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Kaal Bhairav Ashtami: भगवान शिव के क्रोध से काल भैरव का जन्म कथा

काल भैरव अष्टमी की पौराणिक कथा जानें: भगवान शिव के क्रोध से कैसे प्रकट हुए काल भैरव, उनकी महिमा और पूजा विधि। सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

काल भैरव अष्टमी: भगवान शिव के क्रोध से जन्मी एक दिव्य शक्ति

हिंदू धर्म में काल भैरव अष्टमी का विशेष महत्व है। यह वह पावन तिथि है जब भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव का जन्म हुआ था। इस दिन भक्तजन काल भैरव की विशेष पूजा-अर्चना कर उनकी कृपा प्राप्त करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कैसे भगवान शिव के क्रोध से काल भैरव का जन्म हुआ? आइए, जानते हैं इसके पीछे की रोचक और रहस्यमयी कथा।

Contents
काल भैरव अष्टमी: भगवान शिव के क्रोध से जन्मी एक दिव्य शक्तिकाल भैरव अष्टमी की पौराणिक कथाब्रह्मा और विष्णु के बीच विवादब्रह्मा का असत्य वचन और शिव का क्रोधकाल भैरव का उद्भव और ब्रह्मा का दंडकाल भैरव बने काशी के कोतवालकाल भैरव अष्टमी का महत्वपूजा विधिकाल भैरव के विभिन्न रूपकाल भैरव स्तोत्र का महत्वनिष्कर्ष

काल भैरव अष्टमी की पौराणिक कथा

ब्रह्मा और विष्णु के बीच विवाद

पुराणों के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी के बीच सर्वश्रेष्ठ होने को लेकर विवाद हो गया। इस विवाद के समाधान के लिए दोनों देवता भगवान शिव के पास पहुंचे। तब भगवान शिव ने एक तेजस्वी लिंग (ज्योतिर्लिंग) प्रकट किया और कहा कि जो भी इस लिंग का अंत या आदि ढूंढ लेगा, वही सर्वश्रेष्ठ होगा।

  • ब्रह्मा जी ने ऊपर की ओर उड़ान भरी
  • विष्णु जी ने नीचे की ओर यात्रा की
  • दोनों ही लिंग का अंत नहीं ढूंढ पाए

ब्रह्मा का असत्य वचन और शिव का क्रोध

जब ब्रह्मा जी वापस लौटे तो उन्होंने असत्य बोल दिया कि उन्होंने लिंग का अंत ढूंढ लिया है। यह सुनकर भगवान शिव को अत्यंत क्रोध आया। उनके क्रोध से एक विकराल रूप प्रकट हुआ – यही थे काल भैरव।

काल भैरव का उद्भव और ब्रह्मा का दंड

भगवान शिव के क्रोध से प्रकट हुए काल भैरव ने ब्रह्मा जी के पांचवें सिर को अपने नाखूनों से काट दिया। इससे ब्रह्मा जी का अहंकार नष्ट हुआ और उन्हें सत्य का ज्ञान हुआ।

  • काल भैरव को ब्रह्महत्या का पाप लगा
  • यह पाप उनके साथ चिपक गया
  • शिव ने उन्हें काशी भेजा जहां पाप से मुक्ति मिली

काल भैरव बने काशी के कोतवाल

भगवान शिव ने काल भैरव को काशी का कोतवाल नियुक्त किया। मान्यता है कि काशी में प्रवेश करने से पहले काल भैरव की अनुमति लेनी पड़ती है। आज भी काशी में काल भैरव मंदिर में उनकी पूजा की जाती है।

काल भैरव अष्टमी का महत्व

मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन का विशेष महत्व है:

  • काल भैरव की पूजा से भक्तों को भय और संकटों से मुक्ति मिलती है
  • यह पूजा शनि दोष और ग्रह दोषों को दूर करती है
  • काल भैरव की कृपा से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं

पूजा विधि

काल भैरव अष्टमी पर इस प्रकार पूजा करें:

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • काल भैरव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
  • उन्हें सिंदूर, फूल और धूप अर्पित करें
  • काल भैरव मंत्र का जाप करें: “ॐ भैरवाय नमः”
  • रात्रि में जागरण कर भजन-कीर्तन करें

काल भैरव के विभिन्न रूप

काल भैरव के आठ प्रमुख रूप माने जाते हैं जिन्हें अष्ट भैरव कहा जाता है:

  • असितांग भैरव – श्वेत वर्ण के
  • रुरु भैरव – रक्त वर्ण के
  • चंड भैरव – अत्यंत उग्र स्वरूप
  • क्रोध भैरव – क्रोधित मुद्रा में
  • उन्मत्त भैरव – मदमस्त स्वरूप
  • कपाली भैरव – कपाल धारण किए
  • भीषण भैरव – भयानक रूप
  • संहार भैरव – संहारकर्ता

काल भैरव स्तोत्र का महत्व

काल भैरव की आराधना में काल भैरव अष्टक का विशेष महत्व है। यह स्तोत्र भगवान शिव द्वारा रचित माना जाता है:

“कालभैरवाष्टकं पुण्यं यः पठेत्प्रयतः शुचिः।
स भुक्त्वा सकलान्भोगानन्ते शिवपुरं व्रजेत्॥”

अर्थात: जो व्यक्ति पवित्र मन से काल भैरव अष्टक का पाठ करता है, वह सभी भोगों को भोगकर अंत में शिवलोक को प्राप्त होता है।

निष्कर्ष

काल भैरव अष्टमी हमें सिखाती है कि अहंकार का परिणाम हमेशा विनाशकारी होता है। काल भैरव का रूप भले ही भयानक हो, लेकिन वे भक्तों के रक्षक हैं। इस पावन तिथि पर उनकी सच्चे मन से आराधना करने से सभी प्रकार के भय और संकट दूर होते हैं। काशी में काल भैरव की पूजा का विशेष महत्व है, लेकिन हम कहीं भी सच्चे मन से उनकी आराधना कर सकते हैं।

आइए, इस काल भैरव अष्टमी पर हम सभी भगवान शिव के इस रौद्र रूप की पूजा करें और उनकी कृपा प्राप्त करें। “ॐ कालभैरवाय नमः”

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