हरतालिका तीज 2025: व्रत विधि, महत्व और पूजा का शुभ मुहूर्त
हिन्दू धर्म में हरतालिका तीज का विशेष महत्व है। यह व्रत सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देने वाला माना जाता है। 2025 में यह पर्व कल मनाया जाएगा। आइए जानते हैं इसकी पूजन विधि, व्रत कथा और उन आध्यात्मिक लाभों के बारे में जो इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से प्राप्त होते हैं।
हरतालिका तीज का धार्मिक महत्व
यह तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी।
तीज व्रत के प्रमुख लाभ
- सौभाग्यवती स्त्रियों को अखंड सुहाग का आशीर्वाद
- वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति
- संतान सुख और पारिवारिक समृद्धि
- कष्टों से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति
हरतालिका तीज 2025 का शुभ मुहूर्त
तृतीया तिथि प्रारंभ: 28 अगस्त 2025, सुबह 08:15 बजे
तृतीया तिथि समाप्त: 29 अगस्त 2025, सुबह 10:25 बजे
व्रत का दिन: 28 अगस्त 2025 (गुरुवार)
पूजा का श्रेष्ठ समय
प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
हरतालिका तीज व्रत विधि
व्रत की तैयारी
- सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें
- साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें (लाल या पीले रंग को शुभ माना जाता है)
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
- मिट्टी या गेरू से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाएं
पूजन विधि
- कलश स्थापित कर उसमें गंगाजल भरें
- शिवलिंग पर धतूरा, बेलपत्र और दूध चढ़ाएं
- माता पार्वती को सिंदूर, मेहंदी, चूड़ी अर्पित करें
- नीचे दिए मंत्र का जाप करें:
मंत्र:
“ॐ नमः शिवायै गौर्यै सुभगायै सुखप्रदायै धनधान्य प्रदायै स्वाहा”
कथा श्रवण
पूजा के बाद हरतालिका तीज व्रत कथा का श्रवण या पाठ अवश्य करें। यह कथा माता पार्वती के तप और भगवान शिव के विवाह से जुड़ी है।
व्रत में क्या करें और क्या न करें
क्या करें
- पूरे दिन निर्जला व्रत रखने का विधान है
- रात्रि में जागरण कर भजन-कीर्तन करें
- अगले दिन सुबह ब्राह्मण को भोजन कराकर दान दें
क्या न करें
- व्रत के दिन नमक का सेवन वर्जित है
- किसी भी प्रकार का अन्न ग्रहण न करें
- क्रोध या नकारात्मक विचारों से बचें
हरतालिका तीज का पारंपरिक भोग
व्रत के अगले दिन निम्न व्यंजनों का भोग लगाएं:
- फलाहार: केला, सेब, नारियल
- मिठाई: गुड़ के लड्डू, खीर
- विशेष: साबूदाना खिचड़ी, सिंघाड़े का हलवा
हरतालिका तीज की विशेष बातें
इस व्रत में मेहंदी लगाने की विशेष परंपरा है। सुहागिनें हाथों में मेहंदी सजाती हैं और निम्न मंत्र बोलती हैं:
मंत्र:
“मेहंदी हस्त सुशोभिते, शिव पार्वती प्रीतये।
यथा त्वं रक्तरूपेण, तथा मां पालय प्रभो।”
निष्कर्ष
हरतालिका तीज का व्रत अखंड सुहाग और पारिवारिक सुख का प्रतीक है। इस लेख में बताई गई विधि से व्रत रखकर आप भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त कर सकती हैं। याद रखें, श्रद्धा और विश्वास से किया गया हर छोटा प्रयास भी दिव्य फल देता है।
आप सभी को हरतालिका तीज 2025 की हार्दिक शुभकामनाएं! माँ पार्वती आपके वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाएं।
