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Sarva Pitru Amavasya 2025 तर्पण शुभ मुहूर्त और श्राद्ध कर्म

सर्वपितृ अमावस्या 2025 पर तर्पण का शुभ मुहूर्त जानें और अपने पितरों का श्राद्ध कर्म सही समय पर करके उन्हें मोक्ष दिलाएं। इस लेख में जानें किन लोगों को श्राद्ध करना चाहिए।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

सर्वपितृ अमावस्या 2025: पितृ तर्पण का पावन अवसर

हिंदू धर्म में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व है। यह वह दिन है जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करते हैं। 2025 में यह पावन दिन 22 सितंबर को मनाया जाएगा। इस लेख में जानिए शुभ मुहूर्त, तर्पण विधि और उन लोगों के बारे में जिन्हें विशेष रूप से श्राद्ध कर्म करना चाहिए।

Contents
सर्वपितृ अमावस्या 2025: पितृ तर्पण का पावन अवसरसर्वपितृ अमावस्या का महत्वपौराणिक आधारसर्वपितृ अमावस्या 2025 का शुभ मुहूर्तध्यान रखेंकिन लोगों को विशेष रूप से श्राद्ध करना चाहिए?विशेष निर्देशसरल तर्पण विधिमहत्वपूर्ण सावधानियाँपितृ दोष से मुक्ति के उपायनिष्कर्ष

सर्वपितृ अमावस्या का महत्व

पितृपक्ष की समाप्ति पर आने वाली इस अमावस्या को “महालय अमावस्या” भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया तर्पण सभी पितरों तक पहुँचता है, चाहे उनकी मृत्यु किसी भी तिथि को हुई हो।

  • इस दिन पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है
  • कुल परंपरा और ऋण से मुक्ति मिलती है
  • पितृ दोषों का शमन होता है

पौराणिक आधार

गरुड़ पुराण में कहा गया है – “यस्य तिथिर्न जानीता सर्वामावस्ययां तु सः” अर्थात जिन पितरों की तिथि ज्ञात न हो, उनका श्राद्ध इसी दिन किया जाता है।

सर्वपितृ अमावस्या 2025 का शुभ मुहूर्त

22 सितंबर 2025 के लिए प्रमुख समय निम्नलिखित हैं:

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 21 सितंबर रात 09:42 बजे
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 22 सितंबर रात 11:08 बजे
  • तर्पण शुभ मुहूर्त: प्रातः 05:58 से 09:42 तक (22 सितंबर)
  • कुतुप काल: 11:48 से 12:36 तक (सर्वोत्तम समय)

ध्यान रखें

दोपहर 12:36 के बाद तर्पण न करें। इस समय को “राहुकाल” माना जाता है जो श्राद्ध कर्म के लिए अशुभ है।

किन लोगों को विशेष रूप से श्राद्ध करना चाहिए?

निम्न स्थितियों में पितृ तर्पण अवश्य करें:

  • अकाल मृत्यु: दुर्घटना, आत्महत्या या हत्या से मरे परिजन
  • तिथि अज्ञात: जिन पितरों की मृत्यु तिथि याद न हो
  • संन्यासी पितर: जिन्होंने गृह त्याग दिया हो
  • नारी पितर: सास, नानी, दादी आदि
  • अपुत्र व्यक्ति: जिनके पुत्र नहीं हैं

विशेष निर्देश

यदि आपके पिता जीवित हैं तो दादा-परदादा का तर्पण करें। पिता के न रहने पर पितृ तर्पण का अधिकार प्राप्त होता है।

सरल तर्पण विधि

घर पर ही इस प्रकार करें पितृ तर्पण:

  • प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करें
  • तिल, जल, कुशा और फूल लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करें
  • इस मंत्र का उच्चारण करते हुए जल अर्पित करें:

    “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः, अद्य अमुकगोत्रस्य पितृ/मातृ/पितामह (संबंध बताएँ) अमुकशर्मणः प्रेतत्वनिवृत्त्यर्थं तर्पणमहं करिष्ये”

  • तर्पण के बाद पितरों को भोजन अर्पित करें
  • ब्राह्मण भोज कराएँ या गरीबों को अन्नदान दें

महत्वपूर्ण सावधानियाँ

  • तर्पण में काला तिल अवश्य प्रयोग करें
  • पितृ पक्ष में प्याज-लहसुन का सेवन वर्जित है
  • श्राद्ध का भोजन पीतल या पत्तल पर परोसें

पितृ दोष से मुक्ति के उपाय

यदि पितृ असंतुष्ट हों तो इन विशेष उपायों को करें:

  • गाय को हरा चारा व गुड़ खिलाएँ
  • पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएँ व दीपक जलाएँ
  • गरुड़ पुराण का पाठ करवाएँ
  • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें

निष्कर्ष

सर्वपितृ अमावस्या हमें अपने मूलों से जोड़ने वाला पावन पर्व है। 22 सितंबर 2025 को प्रातःकाल के शुभ मुहूर्त में तर्पण करके हम न केवल पितृ ऋण से मुक्त होते हैं, बल्कि उनका आशीर्वाद भी प्राप्त करते हैं। याद रखें, पितृ तृप्ति से ही कुल की उन्नति संभव है। इसलिए श्रद्धापूर्वक इस परंपरा का निर्वाहन अवश्य करें।

ॐ शांति: शांति: शांति:

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