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Dev Uthani Ekadashi 2025: आज से चातुर्मास समाप्त, शुरू होंगे विवाह एवं अन्य मांगलिक कार्य
हिंदू धर्म में देव उठनी एकादशी का विशेष महत्व है। यह वह पावन तिथि है जब भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा के बाद जागते हैं और धरती पर मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। 2025 में यह पर्व 8 नवंबर, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन से चातुर्मास की समाप्ति मानी जाती है और विवाह, गृहप्रवेश जैसे शुभ कार्यों का आरंभ होता है।
देव उठनी एकादशी का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवोत्थान एकादशी) तक का समय चातुर्मास कहलाता है। इस दौरान भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं। देवोत्थान एकादशी पर भगवान का शयन समाप्त होता है, इसलिए इसे “प्रबोधिनी एकादशी” भी कहते हैं।
- इस दिन तुलसी विवाह की परंपरा है
- व्रत रखने से मोक्ष की प्राप्ति होती है
- शुभ कार्यों के लिए द्वार खुल जाते हैं
2025 में देव उठनी एकादशी की तिथि एवं मुहूर्त
देवोत्थान एकादशी तिथि: 8 नवंबर 2025 (शनिवार)
एकादशी तिथि आरंभ: 7 नवंबर रात 10:16 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त: 8 नवंबर रात 11:42 बजे तक
पारण मुहूर्त: 9 नवंबर सुबह 6:36 से 8:52 तक
देव उठनी एकादशी व्रत विधि
इस व्रत को करने के लिए दशमी की रात से ही नियमों का पालन शुरू कर देना चाहिए:
- दशमी की रात: सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें
- एकादशी सुबह: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
- पूजा विधि: भगवान विष्णु की मूर्ति को दूध से स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाएं
- भोग: केले, अनार, गन्ना और मौसमी फलों का भोग लगाएं
- रात्रि जागरण: भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें
तुलसी विवाह की परंपरा
इस दिन तुलसी विवाह का विशेष महत्व है। तुलसी जी को विष्णु भगवान की पत्नी माना जाता है। इस दिन तुलसी के पौधे की शालिग्राम जी से विवाह की रस्म होती है। यह संस्कार संध्या के समय किया जाता है।
- तुलसी को लाल चुनरी पहनाई जाती है
- शालिग्राम जी को सजाकर मंडप में रखा जाता है
- वैदिक मंत्रों के साथ विवाह संपन्न होता है
चातुर्मास के बाद शुरू होते हैं ये शुभ कार्य
देवोत्थान एकादशी से हिंदू शुभ मुहूर्त की शुरुआत हो जाती है:
- विवाह संस्कार
- गृह प्रवेश एवं वास्तु पूजन
- नए व्यापार का आरंभ
- यज्ञोपवीत संस्कार
- नामकरण एवं अन्नप्राशन
देव उठनी एकादशी की कथा
पद्म पुराण के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु गहरी निद्रा में थे। दैत्यों ने इस अवसर का फायदा उठाकर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। देवताओं ने माता लक्ष्मी से प्रार्थना की। तब माता ने एकादशी के दिन भगवान को जगाया। भगवान ने दैत्यों का वध कर देवताओं को स्वर्ग वापस दिलाया। तभी से यह पर्व मनाया जाता है।
देव उठनी एकादशी के मंत्र
इस दिन इन मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना गया है:
- विष्णु स्तोत्र: “शान्ताकारं भुजगशयनं…”
- एकादशी मंत्र: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
- तुलसी मंत्र: “वृन्दा वृन्दावनी विश्वपूजिता…”
निष्कर्ष
देव उठनी एकादशी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है जो भगवान विष्णु के जागरण और नए शुभ कार्यों के आरंभ का प्रतीक है। 2025 में यह पर्व 8 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन व्रत रखने, तुलसी विवाह करने और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। चातुर्मास के बाद अब विवाह आदि मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी।
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