दिवाली 2025: लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान
दिवाली का पावन पर्व न केवल घरों को दीपों से सजाने का समय है, बल्कि माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा पाने का भी सुनहरा अवसर है। इस शुभ अवसर पर अधिकतर परिवार लक्ष्मी-गणेश जी की नई मूर्तियाँ घर लाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मूर्ति चयन के समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना आवश्यक है? आइए जानते हैं कि दिवाली 2025 में कैसे चुनें सही मूर्ति और किन नियमों का पालन करें।
मूर्ति चयन का आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, मूर्ति केवल पूजा की वस्तु नहीं बल्कि देवी-देवताओं का साक्षात् स्वरूप होती है। लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति घर में स्थापित करने से पहले निम्न बातों का विशेष ध्यान रखें:
- शुभ मुद्रा: लक्ष्मी जी की मूर्ति में उनका आशीर्वाद देने वाली (वरद) मुद्रा होनी चाहिए
- गणेश जी का स्वरूप: उनका वाहन मूषक साथ में अवश्य दिखाई देना चाहिए
- सामग्री: मिट्टी, पीतल या चांदी की मूर्तियाँ शुभ मानी जाती हैं
मूर्ति खरीदते समय ध्यान रखने योग्य प्रमुख बातें
1. सही आकार और अनुपात
शास्त्रों के अनुसार, लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्तियों का आकार संतुलित होना चाहिए। गणेश जी की मूर्ति लक्ष्मी जी से बड़ी नहीं होनी चाहिए। आदर्श अनुपात है:
- लक्ष्मी जी की मूर्ति: 5 से 9 इंच ऊँची
- गणेश जी की मूर्ति: 3 से 7 इंच ऊँची
- दोनों की मूर्तियाँ एक ही आधार पर हो तो और भी शुभ
2. सामग्री का चयन
मूर्ति की सामग्री पर विशेष ध्यान दें:
- मिट्टी की मूर्तियाँ: सबसे शुभ, पर्यावरण के अनुकूल और प्राचीन परंपरा के अनुरूप
- धातु की मूर्तियाँ: पीतल, कांस्य या चांदी उत्तम, लेकिन लोहे या स्टील से बचें
- प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP):b> अशुभ मानी जाती है, जल प्रदूषण का कारण बनती है
3. मूर्ति के प्रतीक और विवरण
मूर्ति में निम्न प्रतीकों की उपस्थिति शुभ मानी जाती है:
- लक्ष्मी जी के हाथों में कमल, सोने के सिक्के और आशीर्वाद मुद्रा
- गणेश जी का टूटा दाँत, मोदक और अंकुश
- दोनों के चेहरे पर प्रसन्नता और शांति का भाव
वास्तु दोष से बचने के उपाय
मूर्ति स्थापना से पहले वास्तु के इन नियमों का पालन अवश्य करें:
1. सही दिशा में स्थापना
- पूजा स्थल उत्तर या पूर्व दिशा में हो
- मूर्तियाँ कभी भी दक्षिण दिशा की ओर मुख करके न रखें
- मंदिर की स्थापना दीवार से सटाकर न करें
2. अशुभ संकेतों से बचाव
निम्न स्थितियों में मूर्ति न खरीदें:
- टूटी-फूटी या दोषपूर्ण मूर्तियाँ
- किसी भी देवता का क्रोधित स्वरूप
- अनुपयुक्त रंगों वाली मूर्तियाँ (जैसे काला या लाल गणेश)
मूर्ति स्थापना के शुभ मुहूर्त (दिवाली 2025)
दिवाली 2025 में मूर्ति स्थापना के लिए इन तिथियों और समय को प्राथमिकता दें:
- मुख्य दिवाली: 21 अक्टूबर 2025 (बुधवार) – प्रदोष काल शाम 5:30 से 8:00 बजे तक
- धनतेरस: 19 अक्टूबर 2025 – शाम 6:15 से 7:45 बजे तक
- गोवर्धन पूजा: 22 अक्टूबर 2025 – सुबह 6:30 से 8:30 बजे तक
मूर्ति विसर्जन के नियम
पुरानी मूर्तियों का विसर्जन करते समय इन बातों का ध्यान रखें:
- मिट्टी की मूर्तियों को किसी पवित्र नदी या जलाशय में विसर्जित करें
- धातु की मूर्तियों को घर के मंदिर में ही रखें या किसी जानकार पंडित को दान दें
- कभी भी मूर्तियों को कूड़े में न फेंके
निष्कर्ष
दिवाली 2025 में लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय उपरोक्त बातों का ध्यान रखकर आप न केवल धार्मिक नियमों का पालन करेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देंगे। याद रखें, सच्ची भक्ति और श्रद्धा ही सबसे बड़ी पूजा है। माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश आपके घर में सुख, समृद्धि और बुद्धि का आशीर्वाद लेकर आएँ!
