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Utpanna Ekadashi 2025: इस साल कब है उत्पन्ना एकादशी तिथि शुभ मुहूर्त महत्व

इस साल उत्पन्ना एकादशी 2025 की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व जानें। इस पवित्र व्रत का पालन करने के लिए सही समय और विधि की जानकारी प्राप्त करें।

Published October 31, 2026
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4 Min Read

उत्पन्ना एकादशी 2025: इस साल कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और उत्पन्ना एकादशी इनमें से सबसे पवित्र मानी जाती है। यह व्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस वर्ष 2025 में, उत्पन्ना एकादशी का पर्व 30 नवंबर, रविवार को पड़ रहा है। इस लेख में हम आपको इस व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसके धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से बताएंगे।

Contents
उत्पन्ना एकादशी 2025: इस साल कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्वउत्पन्ना एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्तउत्पन्ना एकादशी का पौराणिक महत्वउत्पन्ना एकादशी व्रत के लाभउत्पन्ना एकादशी व्रत विधिव्रत से पहले की तैयारीव्रत के दिन की पूजा विधिव्रत पारण (पारण विधि)उत्पन्ना एकादशी की विशेष बातेंउत्पन्ना एकादशी का आध्यात्मिक महत्वनिष्कर्ष

उत्पन्ना एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 29 नवंबर 2025, शनिवार को रात 08:14 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 30 नवंबर 2025, रविवार को रात 09:32 बजे
  • व्रत पारण का समय: 1 दिसंबर 2025, सुबह 06:45 से 08:59 तक

ध्यान रखें कि उत्पन्ना एकादशी का व्रत 30 नवंबर को रखा जाएगा क्योंकि इस दिन एकादशी तिथि सूर्योदय तक प्रभावी है।

उत्पन्ना एकादशी का पौराणिक महत्व

पद्म पुराण के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु की निद्रा से एकादशी देवी का जन्म हुआ था। कथा के अनुसार, मुर नामक राक्षस से युद्ध करते समय भगवान विष्णु थक गए और बदरिकाश्रम में गुफा में विश्राम करने लगे। तभी मुर राक्षस ने उन पर आक्रमण कर दिया। भगवान विष्णु की निद्रा से एक कन्या प्रकट हुई जिसने मुर का वध किया। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर इस कन्या को वरदान दिया कि तुम्हारे नाम पर एकादशी व्रत रखा जाएगा जो सभी पापों को नष्ट करने वाला होगा।

उत्पन्ना एकादशी व्रत के लाभ

  • पापों से मुक्ति मिलती है
  • मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है
  • पारिवारिक सुख-शांति बढ़ती है
  • आर्थिक समृद्धि का मार्ग खुलता है
  • स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है

उत्पन्ना एकादशी व्रत विधि

व्रत से पहले की तैयारी

  • दशमी की रात से ही ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • सात्विक भोजन ग्रहण करें
  • रात्रि में भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए सोएं

व्रत के दिन की पूजा विधि

  • प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें
  • स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु की पूजा करें
  • घर के मंदिर में तुलसी के पौधे के समीप दीपक जलाएं
  • इस मंत्र का जाप करें: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
  • पूरे दिन उपवास रखें और केवल फलाहार करें
  • रात्रि में भगवान विष्णु की कथा सुनें या पढ़ें

व्रत पारण (पारण विधि)

एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के दिन सूर्योदय के बाद करना चाहिए। पारण से पहले भगवान विष्णु को जल अर्पित करें और फिर सात्विक भोजन ग्रहण करें।

उत्पन्ना एकादशी की विशेष बातें

  • इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है
  • भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा करें
  • तुलसी पूजन इस व्रत का महत्वपूर्ण अंग है
  • इस दिन दान-पुण्य का विशेष फल मिलता है

उत्पन्ना एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

उत्पन्ना एकादशी सिर्फ एक व्रत नहीं बल्कि आत्मशुद्धि का महापर्व है। यह व्रत मनुष्य को भौतिक सुखों से ऊपर उठकर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का अवसर देता है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के अंदर सात्विक गुणों का विकास होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

निष्कर्ष

उत्पन्ना एकादशी हिंदू धर्म के सबसे पवित्र व्रतों में से एक है जो इस वर्ष 30 नवंबर 2025 को मनाई जाएगी। इस व्रत का पालन करने से भक्तों को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह न केवल पापों से मुक्ति दिलाता है बल्कि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करता है। आइए, हम सभी इस पावन एकादशी पर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए पूर्ण श्रद्धा के साथ इस व्रत का पालन करें।

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