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पांच पति फिर भी द्रौपदी पर थी इन पांच पुरुषों की कुदृष्टि

Published June 26, 2026
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Contents
पांच पति फिर भी द्रौपदी पर थी इन पांच पुरुषों की कुदृष्टिद्रौपदी: पांचाली से याज्ञसेनी तकद्रौपदी पर कुदृष्टि डालने वाले पांच पुरुष1. दुर्योधन: अंधकार की प्रतीक दृष्टि2. दुःशासन: घृणा और हिंसा का प्रतीक3. कर्ण: वचनबद्धता के कारण कुंठित दृष्टि4. जयद्रथ: अधर्मी की कामुक दृष्टि5. कीचक: वध का पात्र बना अहंकारीनिष्कर्ष: द्रौपदी की पवित्रता और शक्ति

पांच पति फिर भी द्रौपदी पर थी इन पांच पुरुषों की कुदृष्टि

महाभारत की पावन गाथा में द्रौपदी का चरित्र अद्वितीय और प्रेरणादायक है। पांच पांडवों की पत्नी होने के बावजूद, द्रौपदी को अनेक विपत्तियों और कुदृष्टियों का सामना करना पड़ा। इस लेख में हम उन पांच पुरुषों की चर्चा करेंगे, जिन्होंने द्रौपदी की पवित्रता पर कुदृष्टि डाली और उनके दुष्परिणाम भुगते।

द्रौपदी: पांचाली से याज्ञसेनी तक

द्रौपदी, जिन्हें पांचाली और याज्ञसेनी भी कहा जाता है, महाभारत की एक प्रमुख नारी पात्र हैं। उनका जन्म यज्ञकुंड से हुआ था और वे पांचाल नरेश द्रुपद की पुत्री थीं। उनके जीवन में पांच पतियों (पांडवों) के साथ विवाह का रहस्य, दुःख और सम्मान सभी कुछ समाया हुआ है।

  • अग्नि से जन्म: द्रौपदी का जन्म द्रुपद के यज्ञ से हुआ था।
  • पांच पत्नियों का वरदान: उन्होंने पूर्व जन्म में शिव से पांच पराक्रमी पतियों का वरदान मांगा था।
  • धर्मपत्नी: वे पांडवों की धर्मपत्नी और एक आदर्श नारी थीं।

द्रौपदी पर कुदृष्टि डालने वाले पांच पुरुष

1. दुर्योधन: अंधकार की प्रतीक दृष्टि

कौरवों के राजकुमार दुर्योधन ने सदैव द्रौपदी को हीन दृष्टि से देखा। इंद्रप्रस्थ के राजसभा भवन में जब वह फिसलकर गिरा, तब द्रौपदी के हंसने पर उसने प्रतिज्ञा की थी कि वह उसका बदला लेगा। इसी घृणा ने चीरहरण जैसी घटना को जन्म दिया।

  • चीरहरण का प्रयास: द्यूतक्रीड़ा में हारने के बाद दुर्योधन ने दुःशासन से द्रौपदी का चीरहरण करवाया।
  • कर्म का फल: महाभारत युद्ध में भीम ने दुर्योधन की जंघा तोड़कर उसके अहंकार को चूर-चूर कर दिया।

2. दुःशासन: घृणा और हिंसा का प्रतीक

दुःशासन, दुर्योधन का भाई, द्रौपदी के प्रति सबसे अधिक क्रूर था। उसने न केवल द्रौपदी के केश पकड़े, बल्कि सभा में उसका चीरहरण करने का पाप किया।

  • रक्त का प्रतिशोध: द्रौपदी ने प्रतिज्ञा ली कि वह दुःशासन के रक्त से अपने केश धोएगी।
  • भीम की प्रतिज्ञा: भीम ने दुःशासन की छाती फाड़कर उसका रक्त पिया और द्रौपदी के केशों से धोया।

3. कर्ण: वचनबद्धता के कारण कुंठित दृष्टि

कर्ण ने भले ही द्रौपदी को स्वयंवर में हराया था, परंतु उसकी दृष्टि में भी कुंठा थी। द्यूतक्रीड़ा के समय उसने द्रौपदी को “वेश्या” कहकर अपमानित किया।

  • स्वयंवर का अपमान: कर्ण ने द्रौपदी के स्वयंवर में भाग लेने का प्रयास किया, परंतु उसके सूतपुत्र होने के कारण द्रौपदी ने उसे अस्वीकार कर दिया।
  • कर्मफल: अर्जुन ने महाभारत युद्ध में कर्ण का वध किया।

4. जयद्रथ: अधर्मी की कामुक दृष्टि

जयद्रथ, सिंधु नरेश, ने द्रौपदी को अपहरण करने का प्रयास किया था। वह उसकी सुंदरता पर मोहित हो गया और उसे बलपूर्वक ले जाना चाहता था।

  • पांडवों का प्रतिशोध: भीम ने जयद्रथ को युद्ध में पराजित किया और उसके सिर को धड़ से अलग कर दिया।
  • अर्जुन की प्रतिज्ञा: अर्जुन ने जयद्रथ का वध करके द्रौपदी की रक्षा की।

5. कीचक: वध का पात्र बना अहंकारी

विराट नगर में कीचक, मत्स्यराज का सेनापति, द्रौपदी पर कुदृष्टि रखता था। उसने सैरंध्री (द्रौपदी) को प्राप्त करने के लिए उस पर अत्याचार किए।

  • भीम की चाल: द्रौपदी ने कीचक को नृत्यशाला में बुलाया, जहां भीम ने उसका वध किया।
  • अहंकार का अंत: कीचक का अहंकार ही उसके विनाश का कारण बना।

निष्कर्ष: द्रौपदी की पवित्रता और शक्ति

द्रौपदी का चरित्र नारी शक्ति, साहस और धैर्य का प्रतीक है। उन पर कुदृष्टि डालने वाले सभी पुरुषों को उनके कर्मों का फल मिला। महाभारत की यह शिक्षा है कि अधर्मी की दृष्टि कभी सफल नहीं होती और सत्य की सदैव विजय होती है।

द्रौपदी की भक्ति और पतिव्रत धर्म ने उन्हें इतिहास में एक आदर्श नारी के रूप में स्थापित किया। उनकी कथा हमें धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

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