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Somvati Amavasya 2025 इस दिन कथा पाठ का महत्व जानिए सोमवती अमावस्या कथा

सोमवती अमावस्या 2025 में कथा पाठ का विशेष महत्व जानें। इस पवित्र दिन की पौराणिक कथा, पूजा विधि और फल के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करें।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

सोमवती अमावस्या 2025: कथा पाठ का महत्व और पौराणिक व्रत कथा

हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। यह वह पावन तिथि है जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है। 2025 में यह तिथि 26 मई को मनाई जाएगी। इस दिन व्रत रखकर पीपल के वृक्ष की पूजा और सोमवती अमावस्या की कथा सुनने से समस्त पापों का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। आइए जानें इस व्रत की पौराणिक कथा और इसके महत्व के बारे में विस्तार से।

Contents
सोमवती अमावस्या 2025: कथा पाठ का महत्व और पौराणिक व्रत कथासोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्वसोमवती अमावस्या व्रत विधिसोमवती अमावस्या की पौराणिक कथागरीब ब्राह्मणी और सोमवती अमावस्याराजा हरिश्चंद्र और सत्य की परीक्षासोमवती अमावस्या 2025 का शुभ मुहूर्तनिष्कर्ष

सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व

शास्त्रों में अमावस्या को पितृ तर्पण के लिए उत्तम माना गया है, लेकिन जब यह सोमवार के दिन आती है तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन किए गए धार्मिक अनुष्ठानों से पितृदोष से मुक्ति मिलती है और आयु, धन तथा संतान सुख की प्राप्ति होती है।

  • पीपल वृक्ष की पूजा: इस दिन पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करने और जल चढ़ाने से विशेष फल मिलता है।
  • दान-पुण्य: गरीबों को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा देना शुभ माना जाता है।
  • पितृ तर्पण: पूर्वजों को जल अर्पित करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है।

सोमवती अमावस्या व्रत विधि

इस व्रत को करने की विधि निम्न प्रकार है:

  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  • साफ वस्त्र धारण करके संकल्प लें: “मैं सोमवती अमावस्या का व्रत रखकर पीपल वृक्ष की पूजा करूंगा/करूंगी।”
  • पीपल के वृक्ष के नीचे गंगाजल, दूध, फूल और अक्षत चढ़ाएं।
  • सूत लेकर पीपल की 108 परिक्रमा करें और मंत्र पढ़ें: “वृक्ष राजाय नमः, सोमाय नमः, पितृभ्यः नमः।”
  • संध्या के समय कथा सुनें और ब्राह्मण को भोजन कराकर दक्षिणा दें।

सोमवती अमावस्या की पौराणिक कथा

गरीब ब्राह्मणी और सोमवती अमावस्या

पुराणों में एक कथा प्रचलित है कि एक गांव में एक निर्धन ब्राह्मणी रहती थी। वह अपने पति के साथ बड़ी कठिनाई से जीवन यापन करती थी। एक दिन उसके घर एक साधु आए। ब्राह्मणी ने उनका आदर-सत्कार किया। प्रसन्न होकर साधु ने पूछा, “तुम्हारी क्या इच्छा है?”

ब्राह्मणी बोली, “मेरे कोई संतान नहीं है और धन का भी अभाव है।” साधु ने कहा, “अगली सोमवती अमावस्या को व्रत रखकर पीपल की पूजा करो और इस कथा को सुनो। तुम्हारी मनोकामना अवश्य पूरी होगी।”

ब्राह्मणी ने ऐसा ही किया। कुछ समय बाद उसे एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई और घर में धन-धान्य भर गया। इस प्रकार इस व्रत का महत्व सिद्ध हुआ।

राजा हरिश्चंद्र और सत्य की परीक्षा

एक अन्य कथा के अनुसार, राजा हरिश्चंद्र ने सोमवती अमावस्या का व्रत रखकर अपने खोए हुए राज्य और परिवार को पुनः प्राप्त किया था। उनकी सत्यनिष्ठा और इस व्रत के प्रभाव से ही वह सभी कष्टों से मुक्त हुए।

सोमवती अमावस्या 2025 का शुभ मुहूर्त

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 25 मई 2025 को रात 08:45 बजे
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 26 मई 2025 को रात 11:22 बजे
  • व्रत का दिन: 26 मई 2025 (सोमवार)
  • पूजा का शुभ समय: प्रातः 05:30 से 11:00 बजे तक

निष्कर्ष

सोमवती अमावस्या का व्रत हमारे जीवन से अंधकार को दूर करके आध्यात्मिक ज्योति प्रदान करता है। यह न केवल पितृदोष से मुक्ति दिलाता है बल्कि जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करता है। 2025 में इस पावन तिथि पर व्रत रखकर कथा श्रवण अवश्य करें। पीपल वृक्ष की पूजा करने से हम प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हैं और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देते हैं।

इस व्रत का सबसे बड़ा संदेश यही है कि सत्य, धर्म और संयम के मार्ग पर चलकर ही मनुष्य सभी कष्टों से मुक्त हो सकता है।

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