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Mahalaya Amavasya 2025 कब है तिथि और महत्व

Published June 26, 2026
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3 Min Read

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Contents
महालया अमावस्या 2025: तिथि, महत्व और पूजा विधिमहालया अमावस्या 2025 की तिथि और समयमहालया अमावस्या का धार्मिक महत्वक्यों मनाते हैं महालया अमावस्या?महालया अमावस्या की पौराणिक कथामहालया और देवी पूजनमहालया अमावस्या पर क्या करें?पितृ तर्पण की विधिमंत्रोच्चारणमहालया अमावस्या पर विशेष सावधानियाँमहालया अमावस्या का आध्यात्मिक प्रभाववैज्ञानिक दृष्टिकोणनिष्कर्ष

महालया अमावस्या 2025: तिथि, महत्व और पूजा विधि

हिंदू धर्म में महालया अमावस्या का विशेष महत्व है। यह वह पावन तिथि है जब पितृ अपने वंशजों के यहाँ आशीर्वाद देने आते हैं। 2025 में यह पर्व कब मनाया जाएगा, इसकी तिथि और इसके आध्यात्मिक महत्व को जानने के लिए यह लेख पढ़ें।

महालया अमावस्या 2025 की तिथि और समय

  • तिथि: 22 सितंबर 2025 (सोमवार)
  • अमावस्या प्रारंभ: 21 सितंबर रात 11:29 बजे
  • अमावस्या समाप्त: 22 सितंबर रात 09:14 बजे

महालया अमावस्या का धार्मिक महत्व

शास्त्रों के अनुसार, पितृपक्ष की शुरुआत इसी दिन से होती है। मान्यता है कि इस दिन पितृ लोक से हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और हमारे द्वारा किए गए तर्पण से तृप्त होते हैं।

क्यों मनाते हैं महालया अमावस्या?

  • पितृऋण चुकाने का सर्वोत्तम अवसर
  • पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु
  • कुल परंपरा को निभाने की महत्वपूर्ण तिथि
  • मोक्ष प्राप्ति में सहायक

महालया अमावस्या की पौराणिक कथा

पुराणों में वर्णित है कि इसी दिन माता दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। बंगाल में इस दिन से दुर्गा पूजा के उत्सव की शुरुआत मानी जाती है।

महालया और देवी पूजन

इस दिन “चंडी पाठ” का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन देवी दुर्गा की आराधना करने से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

महालया अमावस्या पर क्या करें?

पितृ तर्पण की विधि

  • सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर पवित्र वस्त्र धारण करें
  • गंगाजल, काले तिल, जौ और कुशा लेकर तर्पण करें
  • पितृ देवता, देवऋषि और सप्तऋषियों को जल अर्पित करें
  • ब्राह्मण को भोजन कराएँ और दक्षिणा दें

मंत्रोच्चारण

तर्पण के समय यह मंत्र पढ़ें:
“ॐ पितृदेवताभ्यो नमः, अस्य श्री विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्याद्य ब्रह्मणो द्वितीयपरार्धे…”

महालया अमावस्या पर विशेष सावधानियाँ

  • इस दिन किसी भी प्रकार का शुभ कार्य न करें
  • मांसाहार और मदिरा सेवन वर्जित है
  • क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचें
  • दान-पुण्य अवश्य करें

महालया अमावस्या का आध्यात्मिक प्रभाव

ज्योतिषियों के अनुसार इस दिन चंद्रमा का प्रभाव विशेष रहता है। पितृ दोष से मुक्ति के लिए यह सर्वोत्तम समय होता है। इस दिन किए गए श्राद्ध कर्म से पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वैज्ञानिक मानते हैं कि इस समय पृथ्वी की चुंबकीय स्थिति विशेष होती है जो आत्माओं के साथ संवाद को सुगम बनाती है।

निष्कर्ष

महालया अमावस्या 2025 हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देती है। इस पावन तिथि पर पितृ तर्पण और दान-पुण्य करके हम न केवल उनकी आत्मा को शांति देते हैं बल्कि अपने जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं।

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