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Lord Ganesha Puja: दूर्वा घास क्यों है जरूरी? जानिए कथा और महत्व

भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा घास का विशेष महत्व है। जानिए दूर्वा चढ़ाने की पौराणिक कथा, spiritual significance और इसके लाभ। Ganesha Puja की सम्पूर्ण जानकारी।

Published July 2, 2026
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6 Min Read

भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा घास क्यों है जरूरी? जानिए कथा और महत्व

हिंदू धर्म में भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। उन्हें प्रथम पूज्य देवता माना जाता है और कोई भी शुभ कार्य शुरू करने से पहले उनकी आराधना की जाती है। गणेश जी की पूजा में दूर्वा घास का विशेष स्थान है। यह हरी-भरी घास न केवल उन्हें अत्यंत प्रिय है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी पौराणिक कथा और आध्यात्मिक महत्व भी छिपा हुआ है। आइए जानते हैं कि गणपति बप्पा की पूजा में दूर्वा क्यों अर्पित की जाती है और इसका क्या रहस्य है।

Contents
भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा घास क्यों है जरूरी? जानिए कथा और महत्वदूर्वा घास का परिचयदूर्वा घास से जुड़ी पौराणिक कथादूर्वा और गणेश जी का संबंधदूर्वा अर्पित करने की दूसरी कथादूर्वा घास का धार्मिक महत्वआध्यात्मिक महत्ववैज्ञानिक दृष्टिकोणदूर्वा घास अर्पित करने का सही तरीकादूर्वा घास के अन्य लाभनिष्कर्ष

दूर्वा घास का परिचय

दूर्वा एक विशेष प्रकार की घास है जिसे संस्कृत में “दूर्वा” और हिंदी में “दूब” कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Cynodon dactylon है। यह घास अपने औषधीय गुणों के लिए भी जानी जाती है। हिंदू धर्म में इसे पवित्र माना गया है और विशेषकर भगवान गणेश की पूजा में इसका उपयोग किया जाता है।

  • दूर्वा की 21 गांठें गणेश जी को अर्पित की जाती हैं
  • इसकी हरी पत्तियां शुभता और समृद्धि का प्रतीक हैं
  • आयुर्वेद में इसके कई स्वास्थ्य लाभ बताए गए हैं

दूर्वा घास से जुड़ी पौराणिक कथा

दूर्वा और गणेश जी का संबंध

पुराणों में एक रोचक कथा मिलती है जो दूर्वा घास और गणेश जी के बीच के विशेष संबंध को दर्शाती है। कहा जाता है कि एक बार अनलासुर नामक एक राक्षस ने देवताओं को परेशान करना शुरू कर दिया। उसके अत्याचारों से त्रस्त होकर सभी देवता भगवान गणेश के पास मदद मांगने पहुंचे।

गणेश जी ने अनलासुर का वध कर दिया, लेकिन इस युद्ध के दौरान राक्षस का रक्त पृथ्वी पर गिरने लगा। इस रक्त की प्रत्येक बूंद से नए राक्षस उत्पन्न होने लगे। यह देखकर गणेश जी ने दूर्वा घास खा ली और उसके रस को अपने शरीर में धारण कर लिया। जब राक्षस का रक्त दूर्वा के संपर्क में आया तो नए राक्षस पैदा नहीं हुए। इस प्रकार गणेश जी ने दूर्वा की सहायता से अनलासुर का संहार किया।

दूर्वा अर्पित करने की दूसरी कथा

एक अन्य कथा के अनुसार, एक बार गणेश जी ने कुबेर के यहां भोजन किया। भोजन इतना अधिक था कि गणेश जी का पेट भरने के बाद भी बहुत सारा भोजन बच गया। घर लौटते समय उनका पेट फटने लगा तो उन्होंने एक सांप को अपने पेट के चारों ओर बांध लिया। इस दौरान चंद्रमा यह देखकर हंस पड़े। गणेश जी ने क्रोधित होकर चंद्रमा को श्राप दे दिया।

बाद में चंद्रमा ने क्षमा मांगी तो गणेश जी ने श्राप को कम कर दिया, लेकिन उनका पेट अभी भी भारी था। तभी उन्होंने दूर्वा घास खाई जिससे उनकी पीड़ा कम हुई। तभी से दूर्वा उन्हें प्रिय हो गई और भक्त इसे उन्हें अर्पित करने लगे।

दूर्वा घास का धार्मिक महत्व

आध्यात्मिक महत्व

दूर्वा घास का गणेश पूजन में केवल पौराणिक ही नहीं बल्कि गहरा आध्यात्मिक महत्व भी है। मान्यता है कि दूर्वा में विशेष ऊर्जा होती है जो गणेश जी को प्रसन्न करती है।

  • दूर्वा की 21 गांठें 21 प्रकार के पापों को नष्ट करती हैं
  • इसकी हरियाली मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है
  • यह गणेश जी की कृपा प्राप्त करने का सरल उपाय है

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

विज्ञान की दृष्टि से देखें तो दूर्वा घास में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। यह एक प्राकृतिक शुद्धिकारक है जो वातावरण से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है। गणेश पूजा में इसका उपयोग करने से पूजा स्थल का वातावरण शुद्ध और पवित्र बनता है।

दूर्वा घास अर्पित करने का सही तरीका

गणेश जी को दूर्वा अर्पित करने के कुछ विशेष नियम हैं जिनका पालन करना चाहिए:

  • दूर्वा को हमेशा तीन या पांच गांठों वाली ही अर्पित करें
  • इसे गणेश जी के सिर के ऊपर से नहीं बल्कि उनके पास रखकर अर्पित करें
  • दूर्वा अर्पित करते समय निम्न मंत्र का जाप करें:

    “ओम गं गणपतये नमः”

    या

    “दूर्वांकुरान् समायुक्तां रक्तपुष्पैः सुपूजिताम्।
    एकदन्ताय विघ्नेश गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते॥”

  • दूर्वा को शुद्ध जल से धोकर ही अर्पित करें
  • इसे दाहिने हाथ से अर्पित करना शुभ माना जाता है

दूर्वा घास के अन्य लाभ

गणेश पूजा के अलावा भी दूर्वा घास के कई लाभ हैं:

  • आयुर्वेदिक उपचार: पाचन संबंधी समस्याओं में लाभदायक
  • वास्तु दोष निवारण: घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए उपयोगी
  • यज्ञ और हवन: विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त
  • प्राकृतिक शुद्धिकारक: वातावरण को शुद्ध करने में सहायक

निष्कर्ष

भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा घास का विशेष महत्व है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यह गणपति बप्पा को अत्यंत प्रिय है और इसे अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। दूर्वा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि इसके वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक लाभ भी हैं। गणेश चतुर्थी, विनायक चतुर्थी या किसी भी गणेश पूजा में दूर्वा अर्पित करना शुभ माना जाता है।

आइए, हम भी गणेश जी की पूजा में श्रद्धापूर्वक दूर्वा अर्पित करें और उनकी कृपा प्राप्त करें। गणपति बप्पा मोरया!

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