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Maa Siddhidatri Aarti: महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की आरती से पूरी हों मनोकामनाएं

महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की आरती करें और सभी मनोकामनाएं पूरी करें। जानिए आरती के मंत्र, विधि और महत्व। सिद्धियां प्राप्त करने का सरल उपाय।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

मां सिद्धिदात्री आरती: महानवमी पर करें पूजा, पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं

नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा-आरती का विशेष महत्व है। यह दिन भक्तों के लिए अंतिम और सबसे पवित्र अवसर होता है, जब मां दुर्गा के नौवें स्वरूप की उपासना से सभी प्रकार की सिद्धियाँ और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस लेख में जानिए मां सिद्धिदात्री की आरती, उनकी कथा, पूजा विधि और महत्वपूर्ण मंत्रों के बारे में।

Contents
मां सिद्धिदात्री आरती: महानवमी पर करें पूजा, पूरी होंगी सभी मनोकामनाएंमां सिद्धिदात्री का स्वरूप और महत्वमहानवमी पर मां सिद्धिदात्री की आरतीपूजा विधि और आवश्यक सामग्रीमां सिद्धिदात्री की कथामहानवमी पर विशेष उपायमां सिद्धिदात्री के प्रमुख मंत्रनिष्कर्ष: मां की कृपा पाने का पावन अवसर

मां सिद्धिदात्री का स्वरूप और महत्व

मां सिद्धिदात्री दुर्गा का नौवां और अंतिम रूप हैं। इनकी चार भुजाएँ हैं और ये कमल के आसन पर विराजमान हैं। इनके हाथों में गदा, चक्र, शंख और कमल होता है। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान करने वाली मानी जाती हैं।

  • नाम की व्याख्या: “सिद्धि” अर्थात पूर्णता और “दात्री” अर्थात देने वाली।
  • विशेषता: इनकी कृपा से भक्त को अष्टसिद्धियाँ और नवनिधियाँ प्राप्त होती हैं।
  • प्रतीकवाद: कमल का फूल शुद्धता और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है।

महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की आरती

महानवमी के दिन इस आरती को पूरे विधि-विधान से करने पर मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है:

जय सिद्धिदात्री माता, मैया जय सिद्धिदात्री माता।
अष्ट सिद्धि दायिनी शुभ दाता, ब्रह्मा विष्णु सदा शिव ध्याता॥

कमल गदा धारिणी माता, शंख चक्र वरदाता।
सुख समृद्धि देने वाली, ज्ञान भक्ति प्रदाता॥

नवरात्रि की नवम देवी, भक्तन की सुखदेवी।
मनवांछित फल दाता, दुःख दारिद्र नाशो माता॥

जय सिद्धिदात्री माता, मैया जय सिद्धिदात्री माता॥

पूजा विधि और आवश्यक सामग्री

मां सिद्धिदात्री की पूजा करने के लिए इस विधि का पालन करें:

  • सुबह स्नान: पवित्र नदी या घर पर स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  • कलश स्थापना: मिट्टी के कलश पर लाल कपड़ा बांधकर उसे जल से भरें।
  • घटस्थापना मंत्र: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” बोलते हुए कलश स्थापित करें।
  • पूजा सामग्री: लाल फूल, कुमकुम, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य (मीठा भोग)।
  • आरती का समय: सुबह 6-8 बजे या शाम 6-8 बजे (सुनिश्चित करें कि यह संध्या काल में हो)।

मां सिद्धिदात्री की कथा

पुराणों के अनुसार, मां सिद्धिदात्री की उपासना से भगवान शिव ने अर्धनारीश्वर का रूप धारण किया था। मान्यता है कि इनकी कृपा से:

  • भगवान शिव को सभी सिद्धियाँ प्राप्त हुईं।
  • मार्कण्डेय ऋषि ने अमरत्व प्राप्त किया।
  • देवी सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में पुनः जीवन पाया।

महानवमी पर विशेष उपाय

इस दिन ये उपाय करने से मां की कृपा सदैव बनी रहती है:

  • कन्या पूजन: नौ कन्याओं को भोजन कराएं और उनके पैर धोकर आशीर्वाद लें।
  • जप और ध्यान: “ॐ ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
  • दान का महत्व: गरीबों को हलवा-पूरी का भोजन या लाल वस्त्र दान करें।

मां सिद्धिदात्री के प्रमुख मंत्र

इन मंत्रों का जाप करने से आध्यात्मिक और भौतिक सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं:

1. बीज मंत्र: "ॐ ह्रीं क्लीं सिद्धये नमः"
2. ध्यान मंत्र: "वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
   कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धिदात्री यशस्विनीम्॥"
3. स्तोत्र: "या देवी सर्वभूतेषु सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता..."

निष्कर्ष: मां की कृपा पाने का पावन अवसर

महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की आरती करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। यह दिन आध्यात्मिक उन्नति और भौतिक सुखों का संगम है। मां का आशीर्वाद पाने के लिए पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से इस पूजा को करें।

आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं! मां सिद्धिदात्री आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें।

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