षटतिला एकादशी 2025: परिचय और महत्व
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। इनमें से षटतिला एकादशी एक अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। 2025 में, षटतिला एकादशी 30 जनवरी, गुरुवार को पड़ रही है। इस व्रत में तिल (तिल) के छह प्रकारों का उपयोग करके भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, इसीलिए इसे “षटतिला” नाम दिया गया है।
षटतिला एकादशी का पौराणिक महत्व
पद्म पुराण के अनुसार, इस व्रत के पालन से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर तिल का दान करने से अन्न-धन की कभी कमी नहीं होती।
षटतिला एकादशी 2025: शुभ मुहूर्त
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 29 जनवरी 2025 को रात 09:42 बजे से
- एकादशी तिथि समाप्त: 30 जनवरी 2025 को रात 11:59 बजे तक
- व्रत पारण समय: 31 जनवरी को सुबह 07:12 बजे से 09:23 बजे तक
ध्यान रखने योग्य बातें
- पारण द्वादशी तिथि के दौरान ही करें
- हरि वासर समाप्त होने के बाद ही भोजन ग्रहण करें
- सूर्योदय के बाद पारण करना शुभ माना जाता है
षटतिला एकादशी व्रत पूजा विधि
पूजा की तैयारी
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
- साफ वस्त्र धारण करें (अधिमानतः पीले या सफेद रंग के)
- घर के मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करें
- तिल के छह रूपों (तिल का तेल, तिल मिश्रित जल, तिल का उबटन, तिल की माला, तिल का हवन सामग्री और तिल मिश्रित भोजन) को तैयार करें
पूजा विधि
- भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें
- तिल के तेल का दीपक जलाएं
- भगवान को तिल मिश्रित जल से अभिषेक करें
- तिल के उबटन से भगवान का श्रृंगार करें
- तिल की माला से 108 बार “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
- तिल से हवन करें और आरती उतारें
महत्वपूर्ण मंत्र
इस दिन इस मंत्र का विशेष रूप से जाप करें:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”
या फिर यह श्लोक पढ़ें:
“षटतिला महापुण्या सर्वपापप्रणाशिनी।
तस्मात्सर्वप्रयत्नेन कर्तव्या हरिवल्लभा॥”
षटतिला एकादशी व्रत कथा
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार एक ब्राह्मणी थी जो नियमित रूप से व्रत रखती थी लेकिन दान-पुण्य नहीं करती थी। मृत्यु के बाद वह एक पीपल के पेड़ पर रहने वाली चिड़िया बन गई। एक दिन, संयोग से उसने षटतिला एकादशी व्रत की महिमा सुनी और उसने व्रत रखा। व्रत के प्रभाव से उसे पुनः मानव योनि प्राप्त हुई और अंततः मोक्ष की प्राप्ति हुई।
षटतिला एकादशी व्रत के नियम
- पूरे दिन उपवास रखें (फलाहार या निर्जल व्रत)
- तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा आदि) से परहेज करें
- क्रोध, झूठ और किसी को दुःख देने वाले कर्मों से बचें
- तिल का दान अवश्य करें (गरीबों को तिल, गुड़ या अन्न दान करें)
- रात्रि जागरण कर भगवान के भजन-कीर्तन में समय बिताएं
षटतिला एकादशी व्रत पारण विधि
व्रत का समापन पारण के साथ होता है। पारण करते समय इन बातों का ध्यान रखें:
- सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें
- पहले तिल मिश्रित जल पीकर व्रत तोड़ें
- फिर फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करें
- ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें
पारण में क्या खाएं
- तिल से बने व्यंजन (तिल के लड्डू, तिल चिक्की)
- फल और मेवे
- दूध या दही से बने पदार्थ
- सेंधा नमक का उपयोग कर सकते हैं
षटतिला एकादशी का महत्व और लाभ
- पितृ दोष से मुक्ति मिलती है
- कुंडली के अशुभ योगों का प्रभाव कम होता है
- आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है
- स्वास्थ्य लाभ और दीर्घायु प्राप्त होती है
- मनुष्य को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है
निष्कर्ष
षटतिला एकादशी का व्रत हमारे जीवन से अज्ञानता के अंधकार को दूर करने वाला माना जाता है। यह व्रत न केवल हमारे पापों का नाश करता है बल्कि हमें आध्यात्मिक उन्नति की ओर भी ले जाता है। 2025 में 30 जनवरी को मनाए जाने वाले इस पावन व्रत में भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। तिल के छह रूपों का उपयोग करके यह व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।
