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Chandra Darshan 2025 अमावस्या के बाद चंद्र दर्शन का महत्व पूजा विधि मंत्र

Published June 26, 2026
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4 Min Read

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Contents
Chandra Darshan 2025: अमावस्या के बाद चंद्र दर्शन का महत्वचंद्र दर्शन क्या है?चंद्र दर्शन 2025 का शुभ मुहूर्तकैसे करें चंद्र दर्शन?चंद्र दर्शन का धार्मिक महत्वचंद्र दर्शन के 5 प्रमुख लाभचंद्र दर्शन की पूजा विधिसामग्रीविधिचंद्र दर्शन के विशेष मंत्र1. चंद्र गायत्री मंत्र2. शांति मंत्र3. सामान्य प्रार्थनाविशेष सावधानियाँनिष्कर्ष

Chandra Darshan 2025: अमावस्या के बाद चंद्र दर्शन का महत्व

हिंदू धर्म में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। अमावस्या के बाद पहली बार दिखने वाले चंद्रमा के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है। 2025 में चंद्र दर्शन के पावन अवसर पर आइए जानें इसकी पौराणिक महिमा, सरल पूजा विधि और प्रभावी मंत्र।

चंद्र दर्शन क्या है?

अमावस्या के बाद प्रतिपदा तिथि में चंद्रमा का पहली बार दिखाई देना ही चंद्र दर्शन कहलाता है। शास्त्रों में इसे पुण्यफलदायी माना गया है।

  • चंद्र दर्शन के दिन चंद्रमा की पूजा करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं
  • इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है
  • चंद्र दोष से पीड़ित जातकों के लिए विशेष लाभकारी

चंद्र दर्शन 2025 का शुभ मुहूर्त

2025 में चंद्र दर्शन के प्रमुख तिथियाँ:

  • जनवरी: 30 जनवरी (गुरुवार) – शाम 6:42 बजे के बाद
  • फरवरी: 28 फरवरी (शुक्रवार) – शाम 6:56 बजे के बाद
  • मार्च: 30 मार्च (रविवार) – शाम 7:08 बजे के बाद

कैसे करें चंद्र दर्शन?

शास्त्रों में बताया गया है कि चंद्रमा को देखने का विशेष तरीका:

  • सबसे पहले हाथ में जल लेकर चंद्रमा को अर्घ्य दें
  • फिर अपने इष्ट देवता का स्मरण करते हुए चंद्रमा के दर्शन करें
  • ध्यान रखें कि सीधे नंगी आँखों से न देखें, हाथों के जरिए छन्नित दर्शन करें

चंद्र दर्शन का धार्मिक महत्व

पुराणों में चंद्र देव को मन के स्वामी और औषधियों के राजा कहा गया है। स्कंद पुराण में वर्णित है:

“यस्य दर्शनमात्रेण हरति दुःखमशेषतः।
तस्मै चन्द्राय देवाय नमः शीतगुणाय च॥”

चंद्र दर्शन के 5 प्रमुख लाभ

  • मानसिक शांति: चंद्रमा मन को स्थिर करता है
  • सौभाग्य वृद्धि: विवाहितों के लिए विशेष फलदायी
  • कर्ज मुक्ति: आर्थिक समस्याओं का निवारण
  • संतान सुख: संतान प्राप्ति में सहायक
  • नवग्रह शांति: चंद्र दोष का प्रभाव कम होता है

चंद्र दर्शन की पूजा विधि

सरल घरेलू पूजन विधि जिसे कोई भी कर सकता है:

सामग्री

  • सफेद कपड़ा
  • सफेद फूल (चंद्रमा के लिए प्रिय)
  • चावल/अक्षत
  • दूध या दही से बना मिष्ठान
  • घी का दीपक

विधि

  1. स्नानादि से निवृत्त होकर साफ सफेद वस्त्र धारण करें
  2. चंद्रमा के उदय होने का समय जानकर पूर्व दिशा की ओर मुख कर बैठें
  3. चंद्रमा को जल में सफेद फूल डालकर अर्घ्य दें
  4. निम्न मंत्र का उच्चारण करें:

“दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसंभवम्।
नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुटभूषणम्॥”

चंद्र दर्शन के विशेष मंत्र

चंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए ये मंत्र अत्यंत प्रभावी माने गए हैं:

1. चंद्र गायत्री मंत्र

“ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे
अमृत तत्वाय धीमहि
तन्नः चन्द्रः प्रचोदयात्॥”

2. शांति मंत्र

“ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः”

3. सामान्य प्रार्थना

“सिनीवाली महाभाग चंद्रमण्डलवासिनी
त्वामहं प्रार्थये नित्यं शुभं मे देहि सर्वदा॥”

विशेष सावधानियाँ

  • कभी भी खाली पेट चंद्रमा के दर्शन न करें
  • चंद्र दर्शन के दिन उड़द की दाल का सेवन वर्जित माना गया है
  • चंद्रमा को अंगूठे से न दिखाएँ (अशुभ माना जाता है)
  • माता-पिता या गुरुजनों से पहले चंद्र दर्शन न करें

निष्कर्ष

चंद्र दर्शन का यह पावन अवसर 2025 में भक्तों के लिए अनेकों आशीर्वाद लेकर आ रहा है। इस लेख में बताई गई सरल पूजा विधि और मंत्रों का पालन कर आप चंद्र देव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। याद रखें, श्रद्धा और विश्वास से की गई छोटी सी पूजा भी महान फल प्रदान करती है।

चंद्रमा हमें सिखाते हैं कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, परंतु प्रकाश का मार्ग कभी बंद नहीं होता। आइए, इस चंद्र दर्शन पर प्रण करें कि हम भी चंद्रमा की तरह अंधकार को पीछे छोड़ते हुए प्रकाश की ओर बढ़ेंगे।

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