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Rishi Panchami 2025 ऋषि पंचमी पर्व और सप्त ऋषियों की महिमा

ऋषि पंचमी 2025 में जानें सप्तऋषियों के बारे में, उनकी महिमा और पूजा विधि। इस पावन पर्व का महत्व, व्रत कथा और आशीर्वाद पाने के उपाय जानें।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

Rishi Panchami 2025: सप्तऋषियों के प्रति श्रद्धा का पावन पर्व

हिंदू धर्म में ऋषि पंचमी का विशेष महत्व है। यह पर्व हमें हमारे ऋषि-मुनियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। 2025 में यह पावन तिथि 31 अगस्त को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं कैसे यह पर्व सप्तऋषियों को समर्पित है और क्यों इनकी पूजा हमारे जीवन के लिए इतनी महत्वपूर्ण है।

Contents
Rishi Panchami 2025: सप्तऋषियों के प्रति श्रद्धा का पावन पर्वऋषि पंचमी का महत्वसप्तऋषि: सात दिव्य प्रकाश1. महर्षि वशिष्ठ2. महर्षि विश्वामित्र3. महर्षि जमदग्नि4. महर्षि भारद्वाज5. महर्षि गौतम6. महर्षि अत्रि7. महर्षि कश्यपऋषि पंचमी 2025: पूजा विधिविशेष उपायऋषि पंचमी की कथानिष्कर्ष

ऋषि पंचमी का महत्व

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व का उल्लेख कई पुराणों में मिलता है। स्कन्द पुराण के अनुसार इस दिन सप्तऋषियों की आराधना करने से ज्ञान, विवेक और पापों से मुक्ति मिलती है।

  • विद्या और ज्ञान की प्राप्ति
  • पितृदोष से मुक्ति
  • संतान सुख की प्राप्ति
  • कर्मों की शुद्धि

सप्तऋषि: सात दिव्य प्रकाश

वेदों और पुराणों में वर्णित ये सात महान ऋषि हमारी संस्कृति के आधार स्तंभ हैं। आइए जानें इनके बारे में विस्तार से:

1. महर्षि वशिष्ठ

सप्तऋषियों में प्रमुख वशिष्ठ ऋषि को ब्रह्मा का मानस पुत्र माना जाता है। इन्होंने वशिष्ठ संहिता और योग वशिष्ठ जैसे ग्रंथों की रचना की।

  • गोत्र प्रवर्तक: वशिष्ठ गोत्र
  • प्रमुख योगदान: राजनीति और समाज शास्त्र
  • मंत्र: ॐ वशिष्ठाय नमः

2. महर्षि विश्वामित्र

राजा से ऋषि बने विश्वामित्र ने गायत्री मंत्र की रचना की। इनकी तपस्या और संघर्ष की कथा प्रेरणादायक है।

  • गोत्र प्रवर्तक: कौशिक गोत्र
  • प्रमुख योगदान: गायत्री मंत्र
  • मंत्र: ॐ विश्वामित्राय नमः

3. महर्षि जमदग्नि

भगवान परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि ने यज्ञ और तपस्या के नए मार्ग प्रशस्त किए।

  • गोत्र प्रवर्तक: जमदग्नि गोत्र
  • प्रमुख योगदान: धर्मशास्त्र
  • मंत्र: ॐ जमदग्नये नमः

4. महर्षि भारद्वाज

आयुर्वेद और विमान शास्त्र के प्रणेता भारद्वाज ऋषि ने भारद्वाज स्मृति की रचना की।

  • गोत्र प्रवर्तक: भारद्वाज गोत्र
  • प्रमुख योगदान: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
  • मंत्र: ॐ भारद्वाजाय नमः

5. महर्षि गौतम

अहिल्या के पति गौतम ऋषि ने धर्मसूत्र और न्याय शास्त्र में अमूल्य योगदान दिया।

  • गोत्र प्रवर्तक: गौतम गोत्र
  • प्रमुख योगदान: नैतिकता के सिद्धांत
  • मंत्र: ॐ गौतमाय नमः

6. महर्षि अत्रि

त्रिमूर्तियों के अंश माने जाने वाले अत्रि ऋषि ने अत्रि संहिता लिखी जो आयुर्वेद का प्रमुख ग्रंथ है।

  • गोत्र प्रवर्तक: अत्रि गोत्र
  • प्रमुख योगदान: चिकित्सा विज्ञान
  • मंत्र: ॐ अत्रये नमः

7. महर्षि कश्यप

सृष्टि के प्रजापति कहे जाने वाले कश्यप ऋषि ने कश्यप संहिता के माध्यम से ज्ञान का प्रसार किया।

  • गोत्र प्रवर्तक: कश्यप गोत्र
  • प्रमुख योगदान: सृष्टि विज्ञान
  • मंत्र: ॐ कश्यपाय नमः

ऋषि पंचमी 2025: पूजा विधि

इस वर्ष 31 अगस्त 2025 को मनाए जाने वाले इस पर्व पर इस प्रकार पूजा करें:

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • सप्तऋषियों की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
  • गंगाजल, फूल, अक्षत, फल आदि से पूजा करें
  • निम्न मंत्र का जाप करें:

ॐ सप्तऋषिभ्यो नमः (108 बार)

विशेष उपाय

  • इस दिन ब्राह्मण भोजन करवाना शुभ माना जाता है
  • विद्यार्थियों को ऋषि ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए
  • पितृ दोष से मुक्ति के लिए तर्पण अवश्य करें

ऋषि पंचमी की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार एक ब्राह्मण कन्या को मासिक धर्म के दौरान अनजाने में हुए दोषों से मुक्ति के लिए ऋषियों ने इस व्रत का विधान बताया। इससे उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।

निष्कर्ष

ऋषि पंचमी हमें हमारे ऋषि परंपरा से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है। सप्तऋषियों के ज्ञान और तप से प्रेरणा लेकर हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं। 2025 में इस पर्व को विशेष भक्तिभाव से मनाकर हम ऋषियों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त कर सकते हैं।

आइए, इस पावन अवसर पर संकल्प लें कि हम ऋषि परंपरा के ज्ञान को आगे बढ़ाएंगे और उनके बताए मार्ग पर चलेंगे।

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