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Guruvar Aarti भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की आरती मनचाहा फल

Published June 26, 2026
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5 Min Read

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Contents
गुरुवार आरती: भगवान विष्णु के साथ करें बृहस्पति देव की आरती, मिलेगा मनचाहा फलगुरुवार आरती का महत्वगुरुवार आरती की विधिपूजन सामग्रीपूजा विधानबृहस्पति देव की आरतीआरती के बाद का मंत्रगुरुवार व्रत कथागुरुवार आरती के लाभविशेष सुझावनिष्कर्ष

गुरुवार आरती: भगवान विष्णु के साथ करें बृहस्पति देव की आरती, मिलेगा मनचाहा फल

हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति देव को समर्पित माना जाता है। यह दिन विशेष रूप से भक्ति, समृद्धि और ज्ञान प्राप्ति के लिए शुभ माना जाता है। गुरुवार आरती का विधान करने से भक्तों को मनचाहा फल प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। आइए जानते हैं इस आरती का महत्व, विधि और पूजन के लाभ।

गुरुवार आरती का महत्व

गुरुवार के दिन बृहस्पति देव की आरती करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। बृहस्पति देव को देवगुरु कहा जाता है और ये ज्ञान, बुद्धि और धन के प्रदाता हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ बृहस्पति देव की आरती करने से विशेष लाभ मिलता है:

  • कुंडली के ग्रह दोषों का निवारण होता है
  • शिक्षा और करियर में सफलता मिलती है
  • आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है
  • पारिवारिक कलह दूर होता है
  • मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं

गुरुवार आरती की विधि

पूजन सामग्री

गुरुवार की आरती करने से पहले निम्नलिखित सामग्री तैयार करें:

  • पीले फूल (गेंदा, सूरजमुखी या अन्य पीले फूल)
  • पीला वस्त्र
  • हल्दी, चने की दाल और केसर
  • घी का दीपक
  • मिष्ठान (पीले रंग का प्रसाद – बेसन के लड्डू, केला आदि)
  • गंगाजल

पूजा विधान

सुबह स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को स्वच्छ करके वहां पीला आसन बिछाएं। भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। निम्न क्रम में पूजा करें:

  1. सर्वप्रथम गणेश जी का स्मरण करें
  2. भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करें
  3. बृहस्पति देव को हल्दी और चने की दाल चढ़ाएं
  4. घी का दीपक जलाएं
  5. नीचे दी गई आरती करें
  6. अंत में प्रसाद वितरण करें

बृहस्पति देव की आरती

आरती करते समय मन को शांत रखें और पूर्ण श्रद्धा से निम्न मंत्रों का उच्चारण करें:

ॐ जय बृहस्पति देवा, स्वामी जय बृहस्पति देवा
ज्ञान बुद्धि दाता, हर मन की कामना पूरी करता॥

चरणों में शीश झुकाऊं, दीन-दुख हरो महाराज
गुरु ग्रह के देवता, करो मेरी पूजा स्वीकार॥

देहु ज्ञान का प्रकाश, दूर करो अज्ञान अंधकार
बृहस्पति देव की कृपा, जीवन में लाए उजियार॥

आरती के बाद का मंत्र

आरती समाप्त करने के बाद निम्न मंत्र का 108 बार जप करें:

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः

गुरुवार व्रत कथा

गुरुवार के दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव से जुड़ी कथा सुनना या पढ़ना अत्यंत फलदायी माना जाता है। प्राचीन काल में एक गरीब ब्राह्मण था जो नियमित रूप से गुरुवार का व्रत रखता था। एक दिन बृहस्पति देव ने उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिए और उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण कीं। इस कथा का सार यह है कि श्रद्धा और निष्ठा से की गई पूजा अवश्य फल देती है।

गुरुवार आरती के लाभ

नियमित रूप से गुरुवार की आरती करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • गुरु ग्रह की अनुकूलता प्राप्त होती है
  • शिक्षा और ज्ञान में वृद्धि होती है
  • नौकरी और व्यवसाय में उन्नति के योग बनते हैं
  • वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है
  • कर्ज और आर्थिक संकट से मुक्ति मिलती है
  • मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है

विशेष सुझाव

गुरुवार की आरती का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखें:

  • आरती के दिन पीले वस्त्र धारण करें
  • पूजा में पीले फूल और पीले प्रसाद का उपयोग करें
  • यदि संभव हो तो गुरुवार का व्रत रखें
  • पीले रंग का दान करें (पीले वस्त्र, पीला अनाज आदि)
  • आरती के बाद “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का जप करें

निष्कर्ष

गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की कृपा प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। गुरुवार आरती का विधान करने से जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता मिलती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आइए, इस पावन दिन की महिमा को समझें और नियमित रूप से पूजन-अर्चन करके देव कृपा प्राप्त करें। याद रखें, श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई भक्ति अवश्य फलित होती है।

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