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Annapurna Jayanti 2025: अन्न समाप्त हुआ तो मां अन्नपूर्णा ने कैसे बचाए प्राण

जानिए Annapurna Jayanti 2025 की पौराणिक कथा – कैसे मां अन्नपूर्णा ने अन्न संकट के समय प्रकट होकर की सभी की रक्षा और क्यों मनाई जाती है यह महत्वपूर्ण तिथि।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

अन्नपूर्णा जयंती 2025: जब पृथ्वी पर समाप्त हुआ अन्न तो कैसे मां अन्नपूर्णा ने प्रकट होकर की सबके प्राणों की रक्षा

हिंदू धर्म में मां अन्नपूर्णा को अन्न की देवी माना जाता है। उनकी कृपा से ही धरती पर अन्न का भंडार भरा रहता है और सभी प्राणियों का पालन-पोषण होता है। अन्नपूर्णा जयंती के पावन अवसर पर हम उस पौराणिक घटना को याद करते हैं, जब धरती पर अन्न समाप्त हो गया था और मां अन्नपूर्णा ने प्रकट होकर सभी के प्राणों की रक्षा की थी।

Contents
अन्नपूर्णा जयंती 2025: जब पृथ्वी पर समाप्त हुआ अन्न तो कैसे मां अन्नपूर्णा ने प्रकट होकर की सबके प्राणों की रक्षाअन्नपूर्णा जयंती का महत्ववह पौराणिक घटना जब धरती से अन्न समाप्त हो गयामां अन्नपूर्णा का प्रकट होनाअन्नपूर्णा जयंती कैसे मनाएं?पूजा विधिदान का महत्वमां अन्नपूर्णा की कृपा पाने के उपायनिष्कर्ष

अन्नपूर्णा जयंती का महत्व

अन्नपूर्णा जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। 2025 में यह पर्व 15 दिसंबर को पड़ रहा है। इस दिन मां अन्नपूर्णा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।

  • मां अन्नपूर्णा को समस्त सृष्टि की पोषक माना जाता है।
  • इनकी कृपा से घर में अन्न की कभी कमी नहीं होती।
  • इस दिन व्रत रखकर मां की आराधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

वह पौराणिक घटना जब धरती से अन्न समाप्त हो गया

पुराणों में वर्णित एक कथा के अनुसार, एक समय ऐसा आया जब पृथ्वी पर अन्न का भंडार पूरी तरह समाप्त हो गया। सभी प्राणी भूख से व्याकुल होने लगे और जीवन संकट में पड़ गया। ऐसे में भगवान शिव ने मां पार्वती से प्रार्थना की कि वे अन्नपूर्णा के रूप में प्रकट होकर सृष्टि की रक्षा करें।

मां अन्नपूर्णा का प्रकट होना

मां पार्वती ने अन्नपूर्णा का अवतार लिया और अपने हाथों से सभी प्राणियों को अन्न वितरित किया। उनकी कृपा से धरती पर फिर से हरियाली छा गई और अन्न की कोई कमी नहीं रही। इस घटना के बाद से ही मां अन्नपूर्णा की पूजा का विधान शुरू हुआ।

  • मां अन्नपूर्णा ने अपार करुणा दिखाते हुए सभी को अन्न दान किया।
  • उन्होंने यह संदेश दिया कि अन्न ही जीवन का आधार है।
  • इस घटना के बाद से ही अन्न की बर्बादी को पाप माना जाने लगा।

अन्नपूर्णा जयंती कैसे मनाएं?

अन्नपूर्णा जयंती के दिन मां की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन निम्नलिखित उपाय करने चाहिए:

पूजा विधि

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • मां अन्नपूर्णा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • उन्हें फूल, फल और मिष्ठान्न अर्पित करें।
  • इस मंत्र का जाप करें: “ॐ अन्नपूर्णायै नमः”
  • पूरे दिन व्रत रखें और संध्या समय ही भोजन करें।

दान का महत्व

इस दिन अन्न दान करने का विशेष महत्व है। गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न दान करने से मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं।

  • गेहूं, चावल, दाल आदि का दान करें।
  • जानवरों को भी चारा-पानी दें।
  • अन्न की बर्बादी न करने का संकल्प लें।

मां अन्नपूर्णा की कृपा पाने के उपाय

नियमित रूप से मां अन्नपूर्णा की पूजा करने और उनके मंत्र का जाप करने से जीवन में कभी अन्न की कमी नहीं होती। कुछ विशेष उपाय निम्नलिखित हैं:

  • रोजाना भोजन बनाने से पहले मां अन्नपूर्णा को प्रणाम करें।
  • भोजन करने से पहले पंचोपचार से मां को भोग लगाएं।
  • किचन को हमेशा स्वच्छ और पवित्र रखें।
  • कभी भी अन्न का अपमान या बर्बादी न करें।

निष्कर्ष

अन्नपूर्णा जयंती का पर्व हमें यह याद दिलाता है कि अन्न ही जीवन का आधार है। मां अन्नपूर्णा की कथा हमें सिखाती है कि हमें अन्न का सम्मान करना चाहिए और कभी भी इसे बर्बाद नहीं करना चाहिए। 2025 की अन्नपूर्णा जयंती पर हम सभी मां से प्रार्थना करें कि वे हमारे घरों में सदैव अन्न की पूर्ति बनाए रखें और हमें अपनी कृपा से नवाजें।

मां अन्नपूर्णा की इस पावन कथा को पढ़कर और उनकी पूजा करके हम अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि को आमंत्रित कर सकते हैं।

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