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कार्तिक पूर्णिमा 2025: आध्यात्मिक प्रकाश का पर्व
कार्तिक पूर्णिमा हिंदू धर्म के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है, जो भक्ति, तपस्या और आत्मशुद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, जिसे “देव दीपावली” भी कहते हैं। 2025 में यह पर्व 14 नवंबर, शुक्रवार को पड़ रहा है। इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व है।
इस लेख में जानिए:
- कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
- पूजा विधि और विशेष मंत्र
- शुभ मुहूर्त एवं तिथि काल
- परंपराएं एवं कथाएं
कार्तिक पूर्णिमा का महत्व
शास्त्रों में कार्तिक पूर्णिमा को “मोक्षदायिनी तिथि” कहा गया है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। इसके तीन प्रमुख आध्यात्मिक महत्व हैं:
1. देवताओं का प्रकाश पर्व
पुराणों के अनुसार, इस दिन देवता पृथ्वी पर अवतरित होते हैं। त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु, महेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
2. तुलसी विवाह का दिन
इसी पूर्णिमा को तुलसी जी का शालिग्राम भगवान से विवाह होता है। घर-घर में तुलसी पूजन की परंपरा है।
3. गुरु नानक जयंती
सिख समुदाय इस दिन गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व मनाता है, जिसे प्रकाशोत्सव के रूप में जाना जाता है।
पूजा विधि: सरल चरणों में
सुबह की रीति
- ब्रह्म मुहूर्त (04:30 बजे से) में गंगा स्नान या जल में गंगाजल मिलाकर स्नान
- सूर्य को अर्घ्य देते हुए इस मंत्र का जाप: “ॐ सूर्याय नम:”
- साफ वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की पूजा
मुख्य पूजा सामग्री
- तुलसी पत्र, फूल, धूप-दीप
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
- केसर युक्त चंदन
विशेष मंत्र
इस मंत्र का 108 बार जाप करें:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
शुभ तिथि एवं मुहूर्त (2025)
पूर्णिमा तिथि आरंभ: 13 नवंबर रात 09:42 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 14 नवंबर रात 11:46 बजे
श्रेष्ठ समय (पूजा मुहूर्त)
- स्नान समय: 14 नवंबर सुबह 05:18 से 06:42
- पूजा काल: सुबह 10:15 से दोपहर 12:30
- तुलसी पूजन: सायं 04:30 बजे के बाद
परंपराएं एवं व्रत कथा
दीपदान की महिमा
इस दिन घाटों पर दीप जलाकर दान करने की परंपरा है। कहते हैं कि ऐसा करने से पितृ दोष शांत होता है।
व्रत कथा संक्षेप
पुराणों में वर्णित है कि राजा सत्यव्रत ने इसी दिन कठोर तपस्या कर भगवान विष्णु से वरदान प्राप्त किया था। उनकी कृपा से उनका राज्य धन-धान्य से परिपूर्ण हो गया।
निष्कर्ष: आत्मशुद्धि का पर्व
कार्तिक पूर्णिमा हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला पावन अवसर है। इस दिन सात्विक भोजन, जप-तप और दान से मनुष्य जीवन के चारों पुरुषार्थ- धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। आइए, इस वर्ष हम सभी इस पर्व को पूर्ण श्रद्धा से मनाएं और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करें।
ध्यान दें: सभी समय भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार हैं। स्थानीय पंचांग से तिथि की पुष्टि अवश्य करें।
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