Margashirsha Maas 2025: शुरू हुआ अगहन का महीना, इन तिथियों में न करें ये काम
हिंदू पंचांग का नौवां महीना मार्गशीर्ष मास या अगहन मास आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। वर्ष 2025 में यह महीना 23 नवंबर से 22 दिसंबर तक रहेगा। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण की उपासना, दान-पुण्य और व्रतों का विशेष महत्व है, लेकिन कुछ तिथियों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। आइए जानें इस पावन मास की महिमा और वर्जित कर्मों के बारे में।
मार्गशीर्ष मास का धार्मिक महत्व
श्रीमद्भागवत गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं – “मासानां मार्गशीर्षोऽहम्” (अध्याय 10, श्लोक 35), यानी “मैं महीनों में मार्गशीर्ष हूं।” इस महीने की विशेषताएं:
- प्रातःकाल गंगा स्नान से सभी पापों का नाश
- तुलसी पूजन और दीपदान का विशेष फल
- मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी (मोक्षदा एकादशी) पर गीता जयंती का पर्व
- श्रीकृष्ण को अर्पित करने वाले तुलसी दल से मिलता है मोक्ष
2025 में मार्गशीर्ष मास की प्रमुख तिथियां
- प्रारंभ: 23 नवंबर 2025 (रविवार)
- मार्गशीर्ष अमावस्या: 22 दिसंबर 2025 (सोमवार)
- मोक्षदा एकादशी: 13 दिसंबर 2025 (शनिवार)
- दत्तात्रेय जयंती: 14 दिसंबर 2025 (रविवार)
इन तिथियों में बचें इन कार्यों से
1. मार्गशीर्ष अमावस्या (22 दिसंबर 2025)
अमावस्या तिथि पर ये कार्य वर्जित हैं:
- धन लेन-देन: इस दिन कर्ज लेना या देना धन हानि का कारण बन सकता है
- वृक्षारोपण: नए पौधे लगाने से वंश वृद्धि में बाधा आती है
- मांगलिक कार्य: विवाह, गृहप्रवेश जैसे शुभ कार्य न करें
2. कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (5 दिसंबर 2025)
इस दिन यमराज की पूजा होती है, अतः:
- यात्रा न करें: विशेषकर दक्षिण दिशा की यात्रा अशुभ
- तेल मालिश न करें: इससे आयु घटने का भय
- क्रोध न करें: पारिवारिक कलह से बचें
3. मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी (30 नवंबर 2025)
इस दिन भैरव जयंती है, किन्तु:
- मांस-मदिरा सेवन वर्जित: ऐसा करने से कुल देवता नाराज होते हैं
- रात्रि जागरण न करें: अशुभ शक्तियों का प्रभाव बढ़ सकता है
मार्गशीर्ष मास में करें ये शुभ कार्य
1. प्रातःकाल स्नान और संध्या वंदन
इस माह ठंडे जल से स्नान कर “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जाप करें। संध्या समय दीपक जलाकर इस श्लोक का पाठ करें:
“कराग्रे वसते लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा, प्रभाते करदर्शनम्॥”
2. तुलसी पूजन और दान
- तुलसी के नीचे घी का दीपक जलाएं
- गुड़ और काले तिल का दान करें
- गीता पाठ या “विष्णु सहस्रनाम” का पाठ करें
3. मोक्षदा एकादशी व्रत (13 दिसंबर 2025)
इस दिन उपवास रखकर श्रीकृष्ण की पूजा करें। गीता जयंती के अवसर पर:
- गीता के 18वें अध्याय का पाठ करें
- पीले वस्त्र और फलों का दान करें
- रात्रि में कीर्तन या भजन संध्या आयोजित करें
सावधानी: इन गलतियों से बचें
- सूर्योदय से पहले सोना: इससे आरोग्य हानि होती है
- कांस्य पात्र में भोजन: ताम्बे या पीतल के बर्तनों का उपयोग करें
- वस्त्र धोकर सूखाना: गीले कपड़े पहनने से रोगों का भय
निष्कर्ष
मार्गशीर्ष मास 2025 में भक्ति और सावधानी का संयम रखें। 23 नवंबर से 22 दिसंबर तक विशेष तिथियों में वर्जित कर्मों से बचकर ही पुण्य प्राप्त करें। प्रतिदिन तुलसी पूजन, गंगाजल का स्पर्श और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करने से इस माह का पूरा लाभ मिलेगा। ध्यान रखें – जो इस माह श्रीहरि की आराधना करता है, उसका धन और वंश दोनों सुरक्षित रहते हैं।
