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Bhadli Navami 2025: भड़ली नवमी पूजा मुहूर्त और विवाह महत्व

भड़ली नवमी 2025 का पूजा मुहूर्त और विवाह से जुड़ा धार्मिक महत्व जानें। आज के शुभ अवसर पर सही विधि से पूजा करके सौभाग्य और सुखद वैवाहिक जीवन पाएं।

Published October 31, 2026
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5 Min Read

Bhadli Navami 2025: आज है भड़ली नवमी, जानें पूजा का मुहूर्त और विवाह से जुड़ा धार्मिक महत्व

भारतीय संस्कृति में त्योहारों और व्रतों का विशेष महत्व है। इन्हीं पावन पर्वों में से एक है भड़ली नवमी, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। यह पर्व विशेष रूप से विवाहित महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए फलदायी माना जाता है। आइए, जानते हैं इस वर्ष भड़ली नवमी की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और इससे जुड़े धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से।

Contents
Bhadli Navami 2025: आज है भड़ली नवमी, जानें पूजा का मुहूर्त और विवाह से जुड़ा धार्मिक महत्वभड़ली नवमी क्या है?भड़ली नवमी का धार्मिक महत्वBhadli Navami 2025: पूजा का शुभ मुहूर्तपूजन सामग्रीभड़ली नवमी पूजन विधिविशेष उपायभड़ली नवमी और विवाह का संबंधकथा प्रसंगभड़ली नवमी के अन्य लाभनिष्कर्ष

भड़ली नवमी क्या है?

भड़ली नवमी हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन माता दुर्गा के भद्रकाली रूप की पूजा की जाती है, जो शुभता और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाली मानी जाती हैं। यह पर्व मुख्य रूप से उत्तर भारत, विशेषकर राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

भड़ली नवमी का धार्मिक महत्व

  • इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं।
  • कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने की कामना से इस व्रत को करती हैं।
  • मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से माता भद्रकाली प्रसन्न होकर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

Bhadli Navami 2025: पूजा का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष भड़ली नवमी 20 अगस्त 2025, बुधवार को मनाई जाएगी। पूजन के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:

  • नवमी तिथि प्रारंभ: 19 अगस्त 2025 को रात 08:14 बजे से
  • नवमी तिथि समाप्त: 20 अगस्त 2025 को रात 09:32 बजे तक
  • पूजा का शुभ समय: प्रातः 06:00 बजे से 10:00 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:45 बजे से 12:30 बजे तक (विशेष फलदायी)

पूजन सामग्री

  • माता भद्रकाली की प्रतिमा या चित्र
  • लाल वस्त्र, फूल, अक्षत, कुमकुम
  • दीपक, घी, धूप, अगरबत्ती
  • मिष्ठान (मीठे व्यंजन)
  • सुपारी, नारियल, पान के पत्ते

भड़ली नवमी पूजन विधि

भड़ली नवमी के दिन निम्नलिखित विधि से पूजन करने से अधिक फल की प्राप्ति होती है:

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और लाल कपड़ा बिछाएं।
  3. माता भद्रकाली की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  4. दीपक जलाकर धूप-दीप से आरती करें।
  5. निम्न मंत्र का उच्चारण करें: “ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥”
  6. माता को मिष्ठान का भोग लगाएं और प्रसाद वितरित करें।
  7. कथा सुनने के बाद आरती करें और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करें।

विशेष उपाय

  • अगर विवाह में बाधा आ रही हो तो इस दिन हल्दी की गांठ माता को अर्पित करें।
  • वैवाहिक जीवन में सुख चाहने वाली महिलाएं सिंदूर चढ़ाएं।
  • संतान प्राप्ति की कामना से नारियल का भोग लगाएं।

भड़ली नवमी और विवाह का संबंध

भड़ली नवमी का विवाह से गहरा संबंध माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से:

  • विवाह में आ रही सभी बाधाएं दूर होती हैं।
  • कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है।
  • विवाहित जोड़ों के बीच प्रेम और सद्भाव बढ़ता है।
  • पारिवारिक कलह समाप्त होती है।

कथा प्रसंग

पौराणिक कथा के अनुसार, एक गरीब ब्राह्मण कन्या ने भड़ली नवमी का व्रत रखकर माता भद्रकाली की आराधना की थी। प्रसन्न होकर माता ने उसे सुयोग्य वर प्रदान किया और धन-धान्य से संपन्न किया। तभी से यह मान्यता प्रचलित हुई कि इस व्रत से सुयोग्य वर और सुखद वैवाहिक जीवन की प्राप्ति होती है।

भड़ली नवमी के अन्य लाभ

  • संतान सुख: संतान से जुड़ी समस्याओं का निवारण
  • धन लाभ: आर्थिक समृद्धि में वृद्धि
  • स्वास्थ्य: पारिवारिक सदस्यों के स्वास्थ्य में सुधार
  • नकारात्मक ऊर्जा: घर से नकारात्मक ऊर्जा का नाश

निष्कर्ष

भड़ली नवमी हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला एक पावन पर्व है। यह न केवल वैवाहिक जीवन में सुख-शांति लाता है, बल्कि जीवन के सभी क्षेत्रों में मंगलकारी फल प्रदान करता है। इस वर्ष 20 अगस्त 2025 को मनाए जाने वाले इस पर्व पर श्रद्धापूर्वक पूजन करने से माता भद्रकाली की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए, हम सभी इस पावन अवसर पर माता की आराधना करके अपने जीवन को धन्य बनाएं।

ध्यान दें: पूजन के समय सात्विक भाव रखें और ब्राह्मण या जरूरतमंदों को दान अवश्य दें।

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