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Krishna Janmashtami 2025 Date कृष्ण जन्माष्टमी कब है तिथि मुहूर्त पूजा विधि

Published June 27, 2026
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4 Min Read

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Contents
कृष्ण जन्माष्टमी 2025: भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की पूर्ण तैयारीकृष्ण जन्माष्टमी 2025 की तिथि और मुहूर्तमुख्य तिथियाँविशेष समय सारणीजन्माष्टमी पूजा विधि: सात्विक उपासना का मार्गपूर्व तैयारीमुख्य पूजन प्रक्रियामंत्रों का महत्वजन्माष्टमी का धार्मिक महत्वपौराणिक आधारआध्यात्मिक संदेशजन्माष्टमी व्रत के नियमक्या करेंक्या न करेंविशेष उत्सव: दही हांडी की परंपरादही हांडी के नियमजन्माष्टमी पर विशेष प्रसाद56 भोग का महत्वनिष्कर्ष: आनंद का अवसर

कृष्ण जन्माष्टमी 2025: भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की पूर्ण तैयारी

जन्माष्टमी का पावन पर्व हर साल भक्तों के हृदय में नई आशा और आनंद भर देता है। यह वह दिवस है जब मथुरा के कारागार में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। 2025 में यह पर्व 26 अगस्त, मंगलवार को मनाया जाएगा। आइए जानें इसकी तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और आध्यात्मिक महत्व…

कृष्ण जन्माष्टमी 2025 की तिथि और मुहूर्त

मुख्य तिथियाँ

  • जन्माष्टमी तिथि: 26 अगस्त 2025 (मंगलवार)
  • निशीथ पूजा मुहूर्त: रात 12:07 से 12:48 तक (27 अगस्त की मध्यरात्रि)
  • रोहिणी नक्षत्र: 25 अगस्त शाम 6:32 से 26 अगस्त रात 8:45 तक

विशेष समय सारणी

  • दिनांक: 26 अगस्त 2025
  • अष्टमी तिथि आरंभ: 25 अगस्त रात 9:24 बजे
  • अष्टमी तिथि समाप्त: 26 अगस्त रात 10:17 बजे

जन्माष्टमी पूजा विधि: सात्विक उपासना का मार्ग

पूर्व तैयारी

  • प्रात:काल स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें
  • घर के मंदिर/पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
  • कृष्ण जी की मूर्ति या चित्र को नए वस्त्रों से सजाएं

मुख्य पूजन प्रक्रिया

  • पंचामृत स्नान: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक
  • वस्त्र एवं आभूषण: पीतांबर वस्त्र और मोरपंख अर्पित करें
  • माखन-मिश्री: भोग में 56 भोग या साधारण माखन अर्पित करें

मंत्रों का महत्व

इन मंत्रों का जाप करें:

  • दामोदराष्टकम्: “विद्युद्दामाबरं वंदे…”
  • कृष्ण गायत्री मंत्र: “ॐ देवकीनंदनाय विद्महे…”

जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व

पौराणिक आधार

भविष्य पुराण के अनुसार, भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय भगवान कृष्ण ने अवतार लिया था। यह तिथि केवल एक जन्मदिन नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।

आध्यात्मिक संदेश

  • अंधकार में प्रकाश की स्थापना
  • महासागर की तरह गहन जीवन दर्शन
  • भक्ति और कर्म का समन्वय

जन्माष्टमी व्रत के नियम

क्या करें

  • फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करें
  • श्रीमद्भागवत कथा या कीर्तन सुनें
  • गौ-सेवा या दान का विशेष महत्व

क्या न करें

  • प्याज-लहसुन का सेवन वर्जित
  • क्रोध या नकारात्मक विचारों से बचें
  • अनावश्यक वार्तालाप न करें

विशेष उत्सव: दही हांडी की परंपरा

महाराष्ट्र और गुजरात में “दही हांडी” का आयोजन विशेष रूप से किया जाता है। यह कृष्ण के बाललीलाओं की याद दिलाता है जब वे गोपियों के मटकी तोड़कर माखन चुराया करते थे। 2025 में यह कार्यक्रम 27 अगस्त को मनाया जाएगा।

दही हांडी के नियम

  • मटकी की ऊँचाई न्यूनतम 20 फीट रखी जाती है
  • हांडी तोड़ने वाले समूह को “गोविंदा” कहते हैं
  • पारंपरिक गीत: “गोविंदा आला रे आला…”

जन्माष्टमी पर विशेष प्रसाद

56 भोग का महत्व

श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर 7 दिनों तक 8-8 भोग ग्रहण किए थे, इसीलिए 56 भोग चढ़ाने की परंपरा है। सामान्य परिवार इनमें से कुछ ही बना सकते हैं:

  • माखन-मिश्री: बालगोपाल का प्रिय भोग
  • पंचामृत: पवित्र मिश्रण
  • मोहनभोग: बेसन के लड्डू

निष्कर्ष: आनंद का अवसर

कृष्ण जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि हमारे अंदर के आनंद और प्रेम को जगाने का अवसर है। 26 अगस्त 2025 को इस पर्व को पूरी श्रद्धा से मनाकर हम अपने जीवन में कृष्ण के दिव्य प्रेम को उतार सकते हैं। हरि ओम तत्सत!

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