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Kartik Purnima 2025: कार्तिक पूर्णिमा स्नान का महत्व और त्रिपुरारी पूर्णिमा

Published June 27, 2026
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Contents
कार्तिक पूर्णिमा 2025: पवित्र स्नान और त्रिपुरारी पूर्णिमा का महत्वकार्तिक पूर्णिमा स्नान का महत्वत्रिपुरारी पूर्णिमा क्यों कहते हैं?कार्तिक पूर्णिमा 2025 की तिथि और मुहूर्तपूजा विधि और आवश्यक सामग्रीकार्तिक पूर्णिमा से जुड़ी पौराणिक कथाएं1. भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार2. गंगा का पृथ्वी पर अवतरण3. ब्रह्मा जी द्वारा वेदों का पुनर्सृजनकार्तिक पूर्णिमा के विशेष उपायनिष्कर्ष

कार्तिक पूर्णिमा 2025: पवित्र स्नान और त्रिपुरारी पूर्णिमा का महत्व

हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष स्थान है। यह पर्व कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, जिसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है। 2025 में यह पर्व नवंबर माह में आएगा। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। आइए जानते हैं क्यों इस पूर्णिमा को माना जाता है इतना खास और क्या है इसके पीछे की पौराणिक कथा।

कार्तिक पूर्णिमा स्नान का महत्व

शास्त्रों में कार्तिक पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • पापों का नाश: इस दिन स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं
  • मोक्ष का मार्ग: पितृों को मोक्ष मिलता है और आत्मा शांति प्राप्त करती है
  • देवी-देवताओं की कृपा: भगवान विष्णु और शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है

त्रिपुरारी पूर्णिमा क्यों कहते हैं?

कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था। पौराणिक कथा के अनुसार:

त्रिपुरासुर ने ब्रह्मा जी से वरदान पाकर तीन पुर (लोह, स्वर्ण, रजत) बनाए थे जो आकाश में विचरण करते थे। उसके अत्याचारों से देवता भी भयभीत थे। अंत में भगवान शिव ने इस दिन एक बाण से तीनों पुरों को भस्म कर दिया। इस विजय के उपलक्ष्य में यह पर्व मनाया जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा 2025 की तिथि और मुहूर्त

2025 में कार्तिक पूर्णिमा 12 नवंबर, बुधवार को मनाई जाएगी।

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 11 नवंबर 2025 को रात 10:14 बजे
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 12 नवंबर 2025 को रात 08:26 बजे
  • स्नान का शुभ मुहूर्त: प्रातः 05:32 से 06:48 तक

पूजा विधि और आवश्यक सामग्री

कार्तिक पूर्णिमा की पूजा इस प्रकार करें:

  • प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • तुलसी के पास दीपक जलाएं
  • भगवान विष्णु या शिवजी की मूर्ति/चित्र स्थापित करें
  • निम्न मंत्र का जाप करें: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
  • गरीबों को अन्न, वस्त्र दान दें

कार्तिक पूर्णिमा से जुड़ी पौराणिक कथाएं

1. भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार

मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था और वेदों की रक्षा की थी।

2. गंगा का पृथ्वी पर अवतरण

कुछ मान्यताओं के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही गंगा नदी स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरी थी।

3. ब्रह्मा जी द्वारा वेदों का पुनर्सृजन

इस दिन ब्रह्मा जी ने प्रलय के बाद वेदों का पुनः सृजन किया था।

कार्तिक पूर्णिमा के विशेष उपाय

  • दीपदान: इस दिन 365 दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है
  • तुलसी विवाह: कार्तिक पूर्णिमा पर तुलसी और शालिग्राम का विवाह करने से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है
  • पितृ तर्पण: पितृों के निमित्त तर्पण करने से पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है

निष्कर्ष

कार्तिक पूर्णिमा एक ऐसा पावन पर्व है जो हमें आध्यात्मिक शुद्धि, पितृ ऋण से मुक्ति और देव कृपा प्राप्ति का अद्भुत अवसर प्रदान करता है। 2025 में इस पर्व को 12 नवंबर को मनाएं और पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य तथा भगवान की भक्ति करके जीवन को धन्य बनाएं। याद रखें, “जल में डूबो तन, भक्ति में डूबो मन” – यही है कार्तिक पूर्णिमा का सच्चा संदेश।

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