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Safala Ekadashi 2025: कब है साल की अंतिम एकादशी तिथि मुहूर्त पूजा विधि

साल की अंतिम एकादशी, Safala Ekadashi 2025 की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जानें। इस पावन दिन का महत्व और व्रत कथा समझकर पूर्ण लाभ उठाएं।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

सफला एकादशी 2025: कब है साल की अंतिम एकादशी?

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। यह भगवान विष्णु को समर्पित एक पवित्र दिन माना जाता है। सफला एकादशी, जिसे पौष कृष्ण एकादशी भी कहा जाता है, वर्ष की अंतिम एकादशी होती है। यह व्रत पौष माह के कृष्ण पक्ष में मनाया जाता है। 2025 में यह पावन तिथि 30 दिसंबर को पड़ रही है। इस लेख में हम आपको सफला एकादशी की तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व के बारे में विस्तार से बताएंगे।

Contents
सफला एकादशी 2025: कब है साल की अंतिम एकादशी?सफला एकादशी 2025 का महत्वसफला एकादशी 2025 की तिथि और मुहूर्तसफला एकादशी तिथिएकादशी व्रत मुहूर्तसफला एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्तसफला एकादशी व्रत विधिव्रत की तैयारीपूजा विधिव्रत पारण विधिसफला एकादशी व्रत कथासफला एकादशी व्रत के लाभसफला एकादशी व्रत में क्या न करेंनिष्कर्ष

सफला एकादशी 2025 का महत्व

सफला एकादशी का अर्थ है “सफलता प्रदान करने वाली एकादशी”। पद्म पुराण के अनुसार, इस व्रत को करने से व्यक्ति को जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है। यह व्रत न केवल मोक्ष प्रदान करता है बल्कि सांसारिक सुखों की प्राप्ति में भी सहायक होता है।

  • इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है
  • व्रत रखने से पापों का नाश होता है
  • सफला एकादशी व्रत कथा सुनने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं

सफला एकादशी 2025 की तिथि और मुहूर्त

सफला एकादशी तिथि

30 दिसंबर 2025, मंगलवार

एकादशी व्रत मुहूर्त

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 29 दिसंबर 2025 को रात 08:17 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 30 दिसंबर 2025 को रात 10:41 बजे
  • पारण समय (व्रत तोड़ने का समय): 31 दिसंबर सुबह 07:12 से 09:21 तक

सफला एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त

सफला एकादशी के दिन पूजा के लिए प्रातःकाल 06:30 से 08:30 तक का समय सर्वोत्तम माना गया है। इस समय भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

सफला एकादशी व्रत विधि

व्रत की तैयारी

  • दशमी के दिन से ही ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • रात्रि में सात्विक भोजन ग्रहण करें
  • एकादशी के दिन प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें

पूजा विधि

  1. प्रातःकाल स्नान के बाद घर के मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करें
  2. लाल कपड़े पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें
  3. भगवान को पीले फूल, तुलसी दल और फल अर्पित करें
  4. घी का दीपक जलाएं और धूप दिखाएं
  5. इस मंत्र का जाप करें: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
  6. सफला एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें
  7. रात्रि में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें

व्रत पारण विधि

द्वादशी तिथि के दिन सूर्योदय के बाद ब्राह्मण को भोजन करवाकर दान-दक्षिणा देने के बाद ही व्रत तोड़ें। पारण के समय फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करें।

सफला एकादशी व्रत कथा

पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, माहिष्मती नगर में एक राजा महिष्मान राज्य करता था। उसके चार पुत्र थे, जिनमें सबसे बड़ा लुम्पक अत्यंत दुष्ट और पापी था। वह पिता की संपत्ति को व्यर्थ गंवाता था। अंततः राजा ने उसे राज्य से निकाल दिया।

लुम्पक जंगल में रहने लगा और चोरी-डकैती करने लगा। एक बार पौष माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को वह इतना थक गया कि रात भर पेड़ के नीचे सो गया। प्रातःकाल जब वह उठा तो एकादशी का दिन था। भूख-प्यास से व्याकुल होकर भी उसने अनजाने में ही व्रत रख लिया।

संयोगवश उसी दिन उसकी मृत्यु हो गई। लेकिन सफला एकादशी व्रत के प्रभाव से उसे विष्णुलोक की प्राप्ति हुई। इस प्रकार अनजाने में भी इस व्रत को करने से उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।

सफला एकादशी व्रत के लाभ

  • मोक्ष प्राप्ति: इस व्रत को करने से मनुष्य को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है
  • पापों का नाश: सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है
  • धन-समृद्धि: घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है
  • सुख-शांति: पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है

सफला एकादशी व्रत में क्या न करें

  • एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित है
  • क्रोध, झूठ बोलने और बुरे विचारों से बचें
  • तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) का सेवन न करें
  • दिन भर आलस्य न करें, भगवान का स्मरण करते रहें

निष्कर्ष

सफला एकादशी वर्ष की अंतिम एकादशी होती है जो 2025 में 30 दिसंबर को मनाई जाएगी। यह व्रत जीवन में सफलता प्रदान करने वाला माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत कथा सुनने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सफला एकादशी व्रत का महत्व पद्म पुराण में विस्तार से वर्णित है। इस पावन एकादशी पर व्रत रखकर भक्त भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

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