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Tulsi Vivah 2025 15 नवंबर को पूजन समय स्तुति पढ़ें सौभाग्य वरदान

15 नवंबर 2025 को तुलसी-शालीग्राम विवाह का शुभ अवसर। पूजन के दौरान इस विशेष स्तुति का पाठ करें और सौभाग्य का वरदान पाएं। जानें पूजा विधि और महत्व।

Published July 2, 2026
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3 Min Read

तुलसी विवाह 2025: पवित्र परंपरा और आध्यात्मिक महत्व

हिंदू धर्म में तुलसी विवाह का विशेष महत्व है। यह शुभ अवसर देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी) के दूसरे दिन मनाया जाता है। सन् 2025 में यह पर्व 15 नवंबर को पड़ रहा है। इस दिन तुलसी जी का विवाह भगवान शालिग्राम के साथ संपन्न कराया जाता है। मान्यता है कि इस पूजन से घर में सुख-समृद्धि आती है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

Contents
तुलसी विवाह 2025: पवित्र परंपरा और आध्यात्मिक महत्वतुलसी विवाह का पौराणिक महत्वतुलसी विवाह 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्तपूजन का शुभ समयतुलसी विवाह की विधिसामग्री की तैयारीपूजन विधितुलसी विवाह में पढ़ने योग्य स्तुतितुलसी स्तोत्रशालिग्राम स्तुतितुलसी विवाह का फल और महत्वनिष्कर्ष

तुलसी विवाह का पौराणिक महत्व

पुराणों के अनुसार, तुलसी जी का जन्म वृंदा नामक पतिव्रता स्त्री के रूप में हुआ था। उनकी पवित्रता और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें तुलसी के पौधे के रूप में पूजनीय होने का वरदान दिया। तुलसी विवाह की परंपरा इसी पौराणिक घटना से जुड़ी है।

  • तुलसी को विष्णु प्रिया कहा जाता है
  • शालिग्राम भगवान विष्णु का पत्थर रूप हैं
  • इस विवाह से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है

तुलसी विवाह 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

15 नवंबर 2025 को तुलसी विवाह का पावन पर्व मनाया जाएगा। इस दिन प्रातःकाल से ही विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। शुभ मुहूर्त के अनुसार विवाह संस्कार संपन्न कराना चाहिए।

पूजन का शुभ समय

  • प्रातःकाल: 6:00 बजे से 8:00 बजे तक
  • मध्याह्न: 11:30 बजे से 12:30 बजे तक
  • सायंकाल: 4:00 बजे से 6:00 बजे तक

तुलसी विवाह की विधि

तुलसी विवाह को संपन्न करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें:

सामग्री की तैयारी

  • तुलसी का पौधा
  • शालिग्राम शिला
  • लाल चुनरी
  • फूल, अक्षत, रोली
  • मिष्ठान्न और फल
  • दीपक और धूप

पूजन विधि

  1. सबसे पहले तुलसी के पौधे और शालिग्राम को स्नान कराएं
  2. तुलसी को दुल्हन के समान सजाएं
  3. शालिग्राम को वर के रूप में सजाकर तुलसी के समीप रखें
  4. लाल चुनरी से तुलसी और शालिग्राम को बांधें
  5. मंत्रोच्चारण के साथ विवाह संस्कार संपन्न करें

तुलसी विवाह में पढ़ने योग्य स्तुति

तुलसी विवाह के समय निम्नलिखित मंत्रों का पाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है:

तुलसी स्तोत्र

नमस्तुलसी कल्याणी नमो विष्णुप्रिये शुभे।
नमो मोक्षप्रदायिनी धन्ये पापहरे नमः॥

शालिग्राम स्तुति

शालिग्रामं नमस्तुभ्यं विष्णुरूपाय ते नमः।
यज्ञेश्वर नमस्तेऽस्तु देवदेव नमोऽस्तु ते॥

तुलसी विवाह का फल और महत्व

तुलसी विवाह का पूजन करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं:

  • पारिवारिक सुख-शांति में वृद्धि
  • धन-धान्य की प्राप्ति
  • सौभाग्य का वरदान
  • पापों से मुक्ति
  • मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त

निष्कर्ष

तुलसी विवाह हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र पर्व है। 15 नवंबर 2025 को इस शुभ अवसर पर तुलसी और शालिग्राम का विवाह संपन्न करके भक्तजन भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं। उपरोक्त मंत्रों और विधि के अनुसार पूजन करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

आइए, हम सभी इस पावन पर्व पर तुलसी माता और भगवान शालिग्राम का आशीर्वाद प्राप्त करें और अपने जीवन को धन्य बनाएं।

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