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Utpanna Ekadashi 2025: 30 नवंबर को है उत्पन्ना एकादशी व्रत नियम

30 नवंबर 2025 को उत्पन्ना एकादशी का व्रत है। जानें इस पावन व्रत के नियम, महत्व और पूजा विधि सहित सभी जरूरी बातें, ताकि आप पूरी श्रद्धा से कर सकें व्रत और पाएं भगवान विष्णु की कृपा।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

उत्पन्ना एकादशी 2025: 30 नवंबर को है यह पावन तिथि

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और उत्पन्ना एकादशी इनमें से सबसे पवित्र मानी जाती है। साल 2025 में यह पर्व 30 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहते हैं। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा पाने और पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। इस लेख में हम आपको इस व्रत के नियम, महत्व और पूजा विधि के बारे में विस्तार से बताएंगे।

Contents
उत्पन्ना एकादशी 2025: 30 नवंबर को है यह पावन तिथिउत्पन्ना एकादशी का पौराणिक महत्वउत्पन्ना एकादशी व्रत के लाभउत्पन्ना एकादशी व्रत विधिव्रत से पहले की तैयारीव्रत का दिन (30 नवंबर)व्रत में क्या करें और क्या न करेंउत्पन्ना एकादशी की विशेष बातेंपारण का समय (1 दिसंबर)महत्वपूर्ण सावधानियांनिष्कर्ष

उत्पन्ना एकादशी का पौराणिक महत्व

पद्म पुराण के अनुसार, एकादशी स्वयं भगवान विष्णु की शक्ति से उत्पन्न हुई थीं। कथा के अनुसार, मुर नामक राक्षस से युद्ध करते समय भगवान विष्णु थक गए और बद्रिकाश्रम में विश्राम करने लगे। तभी उनके शरीर से एक दिव्य कन्या प्रकट हुई, जिसने मुर राक्षस का वध किया। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर इस कन्या को “एकादशी” नाम दिया और वरदान दिया कि जो भक्त इस दिन व्रत रखेगा, उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी।

उत्पन्ना एकादशी व्रत के लाभ

  • पापों का नाश: इस व्रत से पूर्वजन्म और वर्तमान जन्म के पापों से मुक्ति मिलती है।
  • मोक्ष की प्राप्ति: नियमपूर्वक व्रत रखने पर भक्त को अंततः मोक्ष प्राप्त होता है।
  • सुख-समृद्धि: घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है और कष्ट दूर होते हैं।
  • आरोग्य लाभ: स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

उत्पन्ना एकादशी व्रत विधि

व्रत से पहले की तैयारी

  • दशमी (29 नवंबर) की रात से ही ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • सात्विक भोजन करें और मन को शांत रखें।
  • रात्रि में भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए शीघ्र सोएं।

व्रत का दिन (30 नवंबर)

  • प्रातःकाल: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • संकल्प: तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा विधि: भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को पंचामृत से स्नान कराएं, फिर चंदन, फूल, धूप-दीप से पूजा करें।
  • मंत्र जाप: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।

व्रत में क्या करें और क्या न करें

करने योग्य:

  • पूरे दिन उपवास रखें या फलाहार लें।
  • भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
  • गरीबों को भोजन या दान दें।

निषेध:

  • क्रोध, झूठ या किसी का अपमान न करें।
  • तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांसाहार) से परहेज करें।
  • दिन में सोने से बचें।

उत्पन्ना एकादशी की विशेष बातें

पारण का समय (1 दिसंबर)

व्रत का समापन द्वादशी (1 दिसंबर) को सुबह 6:23 बजे से 8:42 बजे तक किया जा सकता है। पारण के समय पहले तुलसी दल युक्त जल ग्रहण करें, फिर सात्विक भोजन करें।

महत्वपूर्ण सावधानियां

  • गर्भवती महिलाएं या बीमार व्यक्ति डॉक्टर की सलाह के बाद ही व्रत रखें।
  • व्रत में जल का अधिक सेवन करें ताकि डिहाइड्रेशन न हो।
  • अगर पूरा व्रत संभव न हो तो फलाहार या एक समय का भोजन कर सकते हैं।

निष्कर्ष

उत्पन्ना एकादशी का व्रत आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति का सर्वोत्तम अवसर है। 30 नवंबर 2025 को इस पावन दिन भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए पूरे विधि-विधान से व्रत रखें। याद रखें, व्रत का असली उद्देश्य केवल भूखा रहना नहीं, बल्कि मन को शुद्ध करना और ईश्वर के प्रति समर्पण भाव जगाना है। हरि ॐ तत्सत्!

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