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Parshuram Jayanti 2025 परशुराम जयंती पिता के आदेश पर माता भाइयों का वध

परशुराम जयंती 2025: जानें क्यों परशुरामजी ने अपनी मां और भाइयों का वध किया था। इस पौराणिक घटना की पूरी कहानी और महत्व जानने के लिए पढ़ें।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

परशुराम जयंती 2025: पिता के आदेश पर परशुराम ने क्यों किया माता-भाइयों का वध?

भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जयंती का पावन पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस वर्ष 2025 में यह पर्व [तिथि] को मनाया जाएगा। परशुरामजी की गाथा में वह अद्भुत प्रसंग छिपा है, जब उन्होंने अपनी माता रेणुका और भाइयों का वध कर दिया था। यह कथा न सिर्फ आज्ञापालन की पराकाष्ठा दिखाती है, बल्कि धर्म और कर्तव्य के गूढ़ संतुलन का भी प्रतीक है।

Contents
परशुराम जयंती 2025: पिता के आदेश पर परशुराम ने क्यों किया माता-भाइयों का वध?परशुराम जयंती का महत्वधार्मिक मान्यताएंवह विवादास्पद घटना: मातृ-भ्रातृ वधघटना का पृष्ठभूमिपरशुराम की प्रतिक्रियाइस घटना का गूढ़ अर्थधर्म की प्रधानताआज्ञाकारिता का उत्कृष्ट उदाहरणपरशुराम जयंती कैसे मनाएं?विशेष पूजा सामग्रीपरशुरामजी से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बातें21 बार क्षत्रियों का संहारभगवान राम से मुलाकातनिष्कर्ष

परशुराम जयंती का महत्व

त्रेतायुग में जन्मे परशुरामजी को “कल्कि पुराण” में भविष्य के मार्गदर्शक के रूप में वर्णित किया गया है। उनकी जयंती के अवसर पर:

  • भक्त फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया (अक्षय तृतीया) को व्रत रखते हैं
  • परशु (फरसे) की पूजा की जाती है
  • ब्राह्मणों को दान देने की परंपरा है

धार्मिक मान्यताएं

शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन “ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम: प्रचोदयात्” मंत्र का जाप करने से सभी संकट दूर होते हैं।

वह विवादास्पद घटना: मातृ-भ्रातृ वध

यह कथा महर्षि जमदग्नि और उनके पुत्रों के जीवन से जुड़ी है:

घटना का पृष्ठभूमि

  • महर्षि जमदग्नि की पत्नी रेणुका अत्यंत पतिव्रता थीं
  • एक दिन जब वह जल लेने गईं, तो गंधर्वराज चित्ररथ को देखकर क्षणभर के लिए मोहित हो गईं
  • यह देखकर ऋषि क्रोधित हो गए और पुत्रों को माता का वध करने का आदेश दिया

परशुराम की प्रतिक्रिया

जब सभी भाइयों ने पिता के इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया, तो महर्षि ने उन्हें श्राप देकर पाषाण बना दिया। तब परशुरामजी ने अपने फरसे से:

  • सबसे पहले माता रेणुका का सिर काटा
  • फिर अपने भाइयों का वध किया
  • पिता से वरदान माँगकर सभी को पुनर्जीवित किया

इस घटना का गूढ़ अर्थ

यह प्रसंग सतही तौर पर हिंसक लग सकता है, लेकिन इसके पीछे गहन दार्शनिक संदेश छिपे हैं:

धर्म की प्रधानता

परशुराम ने दिखाया कि धर्म सभी सांसारिक संबंधों से ऊपर है। जब पिता का आदेश धर्मसम्मत था, तो उसका पालन करना ही उचित था।

आज्ञाकारिता का उत्कृष्ट उदाहरण

इस घटना में छिपा संदेश है कि गुरु/पिता की आज्ञा को सर्वोपरि मानना चाहिए, भले ही वह कितनी भी कठिन क्यों न लगे।

परशुराम जयंती कैसे मनाएं?

इस पावन दिन को श्रद्धापूर्वक मनाने के लिए:

  • प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें
  • घर के मंदिर में परशुरामजी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
  • “ॐ परशुरामाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें
  • ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा दें

विशेष पूजा सामग्री

  • लाल वस्त्र (परशुरामजी का प्रिय रंग)
  • गुड़ और घी का भोग
  • फूल, फल और तुलसी दल

परशुरामजी से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बातें

21 बार क्षत्रियों का संहार

परशुरामजी ने हैहयवंशी क्षत्रियों का 21 बार संहार किया था, क्योंकि उन्होंने उनके पिता की हत्या कर दी थी। यह घटना भी धर्म की रक्षा के लिए की गई थी।

भगवान राम से मुलाकात

रामायण में वर्णित है कि जब भगवान राम ने शिव धनुष तोड़ा, तो परशुरामजी ने उनकी परीक्षा ली थी।

निष्कर्ष

परशुराम जयंती हमें धर्म, कर्तव्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। माता-पिता के प्रति समर्पण और गुरु आज्ञा का पालन – यही इस पर्व का मूल संदेश है। आइए, इस पावन अवसर पर हम भी अपने जीवन में धर्म के मार्ग पर अडिग रहने का संकल्प लें।

श्री परशुराम की कृपा से सभी के जीवन में शांति, समृद्धि और सद्बुद्धि का आगमन हो – यही हमारी शुभकामना है!

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