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Amalaki Ekadashi: अमालकी एकादशी से मिलेगा सुख-समृद्धि, जानें तिथि और कथा

अमालकी एकादशी का व्रत सुख-समृद्धि और मोक्ष प्रदान करता है। जानिए इसकी पौराणिक कथा, तिथि और पूजा विधि। इस पावन व्रत का महत्व और लाभ जानने के लिए पढ़ें।

Published October 31, 2026
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5 Min Read

अमालकी एकादशी: सुख-समृद्धि का पावन पर्व

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और अमालकी एकादशी इनमें से एक अत्यंत पुण्यदायी व्रत मानी जाती है। यह व्रत फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और अमलकी (आँवला) के वृक्ष की आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और पापों का नाश होता है। आइए, जानते हैं इस पावन एकादशी की तिथि, महत्व और पौराणिक कथा।

Contents
अमालकी एकादशी: सुख-समृद्धि का पावन पर्वअमालकी एकादशी 2024: तिथि और शुभ मुहूर्तअमालकी एकादशी का धार्मिक महत्वव्रत विधिअमालकी एकादशी की पौराणिक कथाआँवले का आध्यात्मिक महत्वअमालकी एकादशी व्रत के लाभविशेष सुझावनिष्कर्ष

अमालकी एकादशी 2024: तिथि और शुभ मुहूर्त

  • तिथि: 20 मार्च 2024 (बुधवार)
  • एकादशी प्रारंभ: 19 मार्च को रात 11:06 बजे से
  • एकादशी समाप्त: 20 मार्च को रात 01:29 बजे तक
  • पारण समय: 21 मार्च सुबह 06:36 से 08:55 तक

अमालकी एकादशी का धार्मिक महत्व

शास्त्रों में अमालकी एकादशी को “मोक्षदायिनी” कहा गया है। इस दिन आँवले के वृक्ष की पूजा करने और उसके नीचे भगवान विष्णु का ध्यान करने से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। आँवला को भगवान विष्णु का प्रिय फल माना जाता है, और इसकी पूजा से स्वास्थ्य, धन और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

व्रत विधि

  • प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
  • स्वच्छ वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु और आँवले के वृक्ष की पूजा करें।
  • आँवले के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएँ और इस मंत्र का जाप करें: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”।
  • दिनभर उपवास रखें और शाम को भगवान विष्णु की आरती करें।
  • अगले दिन सुबह ब्राह्मण को भोजन कराकर दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करें।

अमालकी एकादशी की पौराणिक कथा

पद्म पुराण में अमालकी एकादशी की एक रोचक कथा वर्णित है। प्राचीन काल में वैदिश नाम का एक नगर था, जहाँ के निवासी धर्म-कर्म में लीन थे। एक बार उस नगर में भीषण अकाल पड़ा। लोगों ने राजा चित्ररथ से प्रार्थना की। राजा ने ऋषि-मुनियों से परामर्श किया तो उन्होंने अमालकी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।

सभी नगरवासियों ने पूरी श्रद्धा से अमालकी एकादशी का व्रत किया और आँवले के वृक्ष की पूजा की। कुछ ही दिनों में नगर में वर्षा हुई और सुख-समृद्धि लौट आई। तभी से यह मान्यता प्रचलित हुई कि अमालकी एकादशी का व्रत करने से सभी कष्ट दूर होते हैं।

आँवले का आध्यात्मिक महत्व

आयुर्वेद में आँवले को अमृत तुल्य माना गया है, लेकिन धर्मशास्त्रों में इसका विशेष स्थान है। मान्यता है कि:

  • आँवले के वृक्ष में सभी देवताओं का वास होता है।
  • इसकी जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में शिव जी निवास करते हैं।
  • अमालकी एकादशी पर आँवले के नीचे बैठकर पूजा करने से तीनों देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।

अमालकी एकादशी व्रत के लाभ

  • मोक्ष की प्राप्ति: इस व्रत को करने से मनुष्य को जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।
  • धन-धान्य में वृद्धि: घर में आर्थिक समृद्धि आती है और दरिद्रता दूर होती है।
  • स्वास्थ्य लाभ: आँवले की पूजा से शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है।
  • पितृ दोष शांति: पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और कुल परंपरा का उद्धार होता है।

विशेष सुझाव

अमालकी एकादशी पर यदि संभव हो तो आँवले का रस या मुरब्बा प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। इस दिन गरीबों को आँवले का दान अवश्य दें। व्रत कथा सुनने और सुनाने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

निष्कर्ष

अमालकी एकादशी का व्रत हमें प्रकृति और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देता है। आँवले के वृक्ष की पूजा करके हम न सिर्फ अपने लिए बल्कि पूरे समाज के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। यह व्रत सिखाता है कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और भगवान के प्रति भक्ति ही सच्चे सुख का मार्ग है। आइए, इस पावन अवसर पर संकल्प लें कि हम प्रकृति का संरक्षण करते हुए धर्म के मार्ग पर चलेंगे।

ध्यान दें: व्रत से पहले किसी योग्य पंडित या धर्मग्रंथ से संपूर्ण विधि की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें।

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