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Margashirsha Month 2025 मार्गशीर्ष मास में शंख पूजन से ग्रह दोष दूर

मार्गशीर्ष मास 2025 में शंख पूजन की विशेष विधि जानें और ग्रह दोषों को दूर करें। इस पवित्र महीने में सही तरीके से पूजा करके शुभ फल पाएं।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

मार्गशीर्ष मास 2025: शंख पूजन से ग्रह दोषों का निवारण

हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास का विशेष धार्मिक महत्व है। यह माह भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और पवित्र कर्मों के लिए समर्पित माना जाता है। 2025 में मार्गशीर्ष मास 23 नवंबर से 22 दिसंबर तक रहेगा। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे शंख पूजन की विधि से आप ग्रह दोषों को दूर कर सकते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि ला सकते हैं।

Contents
मार्गशीर्ष मास 2025: शंख पूजन से ग्रह दोषों का निवारणमार्गशीर्ष मास का महत्वशंख पूजन: ग्रह दोष निवारण की प्राचीन विधिशंख के प्रकार और उनका महत्वमार्गशीर्ष मास में शंख पूजन की विधिपूजन सामग्रीविस्तृत पूजन विधिमंत्रोच्चारणशंख पूजन के लाभविशेष सावधानियांमार्गशीर्ष मास के अन्य महत्वपूर्ण अनुष्ठाननिष्कर्ष

मार्गशीर्ष मास का महत्व

शास्त्रों में मार्गशीर्ष को “मासानां मार्गशीर्षोऽहम्” (महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ) कहकर इसकी महिमा बताई गई है। इस माह में किए गए धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष फल प्राप्त होता है:

  • भगवान कृष्ण ने गीता में इस मास को अपना स्वरूप बताया
  • स्नान-दान, जप-तप का विशेष महत्व
  • ग्रह दोष शांति के लिए उत्तम समय
  • पितृ दोष निवारण हेतु श्राद्ध कर्म

शंख पूजन: ग्रह दोष निवारण की प्राचीन विधि

शंख को समुद्र मंथन से प्राप्त चौदह रत्नों में से एक माना जाता है। मार्गशीर्ष मास में शंख पूजन से न केवल ग्रह दोष दूर होते हैं बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार होता है।

शंख के प्रकार और उनका महत्व

  • दक्षिणावर्ती शंख: धन-समृद्धि के लिए शुभ
  • वामावर्ती शंख: नकारात्मक ऊर्जा का नाश
  • पंचजन्य शंख: भगवान विष्णु का प्रतीक
  • गोमुखी शंख: स्वास्थ्य लाभ हेतु

मार्गशीर्ष मास में शंख पूजन की विधि

पूजन सामग्री

  • शुद्ध जल से भरा तांबे का कलश
  • नया सफेद वस्त्र
  • गंगाजल, फूल, अक्षत
  • दीपक, धूप, घी
  • मिष्ठान (खीर या मीठा भोग)

विस्तृत पूजन विधि

प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें:

  1. पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन बिछाएं
  2. लकड़ी के पाटे पर सफेद कपड़ा बिछाकर शंख स्थापित करें
  3. शंख पर “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र लिखें
  4. गंगाजल छिड़क कर शंख को शुद्ध करें
  5. हल्दी, कुमकुम, चंदन से शंख पर तिलक लगाएं
  6. फूल, अक्षत अर्पित कर दीपक जलाएं

मंत्रोच्चारण

शंख धारण कर निम्न मंत्रों का जाप करें:

  • मूल मंत्र: “ॐ शंखाय नमः” (108 बार)
  • विशेष मंत्र: “ॐ दक्षिणावर्ताय शंखाय सर्वदेवनमस्कृताय नमः”
  • ग्रह शांति मंत्र: “ॐ शंखचक्रगदापाणे द्वारकानिलयाच्युत, गोविन्द पुण्डरीकाक्ष रक्ष मां शरणागतम्”

शंख पूजन के लाभ

मार्गशीर्ष मास में नियमित शंख पूजन से प्राप्त होने वाले विशेष लाभ:

  • ग्रह दोष शांति: शनि, राहु-केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं
  • धन प्राप्ति: आर्थिक समस्याओं का निवारण
  • स्वास्थ्य लाभ: शंखोदक सेवन से रोग निवारण
  • वास्तु दोष: घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश
  • आध्यात्मिक उन्नति: मन को शांति और एकाग्रता प्राप्त होती है

विशेष सावधानियां

  • टूटा-फूटा या दरार वाला शंख पूजन में न रखें
  • मासिक धर्म के दौरान महिलाएं शंख न छुएं
  • शंख को कभी खाली न रखें, जल भरकर रखें
  • पूजा के बाद शंखोदक (शंख का जल) तुलसी डालकर ग्रहण करें

मार्गशीर्ष मास के अन्य महत्वपूर्ण अनुष्ठान

शंख पूजन के साथ-साथ इस माह में ये कार्य भी अवश्य करें:

  • तुलसी पूजा: प्रतिदिन तुलसी को जल अर्पित कर दीपक जलाएं
  • गीता पाठ: मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को गीता जयंती मनाएं
  • दान कर्म: गरीबों को गर्म वस्त्र, अन्न दान दें
  • मौन व्रत: सप्तमी, एकादशी को मौन रहकर भगवान का स्मरण करें

निष्कर्ष

मार्गशीर्ष मास 2025 में शंख पूजन की इस विधि को अपनाकर आप न केवल ग्रह दोषों से मुक्ति पा सकते हैं बल्कि जीवन में आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त कर सकते हैं। याद रखें, श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया प्रत्येक धार्मिक कर्म अवश्य फलदायी होता है। इस पावन मास में भगवान श्रीकृष्ण की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे।

ॐ श्री कृष्णाय शरणं मम:

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