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20 जनवरी को साम्ब दशमी सूर्य पूजा विधि महत्व पौराणिक कथा

20 जनवरी को साम्ब दशमी के दिन सूर्य पूजा की सही विधि, महत्व और पौराणिक कथा जानें। इस विशेष दिन सूर्य देव की आराधना करने का सही तरीका और लाभ जानकर अपनी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाएं।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

20 जनवरी को साम्ब दशमी: सूर्य पूजा का पावन पर्व

हिंदू धर्म में सूर्य देव को जीवन और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। साम्ब दशमी का पर्व माघ मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है, जो इस वर्ष 20 जनवरी को पड़ रहा है। यह दिन भगवान सूर्य की विशेष आराधना के लिए समर्पित है। पौराणिक कथाओं में इस पर्व का गहरा महत्व बताया गया है। आइए जानते हैं इस पावन पर्व की पूजन विधि, महत्व और रोचक पौराणिक कथा।

Contents
20 जनवरी को साम्ब दशमी: सूर्य पूजा का पावन पर्वसाम्ब दशमी का महत्वज्योतिषीय महत्वसाम्ब दशमी पूजन विधिसामग्री तैयार करेंपूजा विधिआरतीसाम्ब दशमी की पौराणिक कथाकथा का महत्वसाम्ब दशमी के विशेष उपायनिष्कर्ष

साम्ब दशमी का महत्व

साम्ब दशमी का पर्व भगवान सूर्य और श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब से जुड़ा है। इस दिन सूर्योपासना करने से आरोग्य, सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में इसका विशेष महत्व बताया गया है:

  • सूर्य देव की कृपा से रोगों से मुक्ति मिलती है
  • कुंडली के सूर्य दोष का प्रभाव कम होता है
  • सूर्य पूजा से पितृ दोष शांत होते हैं
  • घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है

ज्योतिषीय महत्व

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है। साम्ब दशमी के दिन सूर्य पूजा करने से जन्मकुंडली के सभी दोष दूर होते हैं और मनुष्य को आत्मबल प्राप्त होता है।

साम्ब दशमी पूजन विधि

साम्ब दशमी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाना चाहिए। निम्नलिखित विधि से पूजन करें:

सामग्री तैयार करें

  • लाल वस्त्र – सूर्य देव को अर्पित करने के लिए
  • लाल फूल – विशेष रूप से गुड़हल या लाल कमल
  • रोली – तिलक लगाने के लिए
  • गुड़ और तिल – प्रसाद के रूप में
  • दीपक – घी का दीपक जलाने के लिए

पूजा विधि

  1. सूर्योदय से पहले स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें
  2. पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन बिछाएं
  3. कलश स्थापित कर उसमें जल, फूल और दूर्वा डालें
  4. सूर्य देव का ध्यान करते हुए लाल वस्त्र अर्पित करें
  5. रोली से तिलक लगाएं और फूल अर्पित करें
  6. निम्न मंत्र का जाप करें:

मंत्र:
“ॐ घृणि सूर्याय नमः”
“ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणाय नमः”

आरती

पूजन के बाद सूर्य देव की आरती करें और प्रसाद वितरित करें। गुड़ और तिल का दान करना इस दिन विशेष फलदायी माना जाता है।

साम्ब दशमी की पौराणिक कथा

स्कंद पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब को कुष्ठ रोग हो गया था। विभिन्न उपचारों के बाद भी जब रोग ठीक नहीं हुआ तो ऋषियों ने उन्हें सूर्य देव की आराधना करने की सलाह दी।

साम्ब ने माघ मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को 12 वर्षों तक निरंतर सूर्य पूजा की। सूर्य देव ने प्रसन्न होकर उन्हें कुष्ठ रोग से मुक्ति दिलाई। तभी से इस दिन को साम्ब दशमी के रूप में मनाया जाने लगा।

कथा का महत्व

यह कथा हमें सिखाती है कि निरंतर साधना और भक्ति से किसी भी कठिन परिस्थिति पर विजय पाई जा सकती है। सूर्य देव की कृपा से सभी प्रकार के रोगों और कष्टों से मुक्ति मिलती है।

साम्ब दशमी के विशेष उपाय

इस पावन दिन कुछ विशेष उपाय करने से अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है:

  • सूर्य को जल अर्पित करें – तांबे के लोटे से जल में लाल फूल डालकर अर्घ्य दें
  • गायत्री मंत्र का जाप – “ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं…” का 108 बार जाप करें
  • तिल का दान – काले तिल का दान करने से पितृ दोष शांत होते हैं
  • सूर्य यंत्र की स्थापना – घर में सूर्य यंत्र स्थापित करें

निष्कर्ष

साम्ब दशमी का पावन पर्व हमें प्रकृति और दैवीय ऊर्जा से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन सूर्य पूजा और दान-पुण्य करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। पौराणिक कथा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति और निष्ठा से किसी भी कठिन परीक्षा में विजय प्राप्त की जा सकती है। आइए, हम सभी इस साम्ब दशमी पर सूर्य देव की आराधना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

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