MSHBMSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
Reading: गरुड़ पुराण में रात्रि शव जलाना वर्जित पर इन 3 महाश्मशानों में 24 घंटे अंतिम संस्कार
Share
Notification Show More
MSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
© 2024 MSHB.in. All Rights Reserved.

गरुड़ पुराण में रात्रि शव जलाना वर्जित पर इन 3 महाश्मशानों में 24 घंटे अंतिम संस्कार

Published June 27, 2026
Share
5 Min Read

“`html

Contents
गरुड़ पुराण में रात्रि में शव जलाना वर्जित, लेकिन इन तीन महाश्मशानों में 24 घंटे होता है अंतिम संस्कारप्रस्तावना: रात्रि में अंतिम संस्कार का निषेध और अपवादगरुड़ पुराण का नियम: रात्रि में शव दाह क्यों वर्जित?तीन पवित्र श्मशान जहाँ रात्रि में भी होता है अंतिम संस्कार1. काशी विश्वनाथ का मणिकर्णिका घाट2. उज्जैन का महाकाल श्मशान3. त्रयंबकेश्वर का ब्रह्मा घाटवैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारणनिष्कर्ष: शास्त्र और स्थान-विशेष की महिमा

गरुड़ पुराण में रात्रि में शव जलाना वर्जित, लेकिन इन तीन महाश्मशानों में 24 घंटे होता है अंतिम संस्कार

प्रस्तावना: रात्रि में अंतिम संस्कार का निषेध और अपवाद

हिंदू धर्मशास्त्रों में, विशेषकर गरुड़ पुराण में, रात्रि के समय शव दाह संस्कार करने को वर्जित माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, सूर्यास्त के बाद की गई अंत्येष्टि क्रिया पितृदोष और अशुभ फलों को जन्म देती है। लेकिन भारत के तीन पवित्र महाश्मशान ऐसे हैं जहाँ 24 घंटे अंतिम संस्कार की परंपरा सदियों से चली आ रही है। ये हैं – काशी का मणिकर्णिका घाट, उज्जैन का महाकाल श्मशान और त्रयंबकेश्वर का ब्रह्मा घाट। आइए जानते हैं कि क्यों यहाँ अपवाद स्वीकार किया गया है।

गरुड़ पुराण का नियम: रात्रि में शव दाह क्यों वर्जित?

गरुड़ पुराण के अध्याय 15 में स्पष्ट उल्लेख है:

“निशायां दह्यते यस्तु शवः प्रेतत्वमाप्नुयात्।
अकाले दह्यमानस्य नरकं प्रतिपद्यते॥”

अर्थात्, रात्रि में जलाए गए शव की आत्मा प्रेत योनि को प्राप्त होती है और असमय दाह करने वाले को नरक भोगना पड़ता है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं:

  • सूर्य की अनुपस्थिति: अग्नि देवता और सूर्य का संबंध माना जाता है। रात्रि में सूर्य ऊर्जा का अभाव आत्मा की मुक्ति में बाधक है।
  • तामसिक प्रभाव: रात्रि को तमोगुण प्रधान समय माना जाता है, जो आत्मा के लिए भटकाव पैदा कर सकता है।
  • मन्त्रों की शक्ति: दिन के उजाले में वैदिक मन्त्रों का पूर्ण प्रभाव रहता है।

तीन पवित्र श्मशान जहाँ रात्रि में भी होता है अंतिम संस्कार

1. काशी विश्वनाथ का मणिकर्णिका घाट

काशी को मोक्ष नगरी कहा जाता है। यहाँ मणिकर्णिका घाट पर शिव स्वयं तारक मन्त्र का उपदेश देते हैं। मान्यता है कि इस स्थान पर:

  • मृत्यु के समय भगवान विश्वनाथ जीवात्मा को मोक्ष मार्ग दिखाते हैं।
  • यहाँ अग्नि को कालाग्नि रुद्र का स्वरूप माना जाता है जो रात-दिन समान रूप से शक्तिशाली है।
  • स्कन्द पुराण में वर्णित है: “काश्यां मरणान्मुक्तिः” – काशी में मृत्यु ही मुक्ति है।

2. उज्जैन का महाकाल श्मशान

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के समीप स्थित इस श्मशान को भस्माचल कहते हैं। यहाँ की विशेषताएँ:

  • यहाँ अविमुक्त क्षेत्र होने के कारण शिव स्वयं प्रेतसंहारक रूप में विराजमान हैं।
  • रात्रि में भी यहाँ कपाली क्रिया (कपाल मोक्ष) होती है क्योंकि शिव रात्रि को भी जागृत रहते हैं।
  • श्मशान में स्थित धुंधीराज गणेश की प्रतिमा नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती है।

