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Pitru Paksha 2025 Dates: पितृ पक्ष कब से शुरू जानें श्राद्ध 2025 तिथियां

पितृ पक्ष 2025 की तिथियाँ और महत्व जानें। श्राद्ध कब से शुरू होंगे, कैसे करें पूजा और क्या है इसका धार्मिक महत्व, यहाँ पढ़ें सबकुछ।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

पितृ पक्ष 2025: तिथियाँ, महत्व और श्राद्ध विधि

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। यह वह समय होता है जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं, उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं। 2025 में पितृ पक्ष कब से शुरू होगा? क्या हैं श्राद्ध की महत्वपूर्ण तिथियाँ? आइए जानते हैं विस्तार से…

Contents
पितृ पक्ष 2025: तिथियाँ, महत्व और श्राद्ध विधिपितृ पक्ष 2025 की तिथियाँपितृ पक्ष का धार्मिक महत्वश्राद्ध कर्म की विधिपितृ पक्ष में क्या न करेंपितृ पक्ष से जुड़ी पौराणिक कथापितृ पक्ष में दान का महत्वनिष्कर्ष

पितृ पक्ष 2025 की तिथियाँ

2025 में पितृ पक्ष 5 सितंबर से शुरू होकर 19 सितंबर तक रहेगा। इस दौरान विभिन्न तिथियों पर पितरों का श्राद्ध किया जाता है:

  • 5 सितंबर 2025 – पूर्णिमा श्राद्ध
  • 6 सितंबर 2025 – प्रतिपदा श्राद्ध
  • 7 सितंबर 2025 – द्वितीया श्राद्ध
  • 8 सितंबर 2025 – तृतीया श्राद्ध
  • 9 सितंबर 2025 – चतुर्थी श्राद्ध
  • 10 सितंबर 2025 – माघ श्राद्ध और नवमी
  • 11 सितंबर 2025 – दशमी श्राद्ध
  • 12 सितंबर 2025 – एकादशी श्राद्ध
  • 13 सितंबर 2025 – द्वादशी श्राद्ध
  • 14 सितंबर 2025 – त्रयोदशी श्राद्ध
  • 15 सितंबर 2025 – चतुर्दशी श्राद्ध
  • 16 सितंबर 2025 – सर्वपितृ अमावस्या (सबसे महत्वपूर्ण दिन)

पितृ पक्ष का धार्मिक महत्व

शास्त्रों में कहा गया है:

“पितृदेवो भव” (तैत्तिरीय उपनिषद)

अर्थात पितर ही देवता के समान हैं। पितृ पक्ष में हमारे पूर्वज इस धरती पर आते हैं और हमारे द्वारा किए गए तर्पण व श्राद्ध से तृप्त होते हैं।

क्यों मनाया जाता है पितृ पक्ष?

  • पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए
  • पितृ ऋण से मुक्ति पाने के लिए
  • पितरों की आत्मा की शांति के लिए
  • परिवार में सुख-समृद्धि के लिए

श्राद्ध कर्म की विधि

श्राद्ध करने की सही विधि जानना अत्यंत आवश्यक है:

श्राद्ध के लिए आवश्यक सामग्री

  • कुशा (दूब घास)
  • तिल
  • जल
  • फूल
  • अन्न (विशेषकर चावल)
  • दूध, दही, घी
  • पिंड (चावल के आटे से बना)

श्राद्ध विधि के मुख्य चरण

  1. स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  2. पितरों का आवाहन करें: “ॐ पितृदेवताभ्यो नम:”
  3. तर्पण करें (जल अर्पित करें)
  4. पिंडदान करें
  5. ब्राह्मण भोजन कराएं
  6. दक्षिणा दें
  7. आशीर्वाद लें

पितृ पक्ष में क्या न करें

इन 16 दिनों में कुछ विशेष सावधानियाँ बरतनी चाहिए:

  • नए कार्य (विवाह, गृहप्रवेश आदि) न करें
  • मांसाहार और मदिरा से परहेज करें
  • कटु वचन न बोलें
  • पितरों का अपमान न करें
  • अनावश्यक यात्रा न करें

पितृ पक्ष से जुड़ी पौराणिक कथा

महाभारत काल में जब कर्ण की मृत्यु हुई, तो उनकी आत्मा को स्वर्ग में सोने-चांदी के भोजन परोसे गए। भूखे कर्ण ने यमराज से पूछा कि उन्हें वास्तविक भोजन क्यों नहीं दिया जा रहा? तब यमराज ने बताया कि जीवन भर उन्होंने सोना-चांदी दान किया पर अन्न दान नहीं किया। कर्ण ने पृथ्वी पर लौटकर 16 दिनों तक पितरों के निमित्त अन्नदान किया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

पितृ पक्ष में दान का महत्व

इन दिनों में दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं:

  • वस्त्र दान – नए वस्त्र ब्राह्मण को दें
  • अन्न दान – गरीबों को भोजन कराएं
  • तिल दान – काले तिल का विशेष महत्व
  • गाय दान – यदि संभव हो तो गौदान करें

निष्कर्ष

पितृ पक्ष हमें अपने पूर्वजों से जोड़ने का पावन अवसर है। 2025 में 5 सितंबर से 19 सितंबर तक इन 16 दिनों में श्रद्धापूर्वक श्राद्ध कर्म करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। याद रखें, जो व्यक्ति अपने पितरों का सम्मान करता है, उसका जीवन धन्य हो जाता है।

हमारे पूर्वज हमारे लिए देवतुल्य हैं। उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करना हमारा पुनीत कर्तव्य है। पितृ पक्ष 2025 में अपने पूर्वजों को याद करें और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म अवश्य करें।

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