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Pitru Paksha 2025: पितरों को प्रसन्न करने का शुभ मुहूर्त और तिथि जानें

Published June 26, 2026
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Contents
पितृ पक्ष 2025: पितरों की प्रसन्नता के लिए करें श्राद्धपितृ पक्ष का महत्वक्यों जरूरी है श्राद्ध?पितृ पक्ष 2025 की तिथियाँ और श्राद्ध विधि1. पूर्णिमा श्राद्ध (10 सितंबर 2025)2. प्रतिपदा (11 सितंबर 2025)3. द्वितीया (12 सितंबर 2025)4. तृतीया (13 सितंबर 2025)5. चतुर्थी (14 सितंबर 2025)6. महाभारतीय श्राद्ध (पंचमी – 15 सितंबर 2025)7. षष्ठी (16 सितंबर 2025)8. सप्तमी (17 सितंबर 2025)9. अष्टमी (18 सितंबर 2025)10. नवमी (19 सितंबर 2025)11. दशमी (20 सितंबर 2025)12. एकादशी (21 सितंबर 2025)13. द्वादशी (22 सितंबर 2025)14. त्रयोदशी (23 सितंबर 2025)15. चतुर्दशी (24 सितंबर 2025)16. सर्वपितृ अमावस्या (25 सितंबर 2025)श्राद्ध की सही विधिआवश्यक सामग्रीविधिश्राद्ध में क्या न करेंपितृ पक्ष में विशेष सावधानियाँपितृ दोष से मुक्ति के उपायनिष्कर्ष

पितृ पक्ष 2025: पितरों की प्रसन्नता के लिए करें श्राद्ध

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। यह वह पवित्र समय होता है जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं। 2025 में पितृ पक्ष 10 सितंबर से 25 सितंबर तक मनाया जाएगा। इस लेख में जानें कि किस तिथि को किस पितर का श्राद्ध करना चाहिए और कैसे करें इसकी सही विधि।

पितृ पक्ष का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा दिए गए तर्पण व पिंड दान को ग्रहण करते हैं। इससे उनकी आत्मा को तृप्ति मिलती है और वे हमें आशीर्वाद देते हैं।

क्यों जरूरी है श्राद्ध?

  • पितृ ऋण से मुक्ति पाने के लिए
  • पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए
  • कुल परंपरा को निभाने के लिए
  • पारिवारिक समृद्धि के लिए

पितृ पक्ष 2025 की तिथियाँ और श्राद्ध विधि

1. पूर्णिमा श्राद्ध (10 सितंबर 2025)

पितृ पक्ष का आरंभ आश्विन मास की पूर्णिमा से होता है। इस दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनका निधन पूर्णिमा तिथि को हुआ हो।

2. प्रतिपदा (11 सितंबर 2025)

इस दिन अकाल मृत्यु प्राप्त व्यक्तियों का श्राद्ध किया जाता है।

3. द्वितीया (12 सितंबर 2025)

जिन पितरों का देहांत द्वितीया तिथि को हुआ हो, उनका श्राद्ध इस दिन किया जाता है।

4. तृतीया (13 सितंबर 2025)

इस दिन माताओं का विशेष श्राद्ध किया जाता है।

5. चतुर्थी (14 सितंबर 2025)

इस तिथि को सन्यासियों व अपूर्व मृत्यु प्राप्त जनों का श्राद्ध किया जाता है।

6. महाभारतीय श्राद्ध (पंचमी – 15 सितंबर 2025)

इस दिन नाग देवता और विशेष संन्यासियों का श्राद्ध किया जाता है।

7. षष्ठी (16 सितंबर 2025)

जिन पितरों का निधन षष्ठी तिथि को हुआ हो, उनका श्राद्ध इस दिन किया जाता है।

8. सप्तमी (17 सितंबर 2025)

इस दिन अकाल मृत्यु प्राप्त स्त्रियों का श्राद्ध किया जाता है।

9. अष्टमी (18 सितंबर 2025)

इस दिन किसी हिंसा या दुर्घटना में मारे गए पितरों का श्राद्ध किया जाता है।

10. नवमी (19 सितंबर 2025)

इस दिन मातामह (नाना-नानी) का श्राद्ध किया जाता है।

11. दशमी (20 सितंबर 2025)

जिन पितरों का निधन दशमी तिथि को हुआ हो, उनका श्राद्ध इस दिन किया जाता है।

12. एकादशी (21 सितंबर 2025)

इस दिन सन्यासियों व ब्रह्मचारियों का श्राद्ध किया जाता है।

13. द्वादशी (22 सितंबर 2025)

इस दिन यज्ञोपवीत धारण करने वाले पितरों का श्राद्ध किया जाता है।

14. त्रयोदशी (23 सितंबर 2025)

इस दिन हथियार या शस्त्र से मारे गए पितरों का श्राद्ध किया जाता है।

15. चतुर्दशी (24 सितंबर 2025)

इस दिन अकाल मृत्यु प्राप्त व्यक्तियों का श्राद्ध किया जाता है।

16. सर्वपितृ अमावस्या (25 सितंबर 2025)

पितृ पक्ष का अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है, विशेषकर जिनकी तिथि ज्ञात न हो।

श्राद्ध की सही विधि

आवश्यक सामग्री

  • कुशा (दूब घास)
  • तिल
  • जल
  • पिंड (चावल या आटे के)
  • फूल, फल
  • दीपक

विधि

  • स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें
  • पितरों का आवाहन करें: “ॐ पितृदेवताभ्यो नमः”
  • तर्पण दें (जल अर्पित करें)
  • पिंड दान करें
  • ब्राह्मण को भोजन कराएं
  • दान-दक्षिणा दें

श्राद्ध में क्या न करें

  • लहसुन-प्याज का प्रयोग न करें
  • किसी से झगड़ा न करें
  • अन्न का अपव्यय न करें
  • किसी को अपशब्द न कहें

पितृ पक्ष में विशेष सावधानियाँ

इस पवित्र समय में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • पितृ पक्ष में नए कार्य शुरू न करें
  • मांस-मदिरा का सेवन न करें
  • पितरों के नाम से दान अवश्य करें
  • पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करें

पितृ दोष से मुक्ति के उपाय

यदि आपको लगता है कि पितृ दोष के कारण जीवन में समस्याएं आ रही हैं, तो ये उपाय करें:

  • गाय को हरा चारा खिलाएं
  • कौओं को भोजन कराएं
  • ब्राह्मण को भोजन कराएं
  • गीता का पाठ करें

निष्कर्ष

पितृ पक्ष हमारे पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सर्वोत्तम अवसर है। 2025 में 10 से 25 सितंबर तक मनाए जाने वाले इस पवित्र समय में सही तिथि पर श्राद्ध करके हम अपने पितरों को तृप्त कर सकते हैं। याद रखें, “पितृ देवो भव” – पितर ही देवता हैं। उनकी प्रसन्नता से ही कुल की समृद्धि संभव है।

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