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Parshuram Jayanti 2025 भगवान परशुराम सहित आठ चिरंजीवी

जानें Parshuram Jayanti 2025 के बारे में और भगवान परशुराम सहित आठ चिरंजीवियों की अमर कथा, जो आज भी जीवित हैं। पौराणिक रहस्यों को उजागर करता यह लेख आपके लिए खास है।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

परशुराम जयंती 2025: भगवान परशुराम सहित आठ हैं चिरंजीवी

भारतीय संस्कृति में चिरंजीवी का अर्थ है वे दिव्य व्यक्तित्व जो काल के प्रवाह से परे हैं और आज भी जीवित माने जाते हैं। परशुराम जयंती के पावन अवसर पर आइए जानते हैं भगवान परशुराम सहित उन आठ अमर आत्माओं के बारे में, जिन्हें हिंदू धर्म में अष्ट चिरंजीवी कहा जाता है।

Contents
परशुराम जयंती 2025: भगवान परशुराम सहित आठ हैं चिरंजीवीअष्ट चिरंजीवी: कौन हैं ये आठ अमर?भगवान परशुराम: कलयुग के अंत तक रहेंगे धरती परपरशुराम की अमरता का रहस्यअन्य चिरंजीवियों की महिमा1. हनुमान जी: संकटमोचन और अजर-अमर2. विभीषण: लंका के धर्माचार्य3. वेदव्यास: सनातन ज्ञान के प्रणेता4. अश्वत्थामा: शापित अमरता5. कृपाचार्य: शस्त्र विद्या के आचार्य6. महाबली बाली: पाताल के राजा7. मार्कण्डेय ऋषि: मृत्यु को जीतने वालेपरशुराम जयंती 2025: पूजा विधि और महत्वपूजा की विधिनिष्कर्ष

अष्ट चिरंजीवी: कौन हैं ये आठ अमर?

शास्त्रों के अनुसार, ये आठों चिरंजीवी कलयुग के अंत तक धरती पर रहेंगे और धर्म की रक्षा करेंगे। इनके नाम हैं:

  • भगवान परशुराम – विष्णु के छठे अवतार
  • हनुमान जी – रामभक्त और वायुपुत्र
  • विभीषण – रावण के धर्मात्मा भाई
  • वेदव्यास – महाभारत के रचयिता
  • अश्वत्थामा – द्रोणपुत्र और महायोद्धा
  • कृपाचार्य – कौरव-पांडवों के गुरु
  • महाबली बाली – भगवान विष्णु के परम भक्त
  • मार्कण्डेय ऋषि – मृत्युंजय मंत्र के ज्ञाता

भगवान परशुराम: कलयुग के अंत तक रहेंगे धरती पर

परशुराम जयंती पर विशेष रूप से भगवान परशुराम की महिमा का स्मरण किया जाता है। वे न केवल विष्णु के अवतार हैं, बल्कि कल्कि अवतार के समय तक धरती पर रहने वाले हैं।

परशुराम की अमरता का रहस्य

  • शिवजी से प्राप्त किया था अक्षय तेज
  • माता रेणुका और पिता जमदग्नि का आशीर्वाद
  • 21 बार क्षत्रियों का संहार करके किया था धर्मस्थापन
  • आज भी मान्यता है कि मैहर देवी मंदिर (मध्य प्रदेश) में निवास करते हैं

अन्य चिरंजीवियों की महिमा

1. हनुमान जी: संकटमोचन और अजर-अमर

रामायण काल से ही हनुमान जी की उपस्थिति के प्रमाण मिलते हैं। हनुमान चालीसा में लिखा है: “अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता”।

2. विभीषण: लंका के धर्माचार्य

रावण के छोटे भाई विभीषण को भगवान राम ने अमरता का वरदान दिया था। मान्यता है कि वे आज भी लंका में रहते हैं।

3. वेदव्यास: सनातन ज्ञान के प्रणेता

महाभारत और पुराणों की रचना करने वाले व्यासजी का जन्म हर युग में होता है। वे ज्ञान के अक्षय स्रोत हैं।

4. अश्वत्थामा: शापित अमरता

गुरु द्रोण के पुत्र अश्वत्थामा को भगवान कृष्ण ने 3000 वर्षों तक रोगग्रस्त रहने का शाप दिया था। कहते हैं वे आज भी भटक रहे हैं।

5. कृपाचार्य: शस्त्र विद्या के आचार्य

कौरव-पांडवों के गुरु कृपाचार्य को भी अमरता प्राप्त है। वे युद्ध कौशल और धर्मनीति के ज्ञाता हैं।

6. महाबली बाली: पाताल के राजा

भगवान विष्णु के परम भक्त बालि को वामन अवतार में पाताल का राज्य दिया गया। प्रह्लाद के पौत्र बालि आज भी वहाँ राज करते हैं।

7. मार्कण्डेय ऋषि: मृत्यु को जीतने वाले

16 वर्ष की आयु में ही मृत्युंजय मंत्र के प्रभाव से यमराज को पराजित करने वाले मार्कण्डेय ऋषि अजर-अमर हैं।

परशुराम जयंती 2025: पूजा विधि और महत्व

परशुराम जयंती हिन्दू पंचांग के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। 2025 में यह पर्व 30 अप्रैल को पड़ रहा है।

पूजा की विधि

  • प्रातः स्नान करके लाल वस्त्र धारण करें
  • परशुराम जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
  • ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम: प्रचोदयात् मंत्र का जाप करें
  • गुड़ और घी का भोग लगाएं
  • ब्राह्मणों को दान दें

निष्कर्ष

अष्ट चिरंजीवी हमारी सनातन परंपरा के प्रतीक हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि धर्म और सत्य कभी नष्ट नहीं होते। परशुराम जयंती का पर्व हमें यह संदेश देता है कि अधर्म पर धर्म की विजय अवश्यंभावी है। आइए, हम इस पावन अवसर पर भगवान परशुराम और सभी चिरंजीवियों के चरणों में श्रद्धा-भाव से नमन करें।

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