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किन्नर समाज किस देवी की पूजा करता है और मंदिर कहाँ है?

Published June 26, 2026
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किन्नर समाज के लोग किस देवी की करते हैं पूजा और कहाँ स्थित है इनका मंदिर?देवी बहुचरा माता: किन्नर समाज की आराध्य देवीदेवी बहुचरा माता का प्रसिद्ध मंदिरमंदिर की वास्तुकला और दर्शनीय स्थलकिन्नर समाज और देवी बहुचरा माता का विशेष संबंधनिष्कर्ष

किन्नर समाज के लोग किस देवी की करते हैं पूजा और कहाँ स्थित है इनका मंदिर?

भारतीय संस्कृति में किन्नर समाज का एक विशेष स्थान है। यह समाज न केवल अपनी अनूठी पहचान के लिए जाना जाता है, बल्कि अपनी आस्था और भक्ति के लिए भी प्रसिद्ध है। किन्नर समाज के लोग मुख्य रूप से देवी बहुचरा माता की पूजा करते हैं, जिन्हें उनकी कुलदेवी माना जाता है। आइए, जानते हैं इस देवी के बारे में विस्तार से और उनके प्रसिद्ध मंदिर के बारे में भी।

देवी बहुचरा माता: किन्नर समाज की आराध्य देवी

देवी बहुचरा माता को किन्नर समाज की मुख्य देवी के रूप में पूजा जाता है। इन्हें ‘बहुचराजी’ या ‘बहुचर माता’ के नाम से भी जाना जाता है। यह देवी हिंदू धर्म में शक्ति का एक रूप हैं और विशेष रूप से किन्नर समाज में इनकी पूजा का विशेष महत्व है।

  • मान्यता: मान्यता है कि देवी बहुचरा माता अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूरी करती हैं और उन्हें समाज में सम्मान दिलाती हैं।
  • पौराणिक कथा: पुराणों के अनुसार, देवी बहुचरा माता ने एक राक्षस का वध किया था, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें किन्नर समाज की अधिष्ठात्री देवी का आशीर्वाद दिया।
  • विशेषता: इनकी पूजा में नाच-गाना और आशीर्वाद लेना एक महत्वपूर्ण रिवाज है।

देवी बहुचरा माता का प्रसिद्ध मंदिर

देवी बहुचरा माता का मुख्य मंदिर गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित है, जिसे बहुचराजी मंदिर या बहुचरा माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर किन्नर समाज के लिए एक प्रमुख तीर्थस्थल है और यहाँ हर साल हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

  • स्थान: यह मंदिर मेहसाणा शहर से लगभग 30 किलोमीटर दूर बेचराजी गाँव में स्थित है।
  • मंदिर का इतिहास: मान्यता है कि यह मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है और यहाँ देवी बहुचरा माता स्वयं प्रकट हुई थीं।
  • विशेष उत्सव: यहाँ हर साल चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के दौरान विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें किन्नर समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।

मंदिर की वास्तुकला और दर्शनीय स्थल

बहुचरा माता मंदिर गुजरात की पारंपरिक वास्तुकला का एक सुंदर उदाहरण है। मंदिर के गर्भगृह में देवी बहुचरा माता की मूर्ति स्थापित है, जिसके दर्शन मात्र से ही भक्तों को मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।

  • मूर्ति: देवी की मूर्ति चतुर्भुजी रूप में है, जिसमें वह त्रिशूल, खड्ग, शंख और चक्र धारण किए हुए हैं।
  • मंदिर परिसर: मंदिर के आसपास कई छोटे-छोटे मंदिर और तालाब हैं, जो इसकी शोभा को बढ़ाते हैं।
  • आस्था का केंद्र: यह मंदिर न केवल किन्नर समाज बल्कि सभी धर्मों के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है।

किन्नर समाज और देवी बहुचरा माता का विशेष संबंध

किन्नर समाज के लोग देवी बहुचरा माता को अपनी रक्षक और कुलदेवी मानते हैं। उनका मानना है कि देवी की कृपा से ही उन्हें समाज में सम्मान और स्वीकार्यता मिलती है।

  • परंपरा: किन्नर समाज के लोग विवाह, जन्म या किसी भी शुभ अवसर पर देवी बहुचरा माता के मंदिर में जाकर आशीर्वाद लेते हैं।
  • भक्ति गीत: देवी की पूजा में विशेष भक्ति गीत गाए जाते हैं, जिन्हें किन्नर समाज के लोग बड़ी श्रद्धा से गाते हैं।
  • सामाजिक एकता: यह मंदिर किन्नर समाज के लोगों के बीच एकता और भाईचारे का प्रतीक है।

निष्कर्ष

देवी बहुचरा माता किन्नर समाज की आराध्य देवी हैं और उनका मंदिर गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित है। यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। अगर आप भी देवी के दर्शन करना चाहते हैं, तो एक बार बहुचरा माता मंदिर जरूर जाएँ और इस पवित्र स्थान की शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करें।

जय बहुचरा माता!

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