इंदिरा एकादशी 2025: परिचय एवं महत्व
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। इंदिरा एकादशी आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है, जो पितृ पक्ष के समाप्त होने के बाद आती है। यह एकादशी पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए समर्पित है। 2025 में यह पर्व 23 सितंबर, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है और पूर्वजों को स्वर्गलोक प्राप्त होता है।
इंदिरा एकादशी की पौराणिक कथा
पद्म पुराण के अनुसार, महाराज इंद्रसेन ने इस व्रत को किया था। उनके पिता की आत्मा को यमलोक में कष्ट भोगना पड़ रहा था। महर्षि वशिष्ठ ने राजा को इस व्रत का विधान बताया। व्रत करने से उनके पिता को मोक्ष मिला और स्वर्ग में स्थान प्राप्त हुआ। तभी से इसका नाम इंदिरा एकादशी पड़ा।
इंदिरा एकादशी 2025 का शुभ मुहूर्त
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 22 सितंबर 2025, रात 10:42 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 23 सितंबर 2025, रात 08:59 बजे
- पारण का समय: 24 सितंबर, सुबह 06:12 से 08:28 तक
- व्रत का दिन: 23 सितंबर, मंगलवार
इंदिरा एकादशी पूजा विधि
सुबह की तैयारी
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- साफ वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु का स्मरण करें।
- घर के मंदिर में गंगाजल छिड़कर शुद्धिकरण करें।
पूजा की विधि
- लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं।
- भगवान विष्णु की मूर्ति या शालिग्राम स्थापित करें।
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें।
- तुलसी दल, फल, फूल और मेवे अर्पित करें।
- दीपक जलाकर धूप-दीप से आरती उतारें।
विशेष नियम
- इस दिन सात्विक भोजन ही ग्रहण करें या फलाहार करें।
- चावल, लहसुन, प्याज और मांसाहार से परहेज करें।
- पितरों के नाम से तर्पण अवश्य करें।
इंदिरा एकादशी स्तुति मंत्र
इस दिन निम्न मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है:
विष्णु सहस्रनाम मंत्र
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
इस मंत्र का 108 बार जाप करने से पितृदोष शांत होता है।
एकादशी व्रत कथा
पूजा के बाद इस मंत्र से कथा श्रवण करें:
“ये पठंति नरा भक्त्या शृण्वंति च समाहिताः।
तेषां पुण्यफलं वक्तुं न शक्तोऽहं सहस्रधा॥”
इंदिरा एकादशी का फल एवं महत्व
- इस व्रत से पितृ दोष और कालसर्प दोष का निवारण होता है।
- पूर्वजों को मोक्ष मिलता है और परिवार में सुख-शांति आती है।
- भगवान विष्णु की कृपा से आर्थिक संकट दूर होते हैं।
- मृत्यु के बाद स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है।
विशेष सुझाव
- इस दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें।
- गरीबों को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा दान करें।
- रात्रि में भगवान विष्णु के नाम का कीर्तन करें।
निष्कर्ष
इंदिरा एकादशी का व्रत पितृ ऋण से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु और पितरों की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। 2025 में इस पावन पर्व पर श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत रखकर पूजन करें। यह न केवल पितरों को मोक्ष देता है, बल्कि जीवित परिजनों के लिए भी शुभ फलदायी होता है।
