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Masik Kalashtami 2025 कालाष्टमी आज जानिए उपासना महत्व और पूजाविधि

Published June 26, 2026
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4 Min Read

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Contents
मासिक कालाष्टमी 2025: कालाष्टमी आज, जानिए भगवान कालभैरव की उपासना का महत्व और पूजाविधिकालाष्टमी का धार्मिक महत्वकालाष्टमी के प्रमुख लाभकालभैरव पूजन विधि (विस्तृत मार्गदर्शन)पूजा की तैयारीमुख्य पूजन सामग्रीविस्तृत पूजा विधिकालाष्टमी व्रत कथा एवं मंत्र साधनाप्रमुख कथा संक्षेपमंत्र साधना विधि2025 में मासिक कालाष्टमी के विशेष संयोगनिष्कर्ष: कालभैरव की कृपा का मार्ग

मासिक कालाष्टमी 2025: कालाष्टमी आज, जानिए भगवान कालभैरव की उपासना का महत्व और पूजाविधि

हिंदू धर्म में हर माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कालाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान कालभैरव को समर्पित है, जिन्हें समय के देवता और कर्मों के न्यायाधीश के रूप में पूजा जाता है। 2025 में मासिक कालाष्टमी का विशेष महत्व है, क्योंकि इस दिन भक्तों की आस्था और श्रद्धा से जुड़े कई शुभ संयोग बन रहे हैं। आइए जानते हैं इस पावन तिथि का महत्व, पूजन विधि और कालभैरव जी की कृपा पाने के उपाय।

कालाष्टमी का धार्मिक महत्व

शास्त्रों में कालाष्टमी को “कालरात्रि” भी कहा गया है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र अवतार कालभैरव की उपासना से भक्तों को काल के भय से मुक्ति मिलती है। स्कंद पुराण में वर्णित है:

“कालभैरवं भजन्ते ये मनुष्या: श्रद्धयान्विता:।
तेषां दु:खभयं नास्ति न च मृत्युभयं क्वचित्॥”

अर्थात: जो मनुष्य श्रद्धापूर्वक कालभैरव की उपासना करते हैं, उनके दुख, भय और अकाल मृत्यु का नाश हो जाता है।

कालाष्टमी के प्रमुख लाभ

  • कालजयी शक्ति: समय के बंधन से मुक्ति
  • न्याय की प्राप्ति: अन्यायपूर्ण स्थितियों से सुरक्षा
  • शत्रु बाधा निवारण: विरोधियों पर विजय
  • आध्यात्मिक प्रगति: मोक्ष प्राप्ति का मार्ग

कालभैरव पूजन विधि (विस्तृत मार्गदर्शन)

पूजा की तैयारी

  • प्रात:काल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें
  • साफ लाल या काले वस्त्र धारण करें
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
  • लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं

मुख्य पूजन सामग्री

  • कालभैरव यंत्र या मूर्ति
  • सिंदूर, काले तिल, उड़द की दाल
  • धूप, दीप, काले फूल और बेलपत्र
  • शराब या काले तिलों का तर्पण (वैकल्पिक)

विस्तृत पूजा विधि

1. सर्वप्रथम गणेश वंदना करें:

“वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ…”

2. कालभैरव आवाहन मंत्र:

“ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ नम: शिवाय”

3. षोडशोपचार पूजन करें (16 विधियों से पूजा)

4. विशेष आरती:

“भैरव भवानी नाथ, तुम हो सृष्टि के धाम…”

कालाष्टमी व्रत कथा एवं मंत्र साधना

प्रमुख कथा संक्षेप

पुराणों के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी ने शिव जी का अपमान किया। तब शिवजी के क्रोध से कालभैरव प्रकट हुए जिन्होंने ब्रह्मा जी के पांचवें सिर को काट दिया। बाद में भगवान विष्णु की प्रार्थना पर शिवजी ने कालभैरव को काशी का कोतवाल नियुक्त किया।

मंत्र साधना विधि

  • मूल मंत्र: “ॐ भैरवाय नम:” (108 बार जप)
  • बीज मंत्र: “ॐ ह्रीं क्लीं भैरवाय फट्”
  • मंत्र जप के बाद कालभैरव अष्टक का पाठ अत्यंत फलदायी

2025 में मासिक कालाष्टमी के विशेष संयोग

नवसंवत्सर 2025 में कालाष्टमी के दिन कुछ विशेष योग बन रहे हैं जो इस तिथि को और भी अधिक महत्वपूर्ण बना रहे हैं:

  • रवि योग: सूर्य और चंद्रमा का शुभ संयोग
  • अमृतसिद्धि योग: सभी शुभ कार्यों के लिए उत्तम
  • शनि की साढ़ेसाती: शनि दोष निवारण का सर्वोत्तम अवसर

निष्कर्ष: कालभैरव की कृपा का मार्ग

मासिक कालाष्टमी का पर्व हमें यह सीख देता है कि समय से बड़ा कोई नहीं। भगवान कालभैरव की उपासना से मनुष्य न केवल काल के भय से मुक्त होता है, बल्कि उसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। 2025 की इस पावन तिथि पर प्रत्येक भक्त को पूर्ण श्रद्धा के साथ भैरव बाबा की आराधना करनी चाहिए।

याद रखें – “कालो हि दुरतिक्रम:” (समय सबसे शक्तिशाली है), परंतु कालभैरव की भक्ति से काल भी आपके वश में हो जाता है!

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