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Chandra Grahan 2025: देव दीपावली पर चंद्र ग्रहण का साया, जानें कब मनाएं कार्तिक पूर्णिमा?
हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण और कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है। सन 2025 में यह अनूठा संयोग बन रहा है जब देव दीपावली के पावन पर्व पर ही चंद्र ग्रहण लगेगा। इस दिव्य संयोग में भक्तों के मन में अनेक प्रश्न उठते हैं – क्या ग्रहण काल में पूजा कर सकते हैं? कार्तिक स्नान कब करें? इस लेख में हम आपके सभी संशयों का समाधान करेंगे।
चंद्र ग्रहण 2025: तिथि और समय
वर्ष 2025 का चंद्र ग्रहण 7 नवंबर को लगेगा जो कि कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को पड़ रहा है। यह ग्रहण भारत के अलावा यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के कुछ भागों में दिखाई देगा।
- ग्रहण प्रारंभ: 7 नवंबर रात 09:32 बजे (IST)
- परमग्रास: 10:14 बजे (IST)
- ग्रहण समाप्ति: 8 नवंबर प्रातः 12:23 बजे (IST)
- कुल अवधि: 2 घंटे 51 मिनट
देव दीपावली और चंद्र ग्रहण का संयोग
कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवतागण कार्तिक मास की समाप्ति पर आनंदोत्सव मनाते हैं। वर्ष 2025 में यह पर्व चंद्र ग्रहण के साये में मनाया जाएगा।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण काल में विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए:
- ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं
- सूतक काल में कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता
- ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और दान का विशेष महत्व है
कार्तिक पूर्णिमा 2025: पूजा का शुभ मुहूर्त
चंद्र ग्रहण के कारण कार्तिक पूर्णिमा का पूजन काल थोड़ा परिवर्तित होगा। जानिए सही समय:
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर शाम 05:19 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 7 नवंबर शाम 03:18 बजे
- स्नान-दान का शुभ समय: 7 नवंबर प्रातः 05:32 से 09:45 तक
ग्रहण काल में क्या करें, क्या न करें?
धर्म शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल में इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
क्या करें:
- ग्रहण समाप्ति के बाद गंगाजल से शुद्धिकरण स्नान करें
- तुलसी के पौधे की पूजा करें और दीपदान करें
- ग्रहण के बाद अन्न, वस्त्र या धन का दान करें
क्या न करें:
- ग्रहण काल में भोजन न करें
- सूतक काल में कोई मंत्र जाप न करें
- ग्रहण देखने से बचें (विशेषकर गर्भवती महिलाएं)
चंद्र ग्रहण का धार्मिक महत्व
श्रीमद्भागवत गीता (10.21) में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं:
“नक्षत्राणामहं शशी” – “नक्षत्रों में मैं चंद्रमा हूँ”
हिंदू मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण के समय महामृत्युंजय मंत्र का जाप विशेष फलदायी होता है। ग्रहण समाप्ति पर इस मंत्र का पाठ करें:
“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”
निष्कर्ष
वर्ष 2025 का चंद्र ग्रहण और कार्तिक पूर्णिमा का यह अद्भुत संयोग हमें आध्यात्मिक उन्नति का अवसर प्रदान करता है। ग्रहण काल में सावधानियां बरतते हुए, ग्रहणोपरांत पवित्र स्नान और दान करके हम इस दिव्य योग का पूर्ण लाभ उठा सकते हैं। याद रखें, देव दीपावली का पावन पर्व हमें अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश देता है – चंद्र ग्रहण का यह साया भी हमारे जीवन से अज्ञान के अंधकार को दूर करने का प्रतीक है।
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