Kharmas December 2025: 15 दिसंबर से होगा खरमास शुरू, मांगलिक कार्यों पर लगेगी रोक
हिंदू धर्म में खरमास का विशेष महत्व है। यह वह समय होता है जब सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस वर्ष 15 दिसंबर 2025 से खरमास की शुरुआत होने वाली है, जो कि अगले एक महीने तक चलेगा। इस अवधि में मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है। आइए, जानते हैं कि खरमास क्या है, इसका धार्मिक महत्व क्या है और इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
खरमास क्या है?
खरमास शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – “खर” (गधा) और “मास” (महीना)। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान सूर्य देव एक गधे पर सवार होकर यात्रा करते हैं, जिसके कारण इस अवधि को अशुभ माना जाता है। खरमास के दौरान शुभ कार्यों को टाल दिया जाता है क्योंकि इस समय ऊर्जा प्रवाह अनुकूल नहीं होता।
- खरमास की अवधि: 15 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक
- इस दौरान सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं।
- मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृहप्रवेश, नामकरण आदि वर्जित माने जाते हैं।
खरमास का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, खरमास के दौरान सूर्य देव की ऊर्जा कमजोर होती है, जिसके कारण यह समय अशुभ माना जाता है। इस अवधि में देवी-देवताओं की आराधना और धार्मिक अनुष्ठानों को प्राथमिकता दी जाती है। कहा जाता है कि इस दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं, इसलिए नए शुभ कार्यों को आरंभ करने से बचना चाहिए।
हालांकि, खरमास में पूजा-पाठ, दान-पुण्य और साधना का विशेष महत्व है। इस समय में की गई भक्ति और तपस्या से व्यक्ति को पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
खरमास में क्या न करें?
खरमास के दौरान कुछ विशेष कार्यों से परहेज करने की सलाह दी जाती है:
- विवाह, मुंडन, नामकरण जैसे संस्कार न करें।
- नए घर, दुकान या वाहन की खरीदारी टालें।
- नए व्यापार या नौकरी की शुरुआत न करें।
- बड़े निवेश या वित्तीय निर्णय लेने से बचें।
खरमास में क्या करें?
इस अवधि में आध्यात्मिक गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए:
- नियमित रूप से सूर्य देव की पूजा करें।
- गीता, रामचरितमानस या भजन-कीर्तन का पाठ करें।
- गरीबों और जरूरतमंदों को दान दें।
- पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म करने से पुण्य मिलता है।
खरमास में सूर्य पूजा का महत्व
खरमास में सूर्य देव की आराधना करने से विशेष लाभ मिलता है। निम्न मंत्र का जाप कर सकते हैं:
ॐ घृणि सूर्याय नमः
इसके अलावा, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। सुबह जल्दी उठकर सूर्य को अर्घ्य देने से स्वास्थ्य और समृद्धि में वृद्धि होती है।
निष्कर्ष
खरमास एक ऐसा समय है जब हमें भौतिक कार्यों से विरक्त होकर आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। इस अवधि में मांगलिक कार्यों से बचकर भगवान की भक्ति और दान-पुण्य करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। 15 दिसंबर 2025 से शुरू हो रहे खरमास का सदुपयोग करें और इस समय को आत्मसाधना के लिए समर्पित करें।
