MSHBMSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
Reading: भाई-बहन नहीं पति-पत्नी ने शुरू किया था रक्षाबंधन
Share
Notification Show More
MSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
© 2024 MSHB.in. All Rights Reserved.

भाई-बहन नहीं पति-पत्नी ने शुरू किया था रक्षाबंधन

Published June 26, 2026
Share
4 Min Read

“`html

Contents
भाई-बहन ने नहीं, इन पति-पत्नी ने शुरू किया था रक्षाबंधन का त्योहाररक्षाबंधन की पौराणिक उत्पत्तिरानी कर्णावती और हुमायूँ की ऐतिहासिक गाथारक्षाबंधन मंत्र का महत्वकैसे बदला रक्षाबंधन का स्वरूप?रक्षाबंधन का आध्यात्मिक संदेशनिष्कर्ष

भाई-बहन ने नहीं, इन पति-पत्नी ने शुरू किया था रक्षाबंधन का त्योहार

रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्यार और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी शुरुआत वास्तव में एक पति-पत्नी ने की थी? यह कहानी हमें प्राचीन ग्रंथों और पौराणिक मान्यताओं में मिलती है, जो रक्षाबंधन के त्योहार के मूल में छिपे दिव्य प्रेम और कर्तव्य को उजागर करती है। आइए, जानते हैं इस पावन परंपरा का असली इतिहास!

रक्षाबंधन की पौराणिक उत्पत्ति

हिंदू धर्म के ग्रंथों में रक्षाबंधन का पहला उल्लेख भविष्य पुराण में मिलता है। कथा के अनुसार, एक बार देवताओं और दानवों के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया। देवराज इंद्र घबरा गए क्योंकि दानवों ने उन पर विजय प्राप्त कर ली थी। तब इंद्राणी (शची देवी) ने एक रक्षासूत्र बनाकर अपने पति इंद्र की कलाई पर बांधा। इस सूत्र में उन्होंने अपने प्रेम और शक्ति का संकल्प समाहित किया। मान्यता है कि इसी रक्षासूत्र की शक्ति से इंद्र ने दानवों पर विजय प्राप्त की।

  • यह घटना श्रावण पूर्णिमा के दिन घटी थी, जो आज रक्षाबंधन के रूप में मनाई जाती है।
  • इस प्रकार, रक्षाबंधन की शुरुआत पति-पत्नी के बीच संरक्षण और समर्पण के प्रतीक के रूप में हुई।
  • बाद में यह परंपरा भाई-बहन के रिश्ते तक पहुँची।

रानी कर्णावती और हुमायूँ की ऐतिहासिक गाथा

इतिहास में भी रक्षाबंधन का एक प्रसिद्ध प्रसंग मिलता है। चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने मुगल बादशाह हुमायूँ को राखी भेजकर सहायता माँगी थी। हुमायूँ ने इस रक्षासूत्र को मानते हुए रानी की रक्षा का वचन दिया। यह घटना दर्शाती है कि रक्षाबंधन सिर्फ रक्त संबंधों तक ही सीमित नहीं, बल्कि मानवीय एकता और सद्भाव का प्रतीक है।

रक्षाबंधन मंत्र का महत्व

रक्षासूत्र बाँधते समय बोले जाने वाले मंत्र में इस त्योहार का गहरा अर्थ छिपा है:

“येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।”

अर्थात, “जिस सूत्र से महान बलशाली दानवराज बलि को बाँधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुम्हें बाँधता/बाँधती हूँ। हे रक्षासूत्र! तुम अडिग रहना।” यह मंत्र श्री विष्णु और राजा बलि की कथा से जुड़ा है, जहाँ भगवान ने वामन अवतार में बलि को रक्षासूत्र बाँधकर उसकी रक्षा का वचन दिया था।

कैसे बदला रक्षाबंधन का स्वरूप?

समय के साथ रक्षाबंधन के स्वरूप में परिवर्तन आया:

  • वैदिक काल: ऋषि-मुनि यजमानों को रक्षासूत्र बाँधते थे।
  • मध्यकाल: यह परंपरा राजा-प्रजा और सैनिकों तक पहुँची।
  • आधुनिक युग: अब यह मुख्य रूप से भाई-बहन का त्योहार बन गया है।

रक्षाबंधन का आध्यात्मिक संदेश

चाहे पति-पत्नी ने शुरू किया हो या भाई-बहन मनाते हों, रक्षाबंधन का मूल संदेश वही है:

  • प्रेम का बंधन: निस्वार्थ प्रेम और विश्वास की डोर।
  • कर्तव्य की भावना: रक्षा का संकल्प और सम्मान का वचन।
  • सामाजिक एकता: जाति, धर्म या संप्रदाय से ऊपर उठकर मानवीय बंधन।

निष्कर्ष

रक्षाबंधन की यह अल्पज्ञात कथा हमें बताती है कि भारतीय परंपराओं की जड़ें कितनी गहरी और अर्थपूर्ण हैं। आज भले ही हम इस त्योहार को भाई-बहन के रूप में मनाते हों, लेकिन इसका मूल सार प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का वचन है। चाहे वह पति-पत्नी का बंधन हो या भाई-बहन का, राखी का धागा हमें याद दिलाता है कि सच्चे रिश्ते वचनबद्धता और समर्पण से ही मजबूत बनते हैं।

इस रक्षाबंधन पर हम सब यह संकल्प लें कि न सिर्फ रक्त के, बल्कि मानवता के सभी बंधनों को पवित्रता से निभाएँ। आखिरकार, “रक्षा” का वचन तो हर पवित्र रिश्ते की नींव है!

“`

You Might Also Like

हनुमानजी गुस्से में क्यों हैं तस्वीर बनाने वाला कौन

नए साल का आगमन बुधवार से ऐसे करें शुरुआत

सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों की विदाई

गणेश जी के हाथ में दांत क्यों रखते हैं जानकर हैरान रह जाएंगे

गंगाजल के फायदे और घर की समस्याओं का समाधान

Share

Latest News

Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा पाठ का सही समय और विधि
Religion Spirituality June 26, 2026
राधा कृष्णा का युगल रूप हैं बांके बिहारी
Religion Spirituality June 26, 2026
Kheer Bhawani Temple: कश्मीर के चमत्कारी खीर भवानी मंदिर की परंपराएं
Religion Spirituality June 26, 2026
Durga Puja 2025 आज से शुरू जानें कल्पारंभ पूजा का शुभ मुहूर्त
Religion Spirituality June 26, 2026

You Might also Like

शिव और कृष्ण में छिड़ा संग्राम Shiv Krishna Yudh

June 26, 2026

Ramadan 2025 Sehri Iftar Time 05 April सहरी इफ्तार समय

June 26, 2026

Easter Sunday 2025 ईस्टर संडे का महत्व और मनाने का तरीका

June 26, 2026
MshbMshb

MSHB.in is your reliable source for the latest news in Government Schemes, Sarkari Yojana, Govt Jobs, Spirituality, lifestyle, and more.

Quick Link

  • MSHB.IN
  • About Us
  • Blogs
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • My Bookmarks
  • Contact Us

Category

  • Religion
  • Latest News
  • Sarkari Yojana

Recent Post

  • Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा पाठ का सही समय और विधि
  • राधा कृष्णा का युगल रूप हैं बांके बिहारी
  • Kheer Bhawani Temple: कश्मीर के चमत्कारी खीर भवानी मंदिर की परंपराएं
© 2025 MSHB. All Rights Reserved. | Website Designed By Dinox Tech
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?