पूजा विधि: सही तरीके से करें आराधना

पूजा सामग्री

  • धन्वंतरि यंत्र या मूर्ति
  • गंगाजल, फूल, अक्षत
  • दीपक, घी, कपूर
  • नए बर्तन (खरीदने की परंपरा)

पूजा विधि

  1. स्नानादि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करें
  2. पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन बिछाएं
  3. धन्वंतरि यंत्र/मूर्ति को चंदन, फूल और अक्षत अर्पित करें
  4. इस मंत्र का उच्चारण करें: “ॐ धन्वंतरये नमः”
  5. दीपक जलाकर आरती करें

धनतेरस 2025 की विशेष तिथि और मुहूर्त

वर्ष 2025 में धनतेरस 21 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

  • तिथि: त्रयोदशी (20 अक्टूबर शाम 6:43 से 21 अक्टूबर शाम 4:27 तक)
  • पूजा मुहूर्त: शाम 5:47 से 7:43 तक
  • यम दीप दान: सूर्यास्त के बाद

धनतेरस परंपराएँ: स्वास्थ्य और समृद्धि के संकल्प

धातु खरीदने की परंपरा

इस दिन नए बर्तन या सोना-चाँदी खरीदने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है।

यम दीप दान

घर के मुख्य द्वार पर यम दीप जलाकर रखने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।

निष्कर्ष: स्वास्थ्य ही सच्चा धन

धनतेरस हमें यह संदेश देती है कि स्वास्थ्य ही सच्चा धन है। भगवान धन्वंतरि की पूजा कर हम न केवल भौतिक समृद्धि बल्कि दीर्घायु और निरोगी काया का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। आइए इस धनतेरस पर प्रण लें कि हम अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें और आयुर्वेद के ज्ञान को अपनाएं।

शुभ धनतेरस! 🙏

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