3. त्रयंबकेश्वर का ब्रह्मा घाट

नासिक के निकट गोदावरी तट पर स्थित यह घाट त्रिदेवों की तपोभूमि माना जाता है। इसका रहस्य:

  • यहाँ ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों ने तपस्या की थी, इसलिए इस स्थान पर काल-भेद (समय का भेद) नहीं माना जाता।
  • गोदावरी नदी को दक्षिण की गंगा कहा जाता है जो रात्रि में भी पवित्रता बनाए रखती है।
  • यहाँ के पुरोहित गायत्री मन्त्र का विशेष अनुष्ठान कर 24 घंटे दाह संस्कार करते हैं।

वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण

इन तीनों स्थानों पर रात्रि में दाह की अनुमति देने के पीछे गहरे तर्क हैं:

  • ज्योतिर्लिंगों की विशेष ऊर्जा: ये सभी स्थान ज्योतिर्लिंगों से जुड़े हैं जहाँ दिव्य प्रकाश सतत विद्यमान रहता है।
  • नदियों की भूमिका: गंगा, क्षिप्रा और गोदावरी का जल यहाँ अमृत तत्व धारण करता है जो नकारात्मक प्रभावों को नष्ट कर देता है।
  • तांत्रिक सिद्धियाँ: इन श्मशानों में सिद्ध महात्मा सतत साधना करते हैं जो वातावरण को शुद्ध रखती है।

निष्कर्ष: शास्त्र और स्थान-विशेष की महिमा

हिंदू धर्म में स्थान और परिस्थिति के अनुसार नियमों में लचीलापन देखने को मिलता है। जहाँ सामान्यतः गरुड़ पुराण के नियमों का पालन आवश्यक है, वहीं इन तीन दिव्य स्थानों पर भगवान की विशेष कृपा से 24 घंटे अंतिम संस्कार की परंपरा चली आ रही है। ये श्मशान न केवल मोक्ष प्रदान करते हैं बल्कि हमें जीवन-मृत्यु के चक्र से परे की दिव्य अनुभूति कराते हैं।

इसलिए जब भी आप इन पावन स्थलों पर जाएँ, तो इनकी पवित्रता को समझें और यहाँ की अनूठी परंपराओं के प्रति श्रद्धा रखें। हर हर महादेव!

“`

You Might Also Like

विश्वकर्मा पूजा विशेष भगवान विश्वकर्मा की पूजा के लाभ

“अपार धन देती है यह एकादशी जानें व्रत विधि और कथा”

Krishna Janmashtami 2025 भगवान कृष्ण की जन्म कथा वासुदेव की कहानी

Sheetala Ashtami 2025: जानिए कब है शीतला अष्टमी व्रत क्या है व्रत विधि

Mahamrityunjaya Mantra: महत्व जाप समय और सावधानियां

Share

Latest News

भगवान गणेश को बुधवार को दूर्वा क्यों चढ़ाते हैं? जानें रोचक कथा
Religion Spirituality June 27, 2026
Somwar Mantra Jaap Bhagwan Bholenath Ki Kripa Ke Liye
Religion Spirituality June 27, 2026
Guru Gobind Singh Jayanti 2025 सवा लाख से एक लड़ाऊँ
Religion Spirituality June 27, 2026
वेदों का विज्ञान आज के विज्ञान से श्रेष्ठ है
Religion Spirituality June 27, 2026

You Might also Like

Vinayak Chaturthi December 2025 विनायक चतुर्थी पूजा मुहूर्त व्रत विधि महत्व

June 27, 2026

सांपों की ये बातें जानकर हैरान रह जाएंगे | Amazing Snake Facts

June 27, 2026

Krishna Janmashtami 2025 Date कृष्ण जन्माष्टमी कब है तिथि मुहूर्त पूजा विधि

June 27, 2026
MshbMshb

MSHB.in is your reliable source for the latest news in Government Schemes, Sarkari Yojana, Govt Jobs, Spirituality, lifestyle, and more.

Quick Link

  • MSHB.IN
  • About Us
  • Blogs
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • My Bookmarks
  • Contact Us

Category

  • Religion
  • Latest News
  • Sarkari Yojana

Recent Post

  • “अपार धन देती है यह एकादशी जानें व्रत विधि और कथा”
  • गरुड़ पुराण में रात्रि शव जलाना वर्जित पर इन 3 महाश्मशानों में 24 घंटे अंतिम संस्कार
  • विश्वकर्मा पूजा विशेष भगवान विश्वकर्मा की पूजा के लाभ
© 2025 MSHB. All Rights Reserved. | Website Designed By Dinox Tech
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?