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Parshuram Jayanti 2025 Date जानिए भगवान परशुराम के परिवार के बारे में

2025 में परशुराम जयंती की तिथि जानें और भगवान परशुराम के परिवार, कुल व इतिहास के बारे में रोचक तथ्य खोजें। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें!

Published July 2, 2026
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4 Min Read

परशुराम जयंती 2025: भगवान परशुराम के परिवार और कुल की पावन गाथा

भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का नाम सुनते ही शक्ति, तपस्या और न्याय की प्रतिमूर्ति आँखों के सामने आ जाती है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाने वाली परशुराम जयंती 2025 में हम आपको उनके परिवार, कुल परंपरा और अद्भुत जीवन प्रसंगों से रूबरू कराएँगे। यह लेख भक्ति भाव से सराबोर है, जिसमें ऋषि-मुनियों के वंशजों की गौरवशाली कथा छिपी है।

Contents
परशुराम जयंती 2025: भगवान परशुराम के परिवार और कुल की पावन गाथापरशुराम जयंती 2025 की तिथि और महत्वभगवान परशुराम का दिव्य परिवारमाता-पिता: तपस्या और ज्ञान का प्रतीकभाई-बहन: वीरता और समर्पण की कहानीभृगु कुल: जहाँ जन्मे थे परशुरामवंश परंपरा: विष्णु के तेज से उत्पन्न महान ऋषिकुलदेवी और कुल परंपराएँपरशुराम की पत्नी: देवी धरणी की कथापरशुराम और उनके शिष्यगुरु-शिष्य परंपरा का स्वर्णिम अध्यायपरशुराम जयंती पर विशेष पूजा विधिनिष्कर्ष: परशुराम जयंती का सार

परशुराम जयंती 2025 की तिथि और महत्व

सन 2025 में परशुराम जयंती 30 अप्रैल, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन का विशेष मुहूर्त:

  • तृतीया तिथि प्रारंभ: 29 अप्रैल सुबह 11:14 बजे
  • तृतीया तिथि समाप्त: 30 अप्रैल दोपहर 1:53 बजे
  • पूजा का शुभ समय: 30 अप्रैल सुबह 5:30 से 12:30 तक

भगवान परशुराम का दिव्य परिवार

माता-पिता: तपस्या और ज्ञान का प्रतीक

परशुरामजी के माता-पिता का चरित्र भक्ति और संयम की मिसाल है:

  • पिता: महर्षि जमदग्नि – भृगुवंशीय ऋषि, जिन्होंने अग्नि देव से कामधेनु गाय प्राप्त की
  • माता: देवी रेनुका – इक्ष्वाकु वंश की राजकुमारी, जिनकी पतिव्रता शक्ति से नदियाँ भी मार्ग बदल देती थीं

भाई-बहन: वीरता और समर्पण की कहानी

परशुरामजी के चार भाई थे, जिनमें से एक की कथा विशेष मार्मिक है:

  • वसु, विश्वानंद, ब्रह्मानंद और सुमेधा (सबसे छोटे भाई)
  • पौराणिक प्रसंगों में सुमेधा का वध माता रेनुका के शाप के कारण हुआ था

भृगु कुल: जहाँ जन्मे थे परशुराम

वंश परंपरा: विष्णु के तेज से उत्पन्न महान ऋषि

परशुरामजी का संबंध भृगुवंश से था, जिसकी उत्पत्ति स्वयं भगवान विष्णु के तेज से हुई:

  • संस्थापक: महर्षि भृगु (ब्रह्मा के मानस पुत्र)
  • प्रमुख ऋषि: च्यवन, और्व, शुक्राचार्य, जमदग्नि
  • विशेषता: इस वंश ने अग्नि पुराण सहित कई वैदिक ग्रंथों की रचना की

कुलदेवी और कुल परंपराएँ

भृगु कुल की कुछ अनूठी परंपराएँ:

  • कुलदेवी: माँ लक्ष्मी (भृगु ऋषि ने विष्णु का वक्ष स्थल देखकर उन्हें शाप दिया था)
  • विशेष व्रत: भृगु संहिता में वर्णित एकादशी व्रत
  • तपस्थली: गुजरात का भृगुकच्छ (आधुनिक भरूच)

परशुराम की पत्नी: देवी धरणी की कथा

कम ही लोग जानते हैं कि भगवान परशुराम विवाहित थे:

  • पत्नी का नाम: देवी धरणी (कुछ ग्रंथों में इन्हें प्रभावती भी कहा गया है)
  • विवाह प्रसंग: तपस्या से प्रसन्न होकर समुद्र देव ने धरणी को परशुरामजी को अर्पित किया
  • संतान: जीमूतवाहन नामक पुत्र (जिन्होंने नागलोक की रक्षा की)

परशुराम और उनके शिष्य

भगवान परशुराम ने तीन युगों में अनेक शिष्यों को दीक्षा दी:

  • महाभारत काल: भीष्म, द्रोण, कर्ण (शस्त्र विद्या के गुरु)
  • रामायण काल: लक्ष्मण (शिव धनुष का ज्ञान दिया)
  • अन्य प्रमुख शिष्य: हनुमान, सहदेव (नकुल के भाई)

गुरु-शिष्य परंपरा का स्वर्णिम अध्याय

परशुरामजी ने शस्त्र और शास्त्र दोनों की शिक्षा दी:

  • प्रसिद्ध गुरुकुल: माहिष्मती नगरी (वर्तमान मध्य प्रदेश)
  • विशेष ज्ञान: ब्रह्मास्त्र, पाशुपतास्त्र, परशु विद्या
  • शिक्षा पद्धति: “युद्ध धर्म” का सिद्धांत (अधर्मियों के विरुद्ध ही शस्त्र उठाना)

परशुराम जयंती पर विशेष पूजा विधि

इस दिन इस प्रकार पूजन करें:

  • प्रातःकाल: गंगाजल से स्नान, लाल वस्त्र धारण
  • मंत्र: “ॐ जमदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम: प्रचोदयात्”
  • प्रसाद: गुड़-चना, खीर, फल
  • दान: कुल्हाड़ी, ग्रंथ, अन्न (ब्राह्मणों को दें)

निष्कर्ष: परशुराम जयंती का सार

परशुराम जयंती केवल एक तिथि नहीं, बल्कि धर्म और न्याय के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उनका भृगु कुल आज भी हमें संयम, तपस्या और शस्त्र-शास्त्र के समन्वय की शिक्षा देता है। 2025 में इस पर्व को विशेष भक्ति भाव से मनाकर हम उस महान वंश के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त कर सकते हैं।

ध्यान दें: परशुराम जयंती पर क्षत्रिय समाज द्वारा शस्त्र पूजन की परंपरा है, किंतु यह दिन सभी वर्णों के लिए पूज्य है।

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